Israel General Election: इजरायल में आम चुनाव के बाद राजनीतिक तस्वीर उलझ गई है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट, दोनों ने अगली सरकार बनाने का दावा पेश किया है।
धानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (बाएं) और याशर पार्टी के प्रमुख गादी आइजेनकोट की फाइल फोटो। AP
हालांकि, वहां किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिली है। सेंट्रल इलेक्शन कमेटी (CEC) ने शुक्रवार सुबह 2026 के नेशनल इलेक्शन के फाइनल रिजल्ट पब्लिश किए।
फाइनल नतीजों में लिकुड को 27 सीटें, याशर को 21, बी'याचद को 12, जॉइंट लिस्ट को 11, डेमोक्रेट्स को 8, रा'आम को 8, यिसराइल बेयतेनु को 7, यूनाइटेड तोराह जूडाइज़्म को 7, ओत्ज़मा येहुदित को 7, शास को 6 और रिलीजियस ज़ायोनिज़्म को 6 सीटें मिली हैं। ऐसे में सरकार गठन के लिए छोटे दलों का समर्थन और गठबंधन की रणनीति निर्णायक साबित हो सकती है।
इजरायल के चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरती दिखाई दी। तीनों प्रमुख एग्जिट पोल में लिकुड को 27 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया, जबकि आइजेनकोट की याशर पार्टी उससे पांच से छह सीटें पीछे रही। हालांकि, किसी पार्टी का सबसे बड़ी पार्टी बनना अपने आप में सरकार बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है।
नेतन्याहू बोले- दक्षिणपंथी सरकार बनाएंगे
चुनाव के बाद अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने कहा कि उनकी लिकुड पार्टी इजरायल की सबसे बड़ी पार्टी है और वह अगली सरकार बनाने के लिए प्रयास करेंगे। उन्होंने दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी सरकार बनाने पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने अरब पार्टियों के समर्थन से सरकार बनाने का विरोध किया।
आइजेनकोट ने बदलाव का किया वादा
दूसरी ओर, गादी आइजेनकोट ने कहा कि इजरायल की जनता ने बदलाव के पक्ष में मतदान किया है। उन्होंने नेतन्याहू से पद छोड़ने की मांग करते हुए कहा कि वह सभी नागरिकों की सेवा करने वाली सरकार बनाने के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे। उनकी प्राथमिकताओं में सभी के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा और हमास को खत्म करना शामिल है।
अरब पार्टियों की भूमिका क्यों हुई अहम?
इजरायल के चुनाव में अरब नेतृत्व वाली पार्टियों ने महत्वपूर्ण प्रदर्शन किया है। शुरुआती एग्जिट पोल के बाद सामने आए अंतिम नतीजों के मुताबिक, अरब पार्टियों के पास कुल 19 सीटें हैं। वहीं, नेतन्याहू के गठबंधन को 53 और आइजेनकोट के विरोधी गठबंधन को 48 सीटें मिली हैं।
इस स्थिति में अरब पार्टियों का समर्थन विपक्ष को सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या के करीब पहुंचा सकता है। लेकिन परेशानी यह है कि विपक्ष के कई नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान अरब पार्टियों के साथ गठबंधन नहीं करने का वादा किया था। ऐसे में आइजेनकोट के सामने राजनीतिक चुनौती है कि वह अपने चुनावी वादों पर कायम रहते हुए सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन कैसे जुटाते हैं।
क्या इजरायल में फिर होंगे चुनाव?
इजरायल में सरकार गठन को लेकर कई संभावनाएं हैं। राजनीतिक दलों के बीच बातचीत के जरिए नया गठबंधन बन सकता है। इसके अलावा, कुछ दल अपने पुराने रुख में बदलाव कर दूसरे खेमे को समर्थन दे सकते हैं। एकता सरकार का विकल्प भी चर्चा में है।
अगर कोई भी पक्ष बहुमत जुटाने में नाकाम रहता है, तो देश में दोबारा चुनाव कराने की नौबत आ सकती है। इजरायल के राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने भी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे खुले दिमाग से बातचीत करें और एक और चुनाव से बचने की पूरी कोशिश करें।
