अमेरिका के साथ एक साल से अधिक समय से अटके ट्रेड डील पर अब काफी हद तक सहमति बन गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को उम्मीद जताई कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को वैश्विक व्यापार तथा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के हित में जल्द से जल्द अंतिम रूप दे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि हाल में भारतीय वाणिज्य मंत्री ने भी कहा है कि वे समझौते पर जल्द हस्ताक्षर होने की उम्मीद कर रहे हैं और ऐसा चाहते हैं। बातचीत जारी है। मुझे उम्मीद है कि वैश्विक व्यापार और दोनों साझेदारों, भारत तथा अमेरिका के बीच व्यापार के हित में इस समझौते को जल्द से जल्द पूरा कर लिया जाएगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
पीयूष गोयल ने भी दिए थे संकेत
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के पहले चरण को अंतिम रूप दे दिया गया है और उसके कानूनी मसौदे पर काम जारी है।
चीन के साथ बढ़ता व्यापार असंतुलन चिंता की बात
चीन के साथ व्यापार पर सीतारमण ने कहा कि चीन के साथ वर्षों से बातचीत के बावजूद बढ़ता व्यापार असंतुलन और भारतीय उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच पर लगातार लगी पाबंदियां प्रमुख चिंताएं बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत ने चीन में जेनेरिक दवाओं, गोवंश का मांस, सब्जियों और अन्य जल्दी खराब होने वाले उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच हासिल करने की लगातार कोशिश की है, लेकिन वर्षों से बातचीत के बावजूद बहुत कम प्रगति हुई है।
गैर-शुल्क बाधाएं सबसे बड़ी रुकावट
सीतारमण ने यह बात थाईलैंड के बैंकॉक में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ)-विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के दौरान अटलांटिक काउंसिल’ के साथ बातचीत में कही।
उन्होंने कहा कि भारत और चीन के बीच व्यापार में गैर-शुल्क बाधाएं सबसे बड़ी रुकावट हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि ऐसे मुद्दों को बातचीत और जांच के जरिये सुलझाने की संभावना के बावजूद चीन ने पादप-स्वास्थ्य संबंधी उपायों और अन्य गैर-शुल्क प्रतिबंधों का इस्तेमाल किया है।
भारत ने बातचीन को प्राथमिकता दी
उन्होंने कहा कि भारत ने बड़े व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए व्यापारिक साझेदारों पर दंडात्मक शुल्क लगाने का रास्ता नहीं अपनाया है। इसके बजाय उसने बातचीत को प्राथमिकता दी है, भले ही इस प्रक्रिया में अधिक समय लगता हो। 'ब्रिक्स’ के बारे में सीतारमण ने कहा कि इस समूह को किसी देश या गुट का मुकाबला करने वाले मंच के बजाय अपने लोगों के बेहतर कल्याण के उद्देश्य से बनी साझेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।
ब्रिक्स का दायरा तेजी से बढ़ रहा
उन्होंने कहा कि मुझे नहीं लगता कि ब्रिक्स का उद्देश्य दूसरों का मुकाबला करना है। इसका मकसद ब्रिक्स के जरिये साझेदारी को मजबूत करना है। सीतारमण ने कहा कि ब्रिक्स दुनिया की करीब 40 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और सदस्य देशों के बीच सहयोग से व्यापार बढ़ाने, आपसी समझ विकसित करने तथा आर्थिक अवसरों का विस्तार करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि नए सदस्यों के समूह में शामिल होने के साथ 11 से 12 देश एक-दूसरे के साथ सक्रिय रूप से जुड़ रहे हैं। इन देशों का कुल वैश्विक व्यापार में करीब 45 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
भारतीय अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही
भारत की आर्थिक वृद्धि पर सीतारमण ने कहा कि वैश्विक व्यवधानों के बावजूद देश ने मजबूत वृद्धि बनाए रखी है और पिछले चार से पांच वर्षों से, खासकर कोविड-19 वैश्विक महामारी के बाद, वह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था रहा है। उन्होंने भारत के इस प्रदर्शन का श्रेय समावेशी वृद्धि, संसाधनों तक व्यापक पहुंच, युवाओं के कौशल विकास, राजकोषीय अनुशासन और सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी को दिया।
