Potato Varieties : केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने देश में आलू की उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से चार नई आलू किस्मों को मंजूरी दी है। ये मंजूरी केंद्रीय बीज समिति की सिफारिशों के आधार पर दी गई है। इन किस्मों का विकास आईसीएआर केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) द्वारा किया गया है। इन्हें पूरे भारत में बीज उत्पादन और कृषि उपयोग के लिए उपयुक्त माना गया है।
आलू के नए प्रकार (तस्वीर-istock)
कुफरी रतन
- प्रकार: टेबल आलू
- परिपक्वता अवधि: 90 दिन (मध्यम अवधि)
- उपज: 37–39 टन प्रति हेक्टेयर
- विशेषताएं: लाल छिलके वाली किस्म, उत्कृष्ट भंडारण क्षमता
- उपयुक्त क्षेत्र: उत्तर भारत के मैदानी और पठारी क्षेत्र जैसे हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान
कुफरी तेजस
- प्रकार: ताप-सहिष्णु किस्म
- परिपक्वता अवधि: 90 दिन (मध्यम अवधि)
- उपज: 37–40 टन प्रति हेक्टेयर
- विशेषताएं: उच्च तापमान में उपयुक्त, अच्छी भंडारण क्षमता
- उपयुक्त क्षेत्र: शुरुआती मौसम के लिए: हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड
- मुख्य मौसम के लिए: मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र
कुफरी चिपभारत-1
- प्रकार: चिप प्रसंस्करण आलू
- परिपक्वता अवधि: 100 दिन (मध्यम अवधि)
- उपज: 35–38 टन प्रति हेक्टेयर
- विशेषताएं: कम अपचायक शर्करा, स्वीकार्य चिप रंग, परिवेशी भंडारण में भी उत्कृष्ट गुणवत्ता बनी रहती है
- उपयुक्त क्षेत्र: हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु
कुफरी चिपभारत-2
- प्रकार: शीघ्र पकने वाली चिप प्रसंस्करण किस्म
- परिपक्वता अवधि: 90 दिन
- उपज: 35–37 टन प्रति हेक्टेयर
- विशेषताएं: शीघ्र परिपक्वता, उत्कृष्ट भंडारण क्षमता
- उपयुक्त क्षेत्र: मुख्य मौसम में हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु
न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक इन चारों किस्मों की मंजूरी से न केवल आलू की उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि आलू चिप्स जैसे प्रसंस्कृत उत्पादों की गुणवत्ता और आपूर्ति भी बेहतर होगी। इससे किसानों को अधिक लाभ मिलने की संभावना है।
