Jammu Kashmir: नजरबंदी से मुख्यधारा के नेता हुए आजाद, बड़ा सवाल- आखिर जुबां पर क्यों आता है अनुच्छेद 370

  • Updated Oct 14, 2020, 08:27 AM IST

जम्मू-कश्मीर की मुख्य पार्टियों को अभी भी लगता है कि अनुच्छेद 370 की बहाली होगी। लेकिन सवाल यह है कि जो अनुच्छेद अब वजूद में नहीं है उसकी राग ये नेता क्यों अलापते हैं।

Jammu Kashmir: नजरबंदी से मुख्यधारा के नेता हुए आजाद, बड़ा सवाल- आखिर जुबां पर क्यों आता है अनुच्छेद 370

नई दिल्ली। 5 अगस्त 2019 को जब संसद से ऐलान हुआ कि अब अनुच्छेद 370 इतिहास है तो स्वाभाविक प्रतिक्रिया आनी ही थी उन दलों की तरफ से जो किसी न किसी रूप में जम्मू-कश्मीर को अपनी जागीर समझते थे। लेकिन सच तो यही था कि अनुच्छेद 370 इतिहास बन गया। भारत सरकार की तरफ से ऐहतियात के तौर पर मेनस्ट्रीम के उन नेताओं को नजरबंद किया गया जिनसे इस बात की आशंका थी कि वो माहौल खराब सकते थे। अलग अलग धड़ों के कई नेता नजरबंद किए गए, हालांकि फारुक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला का नाम प्रमुख था।

Jammu Kashmir: नजरबंदी से मुख्यधारा के नेता हुए आजाद, बड़ा सवाल- आखिर जुबां पर क्यों आता है अनुच्छेद 370

नजरबंदी से बाहर आने के बाद फिर बिगड़े बोल
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सरकार की तरफ से कहा कि हालात के सामान्य होते ही सबकी नजरबंदी खत्म कर दी जाएगी। नजरबंदी से आजाद होकर फारुक अब्दुल्ला का परिवार बाहर आया और वही राग अलापना शुरू किया जो उनके लिए मुफीद नजर आती है। फारुक अब्दुल्ला को तो अब चीन में उम्मीद नजर आती है। उमर अब्दुल्ला पाकिस्तान की बात करना शुरू कर देते हैं तो महबूबा मुफ्ती संघर्ष का नारा बुलंद करती हैं। 

अब महबूबा मुफ्ती भी नजरबंद नहीं
पीडीपी की महबूबा मुफ्ती भी नजरबंदी से बाहर आ चुकी हैं लेकिन नारा फिर वही बुलंद किया कि 370 के लिए लड़ाई करते रहेंगे, संघर्ष जारी रहेगा। अब यहीं से सवाल उठता है कि क्या ये सभी नेता वास्तव में जम्मू-कश्मीर के विकास के बारे में सोचते हैं या उन्हें लगता है कि 370 अगर किसी तरह से वापस आ गया तो उनकी बादशाहत के कायम होने का रास्ता फिर खुल जाएगा। सवाल यह है कि अनुच्छेद 370 से इन नेताओं को इतना प्यार क्यों है। 

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