हेल्थ इंश्योरेंस: कैशलेस या रीइम्बर्समेंट? अस्पताल में भर्ती होने से पहले जरूर जानें ये बातें

Health Insurance: कैशलेस और रीइम्बर्समेंट स्वास्थ्य बीमा क्लेम चुकाने के दो तरीके हैं। कैशलेस में कंपनी सीधे अस्पताल को भुगतान करती है, जबकि रीइम्बर्समेंट में मरीज को बाद में पैसे मिलते हैं। कुल भुगतान पॉलिसी शर्तों पर निर्भर करता है।

Health Insurance : स्वास्थ्य बीमा या हेल्थ इंश्योरेंस लेने का मुख्य मकसद यही होता है कि किसी मेडिकल इमरजेंसी के दौरान आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े। लेकिन जब किसी को अचानक अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है, तो सबसे पहला सवाल यही उठता है कि पेमेंट कैसे करें? अस्पताल में कैशलेस (Cashless claims) इलाज करवाएं या खुद पैसे देकर बाद में इंश्योरेंस कंपनी से रीइम्बर्समेंट का दावा (Reimbursement claims) करें? अक्सर लोग इन्हें दो अलग-अलग तरह के हेल्थ इंश्योरेंस समझ लेते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। कैशलेस और रीइम्बर्समेंट क्लेम सेटल करने यानी बिल चुकाने के दो तरीके हैं। आपकी पॉलिसी कितनी रकम कवर करेगी, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने कौन-सी पॉलिसी चुनी है और उसकी नियम व शर्तें क्या हैं। आइए समझते हैं वे 5 जरूरी बातें, जो हर पॉलिसीधारक को पता होनी चाहिए।

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कैशलेस या रीइंबर्समेंट: हर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसीहोल्डर को ये बातें पता होनी चाहिए (तस्वीर-istock)

सिर्फ तरीका बदलता है, पॉलिसी का कवर नहीं

कैशलेस और रीइम्बर्समेंट, दोनों ही एक ही पॉलिसी को प्रोसेस करने के दो अलग रास्ते हैं। कैशलेस सुविधा चुनने पर इंश्योरेंस कंपनी अस्पताल के साथ मिलकर सीधे क्लेम की स्वीकृत राशि का भुगतान कर देती है, और आपको सिर्फ वही पैसे देने होते हैं जो पॉलिसी में कवर नहीं हैं। वहीं रीइम्बर्समेंट में आपको पहले अपनी जेब से पूरा बिल चुकाना पड़ता है, फिर कागजात जमा करने के बाद कंपनी पैसे वापस करती है। दोनों ही मामलों में पॉलिसी के नियम, जैसे वेटिंग पीरियड, डिडक्टिबल, को-पेमेंट और कटौती समान रूप से लागू होती हैं। कैशलेस का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि पूरा बिल कंपनी ही भरेगी।

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