Car mileage: जब भी किसी के मन में कार खरीदारी का विचार आता है तो अगले ही पल माइलेज का भी ख्याल आता है। हर कार खरीदार चाहता है कि वह एक शानदार माइलेज वाली गाड़ी खरीदे। हालांकि, कार खरीदारी के बाद जब यह कार सड़कों पर दौड़ाई जाती है तो कार का माइलेज असल या बताए गए माइलेज से कम हो जाता है। ऐसा क्यों होता है और इसके पीछे क्या कारण है, इस आर्टिकल में आपको बताने जा रहे हैं-
कार का माइलेज (Photo : iStock)
माइलेज टेस्टिंग
दरअसल, माइलेज टेस्टिंग और वास्तविक ड्राइविंग स्थितियां अलग‑अलग होती हैं। कंपनियां और टेस्टिंग एजेंसियां कारों का माइलेज आम सड़क पर नहीं बल्कि एक लैब‑परिवेश में जांचती हैं। यहां कार को एक मशीन पर चलाया जाता है जहां सड़क पूरी तरह सपाट होती है, कोई ट्रैफिक नहीं होता, किसी तरह का ब्रेक या अचानक स्पीड में चेंज नहीं होता और कार का इंजन एक तय गति पर चलता है। ऐसी आदर्श टेस्टिंग में पाया गया माइलेज अक्सर वास्तविक ड्राइविंग स्थितियों से ज्यादा होता है।
वहीं दूसरी ओर, असल सड़क पर ड्राइव करते समय कार चालक को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन चुनौतियों में ट्रैफिक जाम, खराब सड़कें, बार‑बार ब्रेक लगाना, रेड लाइट, गढ्ढों से निपटना और शहर की भीड़‑भाड़ आम हैं। इन सब कारणों से इंजन पर ज्यादा लोड पड़ता है और ईंधन की खपत बढ़ जाती है, जिससे माइलेज कम मिलता है।
AC का इस्तेमाल
माइलेज को लेकर इस अंतर का एक दूसरा और बड़ा कारण एयर कंडीशनर (AC) का इस्तेमाल भी है। कार खरीदने के बाद इसे रोड पर दौड़ाते वक्त अधिकतर ड्राइवर AC का इस्तेमाल करते हैं, जो इंजन पर अतिरिक्त दबाव डालता है और ईंधन की खपत बढ़ाता है। पेट्रोल कारों में AC चलाने से माइलेज लगभग 10‑15 प्रतिशत तक कम हो सकता है, जबकि डीजल कारों में यह असर थोड़ा कम होता है। यही वजह है कि बिना AC और AC के साथ माइलेज अलग‑अलग दिखाई देता है।
सरकार उठा रही बड़ा कदम
अब सरकार इस अंतर को कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय ने प्रस्ताव दिया है कि 1 अक्टूबर 2026 से सभी कारों की माइलेज टेस्टिंग AC ऑन और AC ऑफ दोनों स्थितियों में किया जाएगा ताकि फ्यूल एफिशिएंसी के सही आंकड़े मिल सकें। इससे विज्ञापित और वास्तविक माइलेज के बीच का अंतर कम होगा और ग्राहकों को कार खरीदते समय सही जानकारी मिलेगी।
ड्राइविंग स्टाइल और गियर शिफ्टिंग
इसके अलावा, कार का माइलेज ड्राइविंग स्टाइल, गियर शिफ्टिंग, टायर प्रेशर, इंजन सर्विसिंग और रोड की स्थिति जैसे कई दूसरे कारकों से भी प्रभावित होता है। तेज एक्सेलेरेशन, गलत गियर का इस्तेमाल या कम टायर प्रेशर भी ईंधन की खपत बढ़ा सकते हैं।
