भारी और असमान बारिश से खरीफ फसलों की बुवाई में देरी, पिछले साल के मुकाबले 16% की गिरावट, धान पिछले साल से 8% कम

Monsoon: मानसून की भारी और असमान बारिश से धान, कपास, दाल और तिलहन जैसी खरीफ फसलों की बुवाई में 16% की गिरावट आई है। हालांकि, आगामी हफ्तों में बुवाई बढ़ने की उम्मीद है।

Monsoon: देश के कई हिस्सों में इस महीने हुई भारी और असमान मानसूनी बारिश के कारण मुख्य खरीफ फसलों धान, दालें, तिलहन और कपास की बुवाई में काफी देरी देखने को मिल रही है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस सीजन में अब तक कुल बुवाई का क्षेत्रफल 53.12 मिलियन हेक्टेयर दर्ज किया गया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 16% कम है। मंत्रालय के मुताबिक 10 जुलाई तक हुई कुल बुवाई खरीफ (kharif crop sowing) सीजन के सामान्य 110 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र का करीब 48% ही है। जबकि पिछले साल इसी समय तक औसत मानसूनी बारिश के चलते 57% से अधिक सामान्य क्षेत्र में बुवाई पूरी हो चुकी थी। हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले हफ्ते बुवाई में गिरावट का यह आंकड़ा 21% पर था, जिसमें अब थोड़ा सुधार हुआ है।

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ज्यादा बारिश का असर, खरीफ की बुआई में 16% की कमी

धान की बुवाई में 8.6% की गिरावट, पूर्वी भारत में कम बारिश का असर

खरीफ सीजन की सबसे मुख्य फसल धान (चावल) की बुवाई अब तक 11.46 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है, जो पिछले साल के मुकाबले 8.6 प्रतिशत कम है। धान की बुवाई में आई इस कमी का मुख्य कारण पूर्वी भारत, विशेषकर बिहार और झारखंड में मानसून की शुरुआती कमी को माना जा रहा है। आमतौर पर देश में धान की बुवाई का औसत क्षेत्रफल 41.2 मिलियन हेक्टेयर रहता है। हालांकि, कृषि एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्थिति में सुधार हो रहा है, क्योंकि एक सप्ताह पहले धान का रकबा 2025 के स्तर से 13% नीचे चल रहा था, जो अब घटकर 8.6% पर आ गया है।

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