Adani Group, Aditya Birla Group : भारत के प्रमुख उद्योगपति, गौतम अडानी (Gautam Adani) नेतृत्व में अडानी ग्रुप और कुमार मंगलम बिड़ला (Kumar Mangalam Birla) के नेतृत्व में आदित्य बिड़ला ग्रुप ने तार और केबल इंडस्ट्री में अपने कदम रखने का ऐलान किया है। यह कदम दोनों ग्रुप के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा को जन्म देने का संकेत है, खासकर जब वे पहले ही सीमेंट सेक्टर में छोटी कंपनियों को पछाड़ चुके हैं। इन दोनों ग्रुप का तार और केबल इंडस्ट्री में प्रवेश इस सेक्टर में नए बदलावों का कारण बन सकता है, जहां अभी असंगठित और छोटी कंपनियों का दबदबा है।
गौतम अडानी और कुमार मंगलम बिड़ला
तार और केबल सेक्टर में तेजी से बढ़ती प्रतिस्पर्धा
तार और केबल इंडस्ट्री ने वित्त वर्ष 2018-19 से 2023-24 तक सालाना आधार पर 13 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है, और अब यह संगठित ब्रांड बाजार की ओर बढ़ रहा है। अडानी ग्रुप ने 19 मार्च को इस सेक्टर में कदम रखने की घोषणा की, जिसके बाद लिस्टेड तार और केबल कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। पॉलीकैब इंडिया और केईआई इंडस्ट्रीज जैसे अग्रणी कंपनियों के शेयर 20 मार्च को 52 सप्ताह के निचले स्तर पर आ गए, और इसके अगले दिन फिनोलेक्स केबल्स में भी गिरावट आई।
नए निवेशकों के लिए आकर्षक अवसर
जेएम फाइनेंशियल्स के मुताबिक तार और केबल इंडस्ट्री नए प्रवेशकों के लिए एक आदर्श सेक्टर बन चुका है, जहां कोई भी कंपनी तार कारोबार में 15 प्रतिशत और केबल कारोबार में 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी नहीं रख सकती है। इसके अलावा, जेफरीज की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में तार और केबल इंडस्ट्री का आकार करीब 80,000 करोड़ रुपये है और यह 2028-29 तक 1,30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है, जिससे इसमें नए निवेशकों के लिए पर्याप्त अवसर हैं।
अडानी और आदित्य बिड़ला ग्रुप का निवेश
अडानी ग्रुप ने इस महीने की शुरुआत में कच्छ कॉपर लिमिटेड (KCL) के माध्यम से प्रणीता वेंचर्स के साथ साझेदारी की, और प्रणीता इकोकेबल्स नाम से एक ज्वाइंट बेंचर स्थापित किया। यह ज्वाइंट बेंचर धातु उत्पादों, केबल और तारों का निर्माण करेगा। इसके ठीक एक महीने पहले, आदित्य बिड़ला समूह ने अल्ट्राटेक सीमेंट के माध्यम से तार और केबल इंडस्ट्री में 1,800 करोड़ रुपये का निवेश करने का ऐलान किया था। इससे साफ है कि दोनों समूहों का ध्यान अब सीमेंट के बाद तार और केबल इंडस्ट्री में बड़े कदम उठाने पर है, जिससे इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और वृद्धि की संभावना बढ़ गई है।
