Mazagon Dock Shipbuilders ने पिछले पांच साल में 2,164.14% का मल्टीबैगर रिटर्न देकर निवेशकों को चौंकाया है। अब कुछ छोटे लेकिन अहम रणनीतिक खिलाड़ी 2 लाख करोड़ रुपये के नेवल बूम में कूद चुके हैं। सरकार की मंशा साफ है। भारत को अगले दशक में टॉप-5 शिपबिल्डिंग देशों में शामिल करना और एक ग्लोबल शिप-रिपेयर हब बनाना। इसी विजन के तहत मैरीटाइम कैपेक्स, पोर्ट डेवलपमेंट और डिफेंस ऑर्डर्स का फ्लो तेज हो चुका है। बजट 2026 में भी सरकार का फाेकस इस सेक्टर पर देखने को मिल सकता है।
बजट से मिलेगा बूस्ट (इमेज क्रेडिट, कैन्वा)
200 जंगी जहाजों का रोडमैप
Indian Navy का फोर्स-लेवल रोडमैप बेहद आक्रामक है। 2035 तक फ्लीट साइज 175 से 200 वॉरशिप्स तक ले जाने का लक्ष्य है, जो अभी करीब 132 के आसपास है। आंकड़े बताते हैं कि फिलहाल नेवी के पास करीब 68 वॉरशिप्स और वेसल्स ऑर्डर पर हैं, जिनकी वैल्यू लगभग 2 लाख करोड़ रुपये है। इसका मतलब यह है कि आने वाले कई सालों तक शिपयार्ड्स ही नहीं, बल्कि पूरे मैरीटाइम इकोसिस्टम के लिए डिमांड बनी रहेगी।
शिपयार्ड से आगे की कहानी
इस कैपेक्स साइकल में सिर्फ बड़े शिपयार्ड ही नहीं, बल्कि वे कंपनियां भी बड़ा फायदा उठा रही हैं, जो डिफेंस कंपोनेंट्स, ड्रेजिंग, मरीन कंस्ट्रक्शन और स्पेशलाइज्ड वेसल्स में काम करती हैं। यही वजह है कि बाजार अब “नेक्स्ट मझगांव डॉक” जैसे प्रॉक्सी प्लेज पर नजर टिकाए बैठा है। वेल्डिंग, हाइड्रोलिक्स और मेटैलिक होज जैसे सेगमेंट भी इसी लहर का हिस्सा हैं। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, जो GDP में अब भी करीब 17% योगदान देता है, अगले 6–7 साल में 21% तक पहुंचने की राह पर है। डिफेंस, शिपबिल्डिंग, एनर्जी और एयरोस्पेस इस ग्रोथ के बड़े ड्राइवर हैं।
ग्रीन ब्लू इकॉनमी पर एकछत्र राज
Knowledge Marine & Engineering Works (KMEW) भारत की इकलौती लिस्टेड प्योर-प्ले मरीन इंजीनियरिंग कंपनी है। ड्रेजिंग, पोर्ट एंसिलरी सर्विसेज और शिपबिल्डिंग इसका कोर बिजनेस है। FY25 में कंपनी की 96% से ज्यादा रेवेन्यू ड्रेजिंग से आई है। सितंबर तक कंपनी का कुल ऑर्डर बुक 1,749 करोड़ रुपये का रहा, जिसमें शिपबिल्डिंग का हिस्सा करीब 11% है। ड्रेजिंग के तहत यह कंपनी कैपिटल और मेंटेनेंस दोनों तरह के प्रोजेक्ट्स करती है, जिनमें पोर्ट्स, नदियां और फिशिंग हार्बर शामिल हैं। इसके पास ट्रेलिंग सक्शन हॉपर ड्रेजर्स और कटर सक्शन ड्रेजर्स जैसी स्पेशलाइज्ड फ्लीट है।
नेवी और डिफेंस से गहरी पकड़
KMEW की नेवल और डिफेंस मौजूदगी मल्टी-लेयर्ड है। Kamal Marine & Engineering Works के अधिग्रहण के बाद कंपनी ने डिजाइन से लेकर कंस्ट्रक्शन और रिफिटिंग तक वर्टिकल इंटीग्रेशन हासिल कर लिया है। यह फास्ट पेट्रोल बोट्स, पायलट लॉन्च और मूरिंग बोट्स जैसे स्पेशल वेसल्स बनाती है और डिफेंस एजेंसियों से सीधे कॉन्ट्रैक्ट्स लेती है। कंपनी विशाखापट्टनम में DG Naval Projects, कोच्चि में साउथ नेवल कमांड और मुंबई में वेस्टर्न नेवल कमांड के साथ काम कर चुकी है। नेवल बेस और मिलिट्री पोर्ट्स की मेंटेनेंस ड्रेजिंग, नेशनल सिक्योरिटी से जुड़ा अहम एरिया है, जहां KMEW की मौजूदगी मजबूत मानी जाती है।
ग्रीन टग में लीडरशिप
KMEW भारत के ग्रीन टग ट्रांजिशन प्रोग्राम की फ्रंट-रनर बनकर उभरी है। कंपनी के पास इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) के लिए करीब 195 करोड़ रुपये के 24 मरीन क्राफ्ट्स के ऑर्डर हैं। इसके अलावा VOC पोर्ट और विशाखापट्टनम पोर्ट पर 15 साल के दो बड़े इलेक्ट्रिक टग कॉन्ट्रैक्ट मिले हैं, जिनकी कुल वैल्यू 650 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
नर्मदा से लग्जरी क्रूज तक
कंपनी नर्मदा नदी पर लग्जरी क्रूज प्रोजेक्ट के जरिए टूरिज्म सेगमेंट में भी कदम रख रही है। यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के साथ मिलकर किया जा रहा है और इससे अगले 20 साल में करीब 800 करोड़ रुपये तक की रेवेन्यू विजिबिलिटी का अनुमान है।
1,749 करोड़ की ऑर्डरबुक
FY26 की पहली छमाही में कंपनी की रेवेन्यू 3% बढ़कर 98.6 करोड़ रुपये रही। EBITDA में हल्का दबाव दिखा और मार्जिन 38.6% तक फिसले। नेट प्रॉफिट करीब 23 करोड़ रुपये रहा। हालांकि 1,749 करोड़ रुपये का ऑर्डर बुक कंपनी को अगले 5 साल से ज्यादा की क्लियर विजिबिलिटी देता है। लॉन्ग टर्म स्ट्रैटेजी के तहत KMEW बड़े ट्रेलिंग सक्शन हॉपर ड्रेजर्स सेगमेंट में उतरने की तैयारी कर रही है। इससे यह डीप-चैनल नेवल और कमर्शियल पोर्ट्स के मेगा प्रोजेक्ट्स को भी एग्जिक्यूट कर सकेगी।
क्यों बन सकती है अगली मझगांव?
भारत का 2 लाख करोड़ रुपये का नेवल और मैरीटाइम कैपेक्स सिर्फ शिपयार्ड्स की कहानी नहीं है। असली मल्टीबैगर वे कंपनियां बन सकती हैं जो इस इकोसिस्टम के कोर में बैठी हैं। KMEW जैसी कंपनियां, जो ड्रेजिंग, ग्रीन टेक और डिफेंस-सपोर्ट वेसल्स में मजबूत पकड़ रखती हैं, आने वाले Maritime Amrit Kaal 2047 में बड़े विजेता बनकर उभर सकती हैं।
