Iran US Talk: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राजनयिक स्तर पर बड़ी हलचल देखने को मिली है। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (SNSC) के सचिव मोहसिन रेजाई (Mohsen Rezaei) ने कहा है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) की ओर से मिले पत्र के बाद वाशिंगटन का रुख "पूरी तरह बदल" गया है। ईरान की ओर से यह पहली आधिकारिक और ऑन-द-रिकॉर्ड प्रतिक्रिया सामने आई है।
मोहसिन रेजाई
"अमेरिका का बदला रुख हमारी जीत का संकेत"
ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB से बातचीत में मोहसेन रजाई ने कहा, अमेरिका का लहजा पूरी तरह बदल चुका है। यह एक अच्छा संकेत है और यह दर्शाता है कि हमारी जनता ने अपनी जीत हासिल कर ली है।
कतर के जरिए पहुंचा पत्र
रिपोर्ट्स के अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का यह पत्र कतरी मध्यस्थों के माध्यम से तेहरान भेजा गया था। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के मुताबिक, इस प्रस्ताव में वेंस के नेतृत्व में सीधी वार्ता का खाका तैयार किया गया है, जिसमें शुरुआत से ही ईरान के परमाणु कार्यक्रम को चर्चा में शामिल करने की बात कही गई है। वहीं, 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' ने बताया कि यह संचार विशिष्ट शर्तों के बजाय 'वार्ता का ढांचा' निर्धारित करता है।
ट्रंप के निर्देश पर की गई पहल
बताया जा रहा है कि यह पत्र अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सीधे निर्देश पर भेजा गया है। व्हाइट हाउस में बोलते हुए ट्रंप ने दावा किया कि ईरान बातचीत के लिए उत्सुक है। उन्होंने कहा, बातचीत चल रही है, वे बात करना चाहते हैं। हमारे पास समय है और यह विवाद बहुत जल्द खत्म होगा।
ईरान ने बताया सकारात्मक कदम
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने कहा कि तेहरान ने इस पत्र का अध्ययन किया है और अमेरिका की वार्ता की इस कोशिश को एक "सकारात्मक कदम" माना है। इस संबंध में ईरानी प्रतिनिधि कतर की राजधानी दोहा में मध्यस्थों के साथ परामर्श कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक हफ्ते के भीतर दोहा या इस्तांबुल में दोनों पक्षों के बीच बैठक हो सकती है।
ईरान की सख्त चेतावनी
एक तरफ जहां कूटनीतिक रास्ते तलाशने की कोशिश हो रही है, वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) ने सख्त चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका या इजरायल ने किसी भी तरह की सैन्य या आतंकवादी हिमाकत की, तो ईरान की सेना ऐसा जवाब देगी जो "भौगोलिक सीमाओं से परे" होगा। खामेनेई ने स्पष्ट किया कि युद्ध के अंत का समय और शर्तें केवल ईरान की सशस्त्र सेनाएं ही तय करेंगी।
