ट्हारंपल ही में भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक टैरिफ को लेकर बढ़ते तनाव के बीच, प्रमुख अमेरिकी राजनीतिक लॉबिस्ट जेसन मिलर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रशासन से जुड़े अधिकारियों से मुलाकात की है। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों में ठंडक महसूस की जा रही है।
लॉबिंग के लिए भारत की ओर से रखी गई फर्म के प्रमुख ने ट्रंप से मुलाकात की (फोटो- @JasonMiller)
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15 करोड़ मिलेगी फीस
जेसन मिलर, जो SHW Partners LLC के प्रमुख हैं, को भारतीय दूतावास ने अप्रैल में लॉबिंग सेवाओं के लिए अनुबंधित किया था। यह अनुबंध एक साल के लिए है, और इसके तहत कथित तौर पर 18 लाख अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹15 करोड़) का भुगतान किया जाना है। हालांकि, मिलर ने ट्रंप और अन्य अधिकारियों के साथ हुई अपनी मुलाकात का उद्देश्य स्पष्ट नहीं किया, लेकिन उन्होंने सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें साझा कीं, जिनमें वह ट्रंप के साथ दिखाई दे रहे हैं। अपने पोस्ट में मिलर ने लिखा, "वाशिंगटन में बहुत ही शानदार सप्ताह रहा, जहां बहुत सारे दोस्त शहर में थे, और सबसे बढ़िया बात यह रही कि हमें यहां रुकने और अपने राष्ट्रपति को काम करते हुए देखने का अवसर मिला!"
व्यापारिक तनाव की पृष्ठभूमि
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में खटास तब आई जब ट्रंप प्रशासन ने भारतीय वस्तुओं पर आयात शुल्क (टैरिफ) को दोगुना कर 50% तक कर दिया। इस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी निर्णय को "अनुचित और अविवेकपूर्ण" करार दिया। विशेष रूप से भारत के लिए अमेरिका का यह टैरिफ निर्णय निर्यात प्रभावित क्षेत्रों जैसे स्टील, एल्युमीनियम, टेक्सटाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। इससे न केवल द्विपक्षीय व्यापार प्रभावित हुआ है, बल्कि रणनीतिक साझेदारी में भी दरार की आशंका जताई गई।
संबंध सुधार की उम्मीदें
हालांकि, तनावपूर्ण माहौल के बीच कुछ सकारात्मक संकेत भी उभरे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बयान में भारत-अमेरिका संबंधों को "विशेष" करार दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना "मित्र" बताया। उन्होंने कहा, "भारत के साथ हमारा संबंध हमेशा विशेष रहेगा। प्रधानमंत्री मोदी मेरे अच्छे मित्र हैं और मैं उनके साथ काम करने को हमेशा तैयार हूं।"
लॉबिंग की भूमिका और भविष्य की दिशा
भारतीय दूतावास द्वारा जेसन मिलर जैसी हाई-प्रोफाइल लॉबिंग फर्म की सेवाएं लेना यह संकेत देता है कि भारत अमेरिकी नीति निर्माताओं तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रहा है। लॉबिंग के माध्यम से भारत न केवल टैरिफ मुद्दे पर अपना पक्ष मजबूत करना चाहता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि रणनीतिक और रक्षा साझेदारी प्रभावित न हो।
