इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का समय आते ही टैक्सपेयर्स अपनी तैयारी शुरू कर देते हैं। हर कोई चाहता है कि उसका आईटीआर समय पर और बिना किसी रुकावट के फाइल हो जाए, ताकि अगर कोई टैक्स रिफंड बनता है, तो वह जल्दी से खाते में आ जाए। लेकिन कई बार लोग जल्दबाजी या जानकारी की कमी के कारण आईटीआर फॉर्म भरते समय कुछ ऐसी छोटी-मोटी गलतियां कर बैठते हैं, जिसकी वजह से उनका रिफंड बीच में ही अटक जाता है। इनकम टैक्स विभाग के नियम काफी सख्त हैं, इसलिए फॉर्म जमा करने से पहले हर एक जानकारी को री-चेक करना बेहद जरूरी है, वरना रिफंड मिलने के बजाय आपको विभाग की तरफ से नोटिस थमाया जा सकता है।
आईटीआर भरते समय भूलकर भी न करें ये गलतियां
क्यों अटक सकता है रिफंड?
रिफंड अटकने की सबसे बड़ी और आम वजह बैंक खाते की गलत जानकारी देना है। अगर आपने अपने बैंक का अकाउंट नंबर या आईएफएससी (IFSC) कोड भरने में एक भी अंक की गलती कर दी, तो आपका रिफंड सीधे तौर पर रुक जाएगा। इसके साथ ही, अब इनकम टैक्स विभाग सिर्फ उसी बैंक खाते में रिफंड भेजता है जो आपके पैन कार्ड (PAN Card) से लिंक हो और जिसका 'प्री-वैलिडेशन' (Pre-validation) हो चुका हो।
इसलिए आईटीआर दाखिल करने से पहले ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर यह जरूर चेक कर लें कि आपका बैंक खाता वैलिडेट है या नहीं। अगर खाता वैलिडेट नहीं होगा, तो विभाग चाहकर भी आपके पैसे ट्रांसफर नहीं कर पाएगा।
गलत फॉर्म भी पड़ सकता है भारी
इसके अलावा, अपनी कमाई को छिपाना या गलत फॉर्म चुनना भी एक भारी भूल साबित होती है। कई बार लोग अपने सेविंग्स अकाउंट से मिलने वाले ब्याज, एफडी (FD) के इंटरेस्ट या शेयर बाजार-म्यूचुअल फंड से होने वाली कमाई की जानकारी आईटीआर में नहीं देते। टैक्स विभाग के पास आपके फॉर्म 26AS और एआईएस (AIS) के जरिए आपकी पाई-पाई का हिसाब होता है, इसलिए अगर आपके दावों और विभाग के डेटा में अंतर मिला, तो रिफंड रोक दिया जाता है। साथ ही, अपनी सैलरी और टैक्स स्लैब के हिसाब से सही आईटीआर फॉर्म (जैसे ITR-1, ITR-2 आदि) का चुनाव करना भी उतना ही जरूरी है; गलत फॉर्म चुनने पर आपका रिटर्न डिफेक्टिव (Defective) माना जा सकता है।
यहां भी हो जाती है लोगों से गलती
आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिर्फ आईटीआर फॉर्म सबमिट कर देने से काम पूरा नहीं होता। फॉर्म भरने के बाद उसे ई-वेरिफाई (e-Verify) करना अनिवार्य है। नियम के मुताबिक, आईटीआर दाखिल करने के तय दिनों के भीतर इसे आधार ओटीपी या नेट बैंकिंग के जरिए ई-वेरिफाई करना होता है। जब तक आप अपने रिटर्न को वेरिफाई नहीं करते, तब तक इनकम टैक्स विभाग आपके आईटीआर की प्रोसेसिंग शुरू नहीं करता। इसका मतलब है कि बिना वेरिफिकेशन के आपका रिटर्न अधूरा है और ऐसी स्थिति में रिफंड आने का तो सवाल ही नहीं उठता। इसलिए रिफंड का पैसा सुरक्षित और जल्दी पाने के लिए इन सभी बातों का खास ख्याल रखें।
