Brent Crude Price Below $100 : ग्लोबल ऑयल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है। बुधवार 23 सितंबर, 2026 को Brent Crude एक बार फिर $100 प्रति बैरल के नीचे आ गया है। मंगलवार को Brent फ्यूचर्स करीब 2.6% टूटकर $98 के आसपास पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI भी $90 प्रति बैरल के नीचे चला गया। 16 सितंबर को Brent करीब $107.82 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। यानी करीब एक सप्ताह में कीमतों में 6% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई है।
सऊदी से सप्लाई बढ़ने की उम्मीद
क्रूड $150 पहुंचने की चेतावनी
अमेरिका और ईरान के बीच जंग अब भी जारी है। इसके अलावा लाल सागर में भी तेल की सप्लाई में बाधाएं आ रही हैं। वहीं, रूस और यूक्रेन ने भी एक-दूसरे के एनर्जी इन्फ्रा को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। वहीं, बैंक ऑफ अमेरिका (BoA) ने अपनी एक क्लाइंट नोट में दावा किया है कि अगर ईरान और अमेरिका का युद्ध अगले साल तक जारी रहता है, तो क्रूड ऑयल 150 डॉलर प्रति बैरल पहुंच सकता है।
युद्ध रुका नहीं फिर क्यों सस्ता हुआ?
फिलहाल क्रूड ऑयल के दाम में गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया से तेल आपूर्ति पूरी तरह बंद होने का खतरा टलने की वजह से आई है। क्योंकि, सऊदी अरब ने अपनी East-West Pipeline को दोबारा शुरू कर दिया है। यह पाइपलाइन सऊदी अरब को Hormuz Strait को बायपास करते हुए लाल सागर के रास्ते क्रूड निर्यात की सुविधा देती है। इस महीने की शुरुआत में ड्रोन अटैक के बाद इसे बंद करना पड़ा था, जिससे यानुब पोर्ट (Yanbu port) से क्रूड का निर्यात प्रभावित हो रहा था। अब पाइपलान में दोबारा पंपिंग शुरू होने से बाजार को अतिरिक्त सप्लाई की उम्मीद बढ़ी है।
क्यों घटा सप्लाई का रिस्क?
सऊदी अरब की ईस्ट वेस्ट पाइपलाइन की कुल क्षमता करीब 70 लाख बैरल प्रति दिन है। हालांकि अभी इसे कम फ्लो रेट पर चलाया गया है और पूरी क्षमता बहाल होने में कई सप्ताह लग सकते हैं। लेकिन, इसके बावजूद बाजार को सप्लाई सुधरने की उम्मीद बढ़ी है। इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत की जानकारी भी दी है, जिसकी वजह से युद्ध रुकने की संभावना भी बढ़ती दिख रही है। यही दोनों वजह हैं, जिनसे अभी सप्लाई रिस्क कम हुआ है।
US Crude इन्वेंट्री का भी असर
अमेरिका से इन्वेंट्री डाटा भी तेल की कीमतों पर दबाव डाल रहा है। 16 सितंबर को जारी आंकड़ों में US क्रूड इन्वेंट्रीज में करीब 71 लाख बैरल की तीव्र बढ़ोतरी सामने आई थी। ऐसे में बाजार में यह संदेश गया है कि फिजिकल ऑयल सप्लई उतनी तंग नहीं है जितनी पहले मानी जा रही थी।
