Income Tax Rate In India Budget:वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण एक फरवरी को अंतरिम बजट पेश करने जा रही है। किसी भी बजट में सबसे ज्यागा लोगों की नजर इनकम टैक्स पर ही रहती है। साल 2019 के आम चुनाव के समय पेश किए गए अंतरिम बजट भी सरकार ने मिडिल क्लास को इनकम टैक्स में राहत दे दी थी। ऐसे में इस बार चुनावों को देखते हुए अंतरिम बजट के बावजूद वित्त मंत्री से टैक्स राहत की उम्मीद है। भारत में आजादी के बाद इनकम टैक्स हमेशा से चर्चा का विषय रहा है। और हर सरकार वोटरों को लुभाने के लिए इसमें कुछ न कुछ बदलाव अपने कार्यकाल में करती है। आइए जानते हैं कि आजादी के बाद भारत में कैसे इनकम टैक्स में बदलाव हुए...
इनकम टैक्स का इतिहास
1500 रुपये की कमाई थी टैक्स फ्री
आजाद भारत का पहला बजट 16 नवंबर 1947 को पेश किया गया था। इसे देश के पहले वित्त मंत्री आरके शनमुखम चेट्टी ने पेश किया था। जब देश का पहला बजट पेश किया गया था उस समय देश में 1500 रुपये तक की आमदनी टैक्स फ्री थी।
बच्चों की संख्या पर तय होता था इनकम टैक्स
साल 1958 में बच्चों की संख्या के आधार पर इनकम टैक्स में छूट देने की परंपरा शुरू की गई। कोई दंपत्ति अगर शादीशुदा हैं, और उसके कोई बच्चा नहीं है तो 3000 रुपये तक की इनकम पर टैक्स नहीं देना पड़ता था। लेकिन, एक बच्चा होने पर 3300 रुपये तक इनकम टैक्स फ्री थी इसी तरह 2 बच्चों पर 3600 रुपये की इनकम टैक्स फ्री थी।
शादीशुदा और कुंवारों के लिए अलग इनकम टैक्स
सरकार ने 1955 में जनसंख्या बढ़ाने के लिए पहली बार देश में शादीशुदा और कुंवारों के लिए अलग-अलग इनकम टैक्स फ्री इनकम तय कीष। शादीशुदा को 2000 रुपये तक कोई टैक्स नहीं देना पड़ता था। वहीं, कुंवारों के लिए यह लिमिट 1000 रुपये रखी गई। यानी कुंवारे होने पर इनकम टैक्स की देनदारी कम कमाई पर आ जाती थी।
100 रुपये की कमाई पर 97.75 रुपये टैक्स
एक समय भारत में अमीरों को 97.75 फीसदी तक टैक्स देना पड़ता था। साल 1973-74 में इनकम टैक्स की अधिकतम दर 85 फीसदी कर दी गई। सरचार्ज मिलाकर यह टैक्स रेट 97.75 फीसदी पहुंच गया। 2 लाख रुपये की इनकम के बाद हर 100 रुपये की कमाई में से सिर्फ 2.25 रुपये ही कमाने वाले की जेब में जाते थे। बाकी 97.75 रुपये सरकार रख लेती थी। जिसे 1974-75 में घटाकर 75 फीसदी किया गया। और 6000 रुपये तक की इनकम टैक्स फ्री हो गई।
