बैंक अकाउंट होल्डर की मौत के बाद नॉमिनी को पैसा मिलने में क्यों आती है दिक्कत? आज ही चेक करें ये 2 जरूरी पेपर

अकाउंट होल्डर की मौत के बाद सिर्फ नॉमिनी होने से ही बैंक से पैसा आसानी से नहीं मिलता। फॉर्म में नाम की स्पेलिंग में गड़बड़ी और अपडेटेड केवाईसी (KYC) न होने जैसी छोटी गलतियां परिवार की परेशानी बढ़ा देती हैं।

जब भी आप कोई बैंक अकाउंट (Bank Account) खुलवाने जाते हैं तो बैंक आपसे नॉमिनी पूछता है। नॉमिनी अकाउंट में जोड़ना आज के ज़माने में बहुत जरुरी है और अमूमन लोग अपने बैंक खाते, फिक्स डिपॉजिट (FD) या निवेश में किसी न किसी को नॉमिनी (Bank Nominee) जरूर बनाते हैं। हमें लगता है कि नॉमिनी का नाम दर्ज होने से खाताधारक की मृत्यु के बाद सारा पैसा बिना किसी परेशानी के उस व्यक्ति को मिल जाएगा। लेकिन असल जिंदगी में ऐसा हमेशा नहीं होता। कई बार देखा गया है कि अकाउंट होल्डर की मौत के बाद नॉमिनी को बैंक से पैसा निकालने में महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं और भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, इसके पीछे कुछ तकनीकी और कानूनी कारण होते हैं, जिन्हें समय रहते न सुधारा जाए तो परिवार को मुसीबत के समय अपनी ही जमा-पूंजी के लिए तरसना पड़ सकता है। ऐसे में आपको अपने बैंक खाते से जुड़े दो सबसे जरूरी कागजात और नियमों को री-चेक कर लेना चाहिए जिससे आपके परिवार को ऐसी किसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

Bank Nominee

सबसे बड़ी दिक्कत कब आती है?

नॉमिनी को पैसा मिलने में सबसे पहली और बड़ी दिक्कत तब आती है जब नॉमिनी के दस्तावेजों (जैसे आधार कार्ड या पैन कार्ड) और बैंक के रिकॉर्ड में दर्ज नाम व जानकारी में अंतर होता है। अगर बैंक खाते में नॉमिनी का नाम केवल 'अमित' लिखा है, लेकिन उसके कानूनी दस्तावेजों में नाम 'अमित कुमार' है, तो बैंक क्लेम को तुरंत रोक देता है। इस स्थिति से बचने के लिए सबसे जरूरी पहला पेपर है 'नॉमिनेशन फॉर्म (Form DA 1)'। आपको तुरंत अपने बैंक जाकर या नेट बैंकिंग के जरिए यह चेक करना चाहिए कि आपके द्वारा भरे गए नॉमिनेशन फॉर्म में नॉमिनी का नाम, उसकी जन्मतिथि और आपके साथ उसका रिश्ता बिल्कुल वैसा ही दर्ज है जैसा उसके सरकारी आईडी प्रूफ में है। अगर कोई भी स्पेलिंग मिस्टेक या सरनेम की गलती है, तो उसे आज ही सुधरवा लें।

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