नेपाल-तिब्बत सीमा के पास रसुवा जिले की भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ और भीषण तबाही के बाद भारत सरकार ने अपने पड़ोसी देश की मदद के लिए राहत अभियानों की रफ्तार तेज कर दी है। भारत ने शुक्रवार को 10 टन मानवीय सहायता और एक विशेष तकनीकी दल के साथ अपना तीसरा विमान काठमांडू के लिए रवाना किया। इसके साथ ही भारत की ओर से नेपाल को अब तक दी गई कुल राहत सामग्री का आंकड़ा बढ़कर 57.5 टन हो गया है।
संकट की घड़ी में नेपाल के साथ खड़ा भारत (फोटो: X/@MEAIndia)
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि तीसरे विमान के जरिए आपातकालीन राहत सामग्री के साथ-साथ एक 11-सदस्यीय विशेष टीम भी भेजी गई है। इस टीम में डॉक्टर, पैरामेडिक्स और एक रेकी टीम शामिल है। यह टीम एक हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे होने की आशंका झेल रहे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए चल रहे टनल रेस्क्यू ऑपरेशन का जायजा लेगी और जरूरी उपकरणों का आकलन करेगी।
टाइम्स नाउ नवभारत पर यह भी पढ़ें: नेपाल त्रासदी: चीन बॉर्डर पर 400 भारतीय सुरक्षित, 320 की तलाश जारी; भारत भेजेगा टनल रेस्क्यू, मेडिकल और NDRF टीमें
26 और 27 अगस्त को भेजी गई पहली और दूसरी फ्लाइट
तीसरी खेप में भेजे गए सामान में पोर्टेबल जनरेटर सेट, गरिमा किट तैयार भोजन के पैकेट और पानी को साफ करने वाली टैबलेट्स शामिल हैं। इससे पहले 26 अगस्त को भेजी गई पहली फ्लाइट में 10 टन अस्थायी आश्रय सामग्री, कंबल, हाइजीन किट और दवाएं भेजी गई थीं। वहीं 27 अगस्त को रवाना हुई दूसरी फ्लाइट के जरिए 37.5 टन सामग्री भेजी गई थी, जिसमें वाटर पंप, किचन सेट, जनरेटर और भारी मात्रा में भोजन सामग्री शामिल थी।
भारत ने नेपाल में संपर्क मार्गों को दोबारा बहाल करने के लिए मदद का रखा प्रस्ताव
भारत ने नेपाल में संपर्क मार्गों को दोबारा बहाल करने के लिए बैली ब्रिज और उससे जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों की मदद देने का भी प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही भारतीय राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की विशेष टीमों और मेडिकल सपोर्ट को भेजने की पूरी तैयारी है। विदेश मंत्री ने दोहराया कि भारत अपनी 'पड़ोसी प्रथम' (Neighbourhood First) नीति के तहत नेपाल की आवश्यकताओं के अनुसार हर संभव मदद दे रहा है। जब तक स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाती, भारत का राहत और बचाव कार्य लगातार जारी रहेगा।
