Xi-Trump Phone Call: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर बातचीत हुई है। इस बातचीत में अमेरिका और चीन के रिश्ते में एक स्थायी एवं सकारात्मक पथ अपनाने की जरूरत पर बल दिया गया है। फोन पर हुई इस बातचीत के बारे में ब्योरे का विवरण देते हुए चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, 'बुसान में हुई मुलाकात के बाद चीन और अमेरिका के संबंध सामान्य रूप से स्थायी और सकारात्मक रास्ते पर हैं। इसका दोनों देशों एवं अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने स्वागत किया है।'
फोन पर जिनपिंग-ट्रंप के हुई बातचीत। तस्वीर-AP
रिश्ते को सही दिशा में आगे बढ़ाना जारी रखेंगे-चीनी प्रवक्ता
प्रवक्ता ने आगे कहा कि दोनों देश समानता, सम्मान एवं आपसी लाभ के आधार पर अपने इस रिश्ते को सही दिशा में आगे बढ़ाना जारी रखेंगे। अमेरिका और चीन के अच्छे संबंधों का लाभ चीन के लोगों और पूरी दुनिया को होगा। निंग के मुताबिक इस बातचीत में चीन के राष्ट्रपति ने ताइवान पर चीन के आधिकारिक रुख को रखा। राष्ट्रपति जिनपिंगे ने कहा कि 'ताइवान का चीन के पास लौटना पोस्टर वार इंटरनेशनल ऑर्डर का आंतरिक हिस्सा है। चीन और अमेरिका ने फासीवाद और सैन्यवाद के खिलाफ कंधे से कंधे मिलाकर लड़ाई लड़ी है।'
ट्रंप ने जिनपिंग के नियंत्रण को स्वीकार किया
वहीं, अमेरिका राष्ट्रपति ने सोमवार को कहा कि उन्होंने अप्रैल में बीजिंग की यात्रा के लिए चीन के राष्ट्रपति शी चिनपिंग द्वारा दिये गए निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। ट्रंप ने कहा कि इसके साथ ही उन्होंने अगले वर्ष के उत्तरार्ध में चिनफिंग को अमेरिका की राजकीय यात्रा के लिए आमंत्रित किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह घोषणा सोमवार सुबह शी चिनफिंग से फोन पर हुई बातचीत के कुछ घंटों बाद की। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने यूक्रेन, फेंटेनाइल और सोयाबीन जैसे मुद्दों पर चर्चा की। यह फोन कॉल दक्षिण कोरियाई शहर बुसान में दोनों नेताओं की आमने-सामने की मुलाकात के लगभग एक महीने बाद हुई है।
‘चीन के साथ हमारे संबंध बेहद मजबूत हैं’
ट्रंप ने कहा, ‘चीन के साथ हमारे संबंध बेहद मजबूत हैं।’चीन ने इससे पहले दोनों नेताओं की फोन पर हुई बातचीत की जानकारी दी थी, लेकिन राजकीय यात्राओं के बारे में कुछ नहीं कहा। हालांकि स्वीकार किया था कि दोनों नेताओं ने व्यापार, ताइवान और यूक्रेन पर चर्चा की है। चीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, शी ने सोमवार को फोन पर ट्रंप से कहा कि ताइवान की मुख्य भूमि चीन में वापसी ‘(द्वितीय विश्व) युद्ध के बाद की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।’यह बातचीत जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची द्वारा हाल ही में दिए गए उस बयान के बाद हुई है जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि चीन ताइवान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करता है तो जापान की सेना इसमें हस्तक्षेप कर सकती है। ताइवान एक स्वशासित द्वीप है जिस पर चीन अपना दावा करता है।
जापान के साथ बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित है चीन
चीनी पहले हमेशा यह कहते रहे हैं कि उनके नेता ‘अनुरोध करने पर’ फोन उठाते हैं, लेकिन सोमवार की कॉल के बारे में ऐसा नहीं कहा। वाशिंगटन स्थित विचारक संस्था स्टिमसन सेंटर में चीन कार्यक्रम के निदेशक सन युन ने कहा, ‘इसका अभिप्राय है कि चीन ने ट्रंप को फ़ोन किया था। मेरा सबसे अच्छा अनुमान यह है कि चीन जापान के साथ बढ़ते तनाव को लेकर चिंतित है।’ शिन्हुआ के मुताबिक, शी ने फोन पर कहा कि चीन और अमेरिका, जिन्होंने युद्ध के दौरान एक साथ लड़ाई लड़ी थी, को ‘संयुक्त रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के विजयी परिणाम की रक्षा करनी चाहिए।’
