China Fuel Price Hike: ईरान में जारी युद्ध की वजह से चीन के आम लोगों को बड़ा झटका लगा है। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक चीन में महज एक पखवाड़े के भीतर दूसरी बार डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ाए गए हैं। ईरानी ऑयल का चीन सबसे बड़ा खरीदार है। युद्ध के चलते होर्मुज से होने वाली क्रूड ऑयल और गैस की सप्लाई बाधित है। इसकी वजह से चीन सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है। इस युद्ध की वजह से ब्रेंड क्रूड ऑयल के दाम लगातार 100 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बने हुए हैं।
चीन में बढ़ी फ्यूल प्राइस
लगातार दूसरी बढ़ोतरी, क्या है वजह
चीन की शीर्ष आर्थिक संस्था नेशनल डेवेलपमेंट एंड रिफॉर्म कमीशन( NDRC) ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में नई बढ़ोतरी का ऐलान किया। यह बदलाव बुधवार से लागू होगा। इससे पहले 23 मार्च को भी कीमतें बढ़ाई गई थीं। यानी महज करीब 15 दिनों के भीतर दूसरी बार ईंधन महंगा हुआ है। इसके पीछे मुख्य वजह वेस्ट एशिया में जारी युद्ध है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है।
वेस्ट एशिया तनाव से बिगड़ा ऑयल बैलेंस
US-Israel-Iran conflict के चलते सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम रूट पर जोखिम बढ़ने से ग्लोबल ट्रेड प्रभावित हो सकता है। तेल की सप्लाई में किसी भी बाधा का सीधा असर कीमतों पर पड़ता है, और यही कारण है कि चीन जैसे बड़े आयातक देश को लगातार कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं।
चीन की रणनीति: पहले से तैयारी
चीन ने 23 मार्च को ही संभावित फ्यूल संकट को देखते हुए कीमतें बढ़ा दी थीं। यह कदम सप्लाई शॉक से निपटने और घरेलू बाजार को स्थिर रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का फोकस है कि अचानक आने वाले झटकों से अर्थव्यवस्था पर ज्यादा असर न पड़े और ईंधन की उपलब्धता बनी रहे।
| ईंधन | मौजूदा कीमत (लगभग) | बढ़ोतरी (7 अप्रैल) | नई अनुमानित कीमत | फीसदी वृद्धि |
|---|---|---|---|---|
| पेट्रोल | ~8.2 युआन/लीटर | +0.35–0.45 युआन/लीटर | ~8.5–8.7 युआन/लीटर | ~4.2% – 5.5% |
| डीजल | ~7.5–7.8 युआन/लीटर | +0.30–0.40 युआन/लीटर | ~7.8–8.1 युआन/लीटर | ~4.0% – 5.2% |
भारत समेत एशिया पर क्या असर
चीन की इस बढ़ोतरी को संकेत माना जा रहा है कि एशिया में ईंधन महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। अगर कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊपर बनी रहीं, तो भारत जैसे आयातक देशों में भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने का जोखिम रहेगा। ऊर्जा महंगाई का असर सिर्फ ट्रांसपोर्ट नहीं बल्कि मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और महंगाई दर पर भी पड़ता है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है। अब नजर अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों और वेस्ट एशिया के हालात पर रहेगी। अगर तनाव और बढ़ता है, तो ईंधन कीमतों में और तेजी देखने को मिल सकती है, जिसका असर ग्लोबल ग्रोथ पर भी पड़ सकता है।
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