Car mileage: कंपनी जो दवा करती है, उतना क्यों नहीं मिलता कार का माइलेज? जानें असली वजह

Car mileage: क्या आपने भी इस ओर ध्यान दिया है कि भारत में कार खरीदते समय कंपनियों द्वारा बताया गया माइलेज और असली सड़क पर मिलने वाला माइलेज अक्सर अलग होता है। इसके पीछे एक नहीं कई कारण हो सकते हैं। इन कारणों में टेस्टिंग प्रक्रिया, ड्राइविंग स्टाइल और वास्तविक सड़क स्थितियां मुख्य कारण होती हैं।

Car mileage: जब भी किसी के मन में कार खरीदारी का विचार आता है तो अगले ही पल माइलेज का भी ख्याल आता है। हर कार खरीदार चाहता है कि वह एक शानदार माइलेज वाली गाड़ी खरीदे। हालांकि, कार खरीदारी के बाद जब यह कार सड़कों पर दौड़ाई जाती है तो कार का माइलेज असल या बताए गए माइलेज से कम हो जाता है। ऐसा क्यों होता है और इसके पीछे क्या कारण है, इस आर्टिकल में आपको बताने जा रहे हैं-

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कार का माइलेज (Photo : iStock)

माइलेज टेस्टिंग

दरअसल, माइलेज टेस्टिंग और वास्तविक ड्राइविंग स्थितियां अलग‑अलग होती हैं। कंपनियां और टेस्टिंग एजेंसियां कारों का माइलेज आम सड़क पर नहीं बल्कि एक लैब‑परिवेश में जांचती हैं। यहां कार को एक मशीन पर चलाया जाता है जहां सड़क पूरी तरह सपाट होती है, कोई ट्रैफिक नहीं होता, किसी तरह का ब्रेक या अचानक स्पीड में चेंज नहीं होता और कार का इंजन एक तय गति पर चलता है। ऐसी आदर्श टेस्टिंग में पाया गया माइलेज अक्सर वास्तविक ड्राइविंग स्थितियों से ज्यादा होता है।

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