दिल्ली-एनसीआर के लोगों पर महंगाई की दोहरी मार पड़ी है। पिछले 10 दिनों में तीन बार पेट्रोल-डीजल (Petrol Diesel) के दाम बढ़ने के बाद अब सीएनजी (CNG) भी महंगी हो गई है। दिल्ली में सीएनजी की कीमतों में 1 रुपए प्रति किलो का इजाफा किया गया है, जिसके बाद अब नया रेट बढ़कर 81.09 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है। इन नई दरों के लागू होने से ऑटो, टैक्सी और अपनी गाड़ी से चलने वाले आम लोगों का सफर और महंगा हो गया है। पहले से ही पेट्रोल-डीजल की महंगाई और बढ़ते खर्चों से परेशान लोगों के लिए यह बढ़ोतरी एक और बड़ा झटका है।
चौतरफा महंगाई की मार
यह हफ्ता भारतीय उपभोक्ताओं के लिए आर्थिक रूप से बेहद भारी साबित हुआ है। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी गंभीर भू-राजनीतिक संकट के चलते वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। यही वजह है कि भारत में पिछले 10 दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन बार भारी उछाल आया। तेल कंपनियों ने पहले 16 मई, फिर 19 मई और आज 23 मई को पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार वृद्धि की है, जिससे पेट्रोल करीब ₹5 प्रति लीटर तक महंगा हो चुका है। पेट्रोल-डीजल की इस आग में अब सीएनजी ने भी कदम रख दिया है, जिससे मध्यम वर्ग के पास अब कोई भी सस्ता ईंधन विकल्प नहीं बचा है। पिछले कुछ सालों में जब भी पेट्रोल के दाम बढ़ते थे, लोग सीएनजी गाड़ियों की तरफ रुख करते थे, लेकिन अब सीएनजी का महंगा होना लोगों के लिए दोहरी मार जैसा है।
ऑटो का किराया होगा महंगा
सीएनजी के दाम बढ़ने का सबसे सीधा और बड़ा असर देश के पब्लिक ट्रांसपोर्ट (सार्वजनिक परिवहन) पर पड़ता है। दिल्ली-एनसीआर और मुंबई जैसे महानगरों में चलने वाले ऑटो-रिक्शा, ओला-उबर जैसी कैब, और स्कूल बसें मुख्य रूप से सीएनजी पर ही निर्भर हैं। ट्रांसपोर्ट यूनियनों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल के बाद सीएनजी का महंगा होना उनके व्यवसाय के लिए एक बड़ा झटका है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले कुछ ही दिनों में ऑटो और कैब चालकों द्वारा न्यूनतम किराए में बढ़ोतरी की मांग तेज की जाएगी, जिससे अंततः दैनिक यात्रियों (Daily Commuters) को अपनी जेब से ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे।
इसके अलावा, हल्के कमर्शियल वाहन (LCVs) जो शहरों के भीतर आवश्यक वस्तुओं जैसे सब्जियां, फल और दूध की सप्लाई करते हैं, वे भी बड़े पैमाने पर सीएनजी का उपयोग करते हैं। इनकी परिचालन लागत (रनिंग कॉस्ट) बढ़ने के कारण मंडियों से खुदरा बाजारों तक आने वाला सामान और महंगा हो जाएगा। इस प्रकार, यह बढ़ोतरी केवल वाहन मालिकों तक सीमित न रहकर आम रसोई के बजट को भी प्रभावित करेगी। जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतें इसी तरह ऊंचे स्तर पर बनी रहीं, तो तेल विपणन कंपनियां आने वाले हफ्तों में एक बार फिर कीमतों की समीक्षा कर सकती हैं। ऐसे में आम जनता को आने वाले दिनों में और भी बड़ी महंगाई का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।
