नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे नेपाल को हिलाकर रख दिया है। 626 से अधिक मौतों और 2,400 से ज्यादा लापता लोगों के बीच, संकट की इस घड़ी में भारत द्वारा बढ़-चढ़कर दी जा रही मदद पर नेपाल ने गहरा आभार जताया है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने शनिवार को भारत के प्रयासों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'अत्यंत उदार' बताया। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली ने नेपाल में बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए भी व्यापक सहायता देने का आश्वासन दिया है।
संकट में भारत बना सच्चा सहारा-नेपाल (फोटो: ANI/@SwarnimWagle)
नेपाल-तिब्बत सीमा पर हिमस्खलन और ग्लेशियर फटने के बाद आए मलबे ने मध्य नेपाल के दर्जनों गांवों, पुलों, सड़कों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को तबाह कर दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में रुक-रुक कर हो रही बारिश के बीच राहत दल समय से होड़ ले रहे हैं। नेपाल के अनुरोध पर भारत ने अब तक 57.6 टन आपातकालीन राहत सामग्री नेपाल भेजी है। इसके अलावा, हाइड्रोपावर टनल में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारत से 11 सदस्यीय विशेषज्ञ टीम भी पहुंची है, जिसमें डॉक्टर और टनल रेस्क्यू स्पेशलिस्ट शामिल हैं।
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वित्त मंत्री वागले ने बताया तबाही के बाद का प्लान
वित्त मंत्री वागले ने बताया कि नेपाल सरकार इस महासंकट से चरणबद्ध तरीके से निपट रही है। पहली प्राथमिकता फंसे हुए लोगों की जान बचाना है। अब तक नेपाल सेना ने हेलीकॉप्टर के जरिए 1,930 लोगों को सुरक्षित एयरलिफ्ट किया है। धुंचे, रसुवा और स्याफ्रू बेसी जैसे जो इलाके पूरी तरह कट चुके हैं, वहां हवाई मार्ग से राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू के बाद दूसरा चरण अस्थायी आश्रय स्थल बनाने और फिर तबाह हुए ढांचे को दोबारा खड़ा करने का होगा।
'पीएम मोदी का रवैया हमेशा बहुत मददगार वाला रहा'
भारत के सहयोग को याद करते हुए स्वर्णिम वागले ने कहा, "भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी का रवैया हमेशा बहुत मददगार रहा है। जब 2015 में भीषण भूकंप आया था, तब भी मैं सरकार का हिस्सा था और मुझे अच्छी तरह याद है कि उस वक्त भी भारत की सहायता काबिले तारीफ थी।" उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार भी प्रभावित इलाकों के पुनर्निर्माण में भारत से मजबूत और अभूतपूर्व सहयोग मिलता रहेगा।
