केंद्र सरकार ने आगामी त्योहारी सीजन के मद्देनजर और राज्यों को 1,01,603 करोड़ रुपये का कर हस्तांतरित किया है। केंद्र सरकार ने 1 अक्टूबर, 2025 को राज्य सरकारों को ₹ 1,01,603 करोड़ का अतिरिक्त कर हस्तांतरण जारी किया है, जो 10 अक्टूबर 2025 को जारी किए जाने वाले सामान्य मासिक हस्तांतरण के अतिरिक्त है। मंत्रालय ने बताया कि राज्यों को यह अग्रिम किस्त पूंजीगत व्यय में तेजी लाने और उनके विकास और कल्याण संबंधी व्यय को वित्तपोषित करने में सक्षम बनाने के लिए जारी की गई है।
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वित्त मंत्रालय ने बुधवार को एक बयान में कहा कि यह अतिरिक्त आवंटन 81,735 करोड़ रुपये के सामान्य मासिक कर आवंटन के अतिरिक्त है। मासिक कर आवंटन 10 अक्टूबर को जारी होना है। मंत्रालय ने कहा कि यह कदम सहकारी संघवाद और 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने के लक्ष्य के अनुरूप है। केंद्र द्वारा एकत्रित कर का 41 प्रतिशत हिस्सा वित्त वर्ष के दौरान विभिन्न किस्तों में राज्यों को आवंटित किया जाता है।
यूपी को मिले सबसे ज्यादा रुपये
देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश को सबसे अधिक 18,227 करोड़ रुपए मिले, इसके बाद बिहार (10,219 करोड़ रुपए), मध्य प्रदेश (7,976 करोड़ रुपए), पश्चिम बंगाल (7,644 करोड़ रुपए), महाराष्ट्र (6,418 करोड़ रुपए) और राजस्थान (6,123 करोड़ रुपए) का स्थान रहा।
आंध्र प्रदेश (4,112 करोड़ रुपए), ओडिशा (4,601 करोड़ रुपए), तमिलनाडु (4,144 करोड़ रुपए), कर्नाटक (3,705 करोड़ रुपए) और झारखंड (3,360 करोड़ रुपए) को भी महत्वपूर्ण अतिरिक्त कर हस्तांतरण प्राप्त हुआ।
इससे पहले, वित्त मंत्रालय ने कहा था कि केंद्र ने अप्रैल-जुलाई के दौरान करों में हिस्सेदारी के रूप में राज्य सरकारों को 4,28,544 करोड़ रुपए हस्तांतरित किए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 61,914 करोड़ रुपए अधिक है।
इस बीच, केंद्र सरकार को इस अवधि के दौरान 10,95,209 करोड़ रुपए प्राप्त हुए, जो 2025-26 के बजट अनुमानों (बीई) का 31.3 प्रतिशत है।
इसमें से 6,61,812 करोड़ रुपए केंद्र को प्राप्त शुद्ध कर राजस्व, 4,03,608 करोड़ रुपए गैर-कर राजस्व और 29,789 करोड़ रुपए गैर-ऋण पूंजीगत प्राप्तियां हैं। इस अवधि के दौरान केंद्र सरकार द्वारा किया गया कुल व्यय 15,63,625 करोड़ रुपए था, जो 2025-26 के बजट अनुमानों का 30.9 प्रतिशत है।
इस कुल राशि में से 12,16,699 करोड़ रुपए राजस्व खाते में और 3,46,926 करोड़ रुपए पूंजी खाते में हैं, जो बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर खर्च किए जाते हैं। कुल राजस्व व्यय में ब्याज भुगतान का योगदान 4,46,690 करोड़ रुपए रहा, जबकि प्रमुख सब्सिडी का योगदान 1,13,592 करोड़ रुपए रहा।
