Indonesia Earthquake: इंडोनेशिया में एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। सोमवार सुबह 5.7 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। जिसका केंद्र इंडोनेशिया के एंडे शहर से करीब 42 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम में था। इसकी गहराई 35.6 किलोमीटर दर्ज की गई। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है।
इंडोनेशिया में फिर आया भूकंप (सांकेतिक फोटो)
इंडोनेशिया के पूर्वी हिस्से में एक बड़े भूकंप के बाद सोमवार सुबह फिर धरती कांप उठी। 5.7 तीव्रता का नया भूकंप इंडोनेशिया के एंडे शहर से करीब 42 किलोमीटर उत्तर-उत्तर-पश्चिम (NNW) में दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र जमीन से 35.6 किलोमीटर की गहराई में था। भूकंप आज सुबह 6:16 बजे (स्थानीय समय) दर्ज किया गया। इसकी लोकेशन 8.513° दक्षिण अक्षांश और 121.473° पूर्वी देशांतर बताई गई है। यह ताजा झटका ऐसे समय आया है जब पूर्वी इंडोनेशिया पहले से ही शनिवार को आए 7.7 तीव्रता के भीषण भूकंप की तबाही से जूझ रहा है। उस भूकंप के बाद राहत और बचाव अभियान जारी है।
7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद मचा था भारी कहर
पूर्वी इंडोनेशिया में शनिवार को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 53 हो गई थी। रविवार को राहत और बचाव दलों ने मलबे से छह और शव बरामद किए थे। भूकंप के कारण खास तौर पर फ्लोरेस द्वीप में भारी नुकसान हुआ। यहां भूकंप के बाद भूस्खलन होने से कई गांवों का संपर्क टूट गया था और पहाड़ी रास्तों पर मलबा जमा हो गया था। राहत और बचाव दल सबसे अधिक प्रभावित मंग्गराई (Manggarai), पूर्वी मग्गराई और नागेकेओ (Nagekeo) के दुर्गम इलाकों में मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटे हैं।
1300 से अधिक मकान क्षतिग्रस्त
अधिकारियों के मुताबिक, पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत में 900 से अधिक घर पूरी तरह तबाह हुए, जबकि करीब 450 घरों को नुकसान पहुंचा। जिसके कारण लगभग 5,000 लोगों को अस्थायी शिविरों में जाना पड़ा। फ्लोरेस क्षेत्र में ही कम से कम 241 घरों के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई थी।
हजारों लोग घरों से बाहर रहने को मजबूर
बड़े भूकंप के बाद लगातार झटकों के डर से कई लोगों ने रात खुले में बिताई। प्रशासन के मुताबिक, भूकंप के बाद अब तक 995 आफ्टरशॉक्स दर्ज किए गए, हालांकि इनमें से 46 झटके लोगों ने महसूस किए। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल 'कोमोडो नेशनल पार्क' के प्रवेश द्वार लाबुआन बाजो (Labuan Bajo) सहित कई इलाकों के निवासी झटकों के कारण रात भर घरों से बाहर रहे। एक स्थानीय निवासी ने बताया था कि भूकंप मुख्य झटका इतना तेज था कि उनका घर लगभग गिरने की कगार में पहुंच गया था। जिसके बाद लगातार आ रहे आफ्टरशॉक्स के डर से परिवार घर के अंदर सोने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था।
भूस्खलन से सड़कें बंद
शक्तिशाली भूकंप के बाद ट्रांस-फ्लोरेस हाईवे के कई हिस्सों पर भूस्खलन होने से रास्ता बंद हो गया। करीब 700 किलोमीटर लंबी यह सड़क पहाड़ी इलाकों में कई समुदायों को जोड़ती है। रेस्क्यू टीमों ने कई जगहों पर मलबा हटाकर बंद रास्ते फिर से खोलने में सफलता हासिल की। हालांकि, कई इलाकों में बिजली और संचार सेवाएं अभी भी बाधित हैं, जिससे राहत कार्य में दिक्कतें आईं। सरकार और राहत एजेंसियों ने प्रभावित लोगों तक खाना, कंबल, दवाइयां और जरूरत की चीजें पहुंचाईं। दूरदराज के उन गांवों तक राहत पहुंचाना अभी भी चुनौती बना हुआ है, जहां भूस्खलन के कारण पहुंचना मुश्किल है।
इंडोनेशिया में इतने भूकंप क्यों आते हैं?
इंडोनेशिया दुनिया के सबसे ज्यादा भूकंप प्रभावित देशों में शामिल है। देश त महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) पर स्थित है जहां कई सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाएं मिलती हैं। इसी वजह से यहां भूकंप और ज्वालामुखी गतिविधियां देखने को मिलती रहती हैं।
फ्लोरेस और आसपास के इलाके पहले भी बड़े प्राकृतिक हादसों का सामना कर चुके हैं। 1992 में इसी फ्लोरेस द्वीप पर भीषण भूकंप और सुनामी आई थी। जिसने लगभग 2,500 लोगों की जान ले ली थी। 2018 में सुलावेसी में 7.5 तीव्रता के भूकंप के बाद सुनामी आई थी, जिसमें 4,400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। वहीं 2004 में सुमात्रा के पास 9.1 तीव्रता के महाभूकंप से उठी सुनामी ने करीब 2.30 लाख लोगों की जान ले ली थी।
