Car Tyre Tips: किसी भी गाड़ी के लिए टायर वाहन का सबसे अहम हिस्सा होते हैं, क्योंकि यही सड़क और गाड़ी के बीच सीधा संपर्क बनाते हैं। अगर टायर सही हालत में नहीं हैं, तो दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है और माइलेज भी कम हो सकता है। इसलिए वाहनों चालकों को यह जानना बेहद जरूरी है कि गाड़ी के टायर बदलने का सही समय क्या होता है और वे कौन-से संकेत होते हैं, जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए-
गाड़ी का टायर बदलने का क्या है सही समय (Photo: iStock)
ट्रेड (Tread) घिस जाना
टायर की सतह पर बनी ग्रिप वाली लाइनें ट्रेड कहलाती हैं। जब ये 1.6 मिमी से कम रह जाती हैं, तो समझ जाइए कि अब आपको टायर बदल लेने चाहिए। ट्रेड कम होने से सड़क पर पकड़ कमजोर हो जाती है, खासकर बारिश के मौसम में फिसलन का खतरा बढ़ जाता है।
5 साल या उससे अधिक पुराना टायर
भले ही टायर ज्यादा इस्तेमाल न हुआ हो, लेकिन आपको यह समझने की जरूरत है कि रबर समय के साथ कमजोर हो जाता है। आमतौर पर 4–5 साल के बाद टायर की स्थिति की जांच करानी चाहिए। 6 साल से पुराने टायर बदल देना सुरक्षित रहता है।
बार-बार पंचर या कट लगना
अगर टायर में बार-बार पंचर हो रहा है या साइडवॉल पर गहरा कट दिख रहा है तो यह टायर कमजोर होने का संकेत होता है। ऐसे में इस स्थिति को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। नया टायर लगवाना बेहतर विकल्प है।
गाड़ी चलाते समय कंपन (Vibration)
अगर ड्राइविंग के दौरान स्टीयरिंग या सीट में ज्यादा कंपन महसूस हो तो यह टायर की असमान घिसावट या अंदरूनी नुकसान का संकेत हो सकता है। अगर आप भी गाड़ी चलाते समय इस तरह की वाइब्रेशन को महसूस करें तो समझ जाएं कि गाड़ी के टायर बदलने का सही समय आ गया है।
असमान घिसावट (Uneven Wear)
अगर टायर का एक हिस्सा ज्यादा घिस गया है और दूसरा हिस्सा ठीक है, तो यह व्हील एलाइनमेंट या बैलेंसिंग की समस्या हो सकती है। बहुत ज्यादा असमान घिसावट होने पर टायर बदलना जरूरी हो जाता है।
टायर की उम्र कैसे बढ़ाएं
- टायर की लंबी उम्र और सुरक्षित ड्राइव के लिए नियमित रूप से एयर प्रेशर चेक करना बहुत जरूरी है। सही प्रेशर से टायर बेहतर पकड़ और ईंधन बचत भी सुनिश्चित करता है।
- हर 5,000–8,000 किलोमीटर की दूरी तय होने पर टायर का रोटेशन करवाना चाहिए। इससे टायर समान रूप से घिसते हैं और उनकी लाइफ बढ़ती है।
- सुरक्षित ड्राइव के लिए व्हील एलाइनमेंट और बैलेंसिंग समय-समय पर कराएं। यह गाड़ी को स्टेबल रखता है और टायर के अनियमित घिसाव को रोकता है।
- टायर और वाहन के लिए हमेशा ओवरलोडिंग से बचें। अधिक वजन टायर पर दबाव डालता है और दुर्घटना का खतरा बढ़ा सकता है।
