Joint Home Loan : अपना खुद का घर खरीदना जीवन के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण वित्तीय फैसलों में से एक होता है। आज के समय में घर की बढ़ती कीमतों को देखते हुए ज्यादातर कामकाजी पति-पत्नी मिलकर होम लोन लेने का विकल्प चुनते हैं। जब दोनों पार्टनर कमाते हैं, तो साथ मिलकर लोन आवेदन करने से न केवल लोन मिलने की संभावना बढ़ जाती है, बल्कि हर महीने चुकाई जाने वाली ईएमआई का बोझ भी आपस में बंट जाता है। इसके अलावा, सही योजना बनाई जाए तो दोनों अलग-अलग टैक्स छूट का लाभ भी उठा सकते हैं। हालांकि, ज्वाइंट होम लोन केवल वित्तीय बोझ बांटने तक सीमित नहीं है। इसमें दोनों आवेदकों पर लोन चुकाने की बराबर की कानूनी और वित्तीय जिम्मेदारी होती है। अगर किसी एक की तरफ से ईएमआई में चूक होती है, तो इसका बुरा असर दोनों के क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) पर पड़ता है। इसलिए आवेदन करने से पहले जोड़ों को इसके फायदे, टैक्स लाभ और इसके साथ आने वाले वित्तीय जोखिमों को अच्छी तरह समझ लेना चाहिए।
ज्यादा लोन एलिजिबिलिटी और बजट में बढ़ोतरी
ज्वाइंट होम लोन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बैंक या वित्तीय संस्थान दोनों आवेदकों की आय को जोड़कर लोन देने की क्षमता का आकलन करते हैं। अगर एक व्यक्ति की सैलरी पर 50 लाख रुपये तक का लोन मिल रहा है, तो पति-पत्नी की संयुक्त आय के आधार पर बैंक 70 से 80 लाख रुपये तक का बड़ा लोन मंजूर कर सकता है। इससे जोड़ों को अपनी पसंद और जरुरतों के हिसाब से बेहतर व बड़ा घर खरीदने में आसानी होती है। साथ ही, दोनों के बीच ईएमआई का बंटवारा हो जाने से हर महीने के बजट पर दबाव कम पड़ता है। हालांकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल इसलिए ज्यादा लोन नहीं लेना चाहिए क्योंकि आपकी एलिजिबिलिटी बढ़ गई है। जोड़ों को लोन लेने से पहले अपने अन्य मासिक खर्चों, भविष्य की बचत और अन्य वित्तीय प्रतिबद्धताओं का सही अंदाजा लगा लेना चाहिए।
टैक्स में अलग-अलग छूट का फायदा कैसे उठाएं?
अगर पति-पत्नी दोनों मिलकर होम लोन चुका रहे हैं, तो वे टैक्स में दोहरी छूट का लाभ ले सकते हैं। लेकिन इसके लिए दो शर्तें जरूरी हैं, पहला, दोनों की संपत्ति में सह-मालिक होना जरूरी है, और दूसरा, दोनों का ईएमआई के भुगतान में योगदान होना चाहिए। पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) के तहत, दोनों आवेदक अलग-अलग अपनी आय के अनुपात में होम लोन के मूलधन के पुनर्भुगतान पर धारा 80C के तहत 1.5-1.5 लाख रुपये तक और ब्याज भुगतान पर धारा 24(b) के तहत 2-2 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। यानी एक ही प्रॉपर्टी पर कुल मिलाकर 7 लाख रुपये तक की टैक्स राहत मिल सकती है। हालांकि, ध्यान रखें कि नई टैक्स व्यवस्था (New Tax Regime) में सेल्फ-ऑक्यूपाइड प्रॉपर्टी के होम लोन ब्याज पर यह छूट उपलब्ध नहीं है। इसलिए लोन लेने से पहले दोनों व्यवस्थाओं के तहत टैक्स देनदारी की तुलना कर लेना फायदेमंद रहता है।
स्टाम्प ड्यूटी में छूट का अतिरिक्त लाभ
ज्वाइंट होम लोन का एक अन्य फायदा स्टाम्प ड्यूटी में मिलने वाली छूट के रूप में हो सकता है। भारत के कई राज्यों में महिला खरीदारों के नाम पर या उनके सह-मालिक बनने पर संपत्ति के रजिस्ट्रेशन में 1% से 2% तक की छूट दी जाती है। अगर पति-पत्नी मिलकर घर रजिस्ट्री कराते हैं, तो वे हजारों या लाखों रुपये की सीधी बचत कर सकते हैं। हालांकि, ये दरें और नियम हर राज्य के रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए डील फाइनल करने से पहले अपने राज्य के नियमों की जांच जरूर कर लें।
ज्वाइंट होम लोन से जुड़े प्रमुख जोखिम
जहां इसके अनेक फायदे हैं, वहीं ज्वाइंट होम लोन में कुछ जोखिम भी शामिल हैं:-
- समान दायित्व (Primary Responsibility):- कानूनी तौर पर दोनों आवेदक पूरे लोन के लिए समान रूप से जिम्मेदार होते हैं। अगर किसी कारणवश एक पार्टनर ईएमआई देने में असमर्थ होता है, तो पूरी ईएमआई की देनदारी दूसरे पार्टनर पर आ जाती है।
- क्रेडिट स्कोर पर असर:- अगर किसी एक महीने ईएमआई बाउंस या लेट होती है, तो दोनों आवेदकों की सिबिल रिपोर्ट में डिफॉल्ट दर्ज होता है और दोनों का क्रेडिट स्कोर खराब हो जाता है।
- कमजोर क्रेडिट हिस्ट्री का नुकसान:- लोन आवेदन के समय बैंक दोनों आवेदकों का क्रेडिट रिकॉर्ड चेक करते हैं। अगर किसी एक पार्टनर का सिबिल स्कोर कम है या उसकी कोई पुरानी रीपेमेंट हिस्ट्री खराब रही है, तो लोन रिजेक्ट हो सकता है या बैंक अधिक ब्याज दर वसूल सकता है।
- आपसी रिश्तों में तल्खी:- अगर भविष्य में जोड़े के बीच रिश्ते खराब होते हैं या अलगाव की स्थिति बनती है, तो संपत्ति का बंटवारा और लोन की जिम्मेदारी को अलग करना बेहद जटिल प्रक्रिया बन जाती है।
आवेदन करने से पहले इन बातों की जांच जरूर करें
अगर आप और आपके पार्टनर मिलकर होम लोन लेने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाना जरूरी है:-
- स्वामित्व (Ownership Shares) तय करें:- प्रॉपर्टी में किसका कितना प्रतिशत हिस्सा होगा, यह कागजातों में स्पष्ट रूप से दर्ज कराएं।
- बैंक खाता और ईएमआई का जरिया तय करें:- यह पहले से तय कर लें कि किस बैंक अकाउंट से ईएमआई कटेगी और दोनों पार्टनर उसमें कितना-कितना योगदान देंगे।
- दस्तावेज संभाल कर रखें:- टैक्स छूट का दावा करने के लिए बैंक से मिलने वाला 'इंटरेस्ट सर्टिफिकेट' और दोनों के बैंक खातों से कटे ईएमआई योगदान का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
ज्वाइंट होम लोन घर खरीदने के सपने को आसान और किफायती तो बनाता है, लेकिन इसके लिए दोनों साझेदारों के बीच वित्तीय पारदर्शिता और जिम्मेदारी की बेहद जरूरत होती है।
