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ट्रंप की पर्सनल ब्रांडिंग: पासपोर्ट पर अपनी फोटो, क्यों बढ़े उस रास्ते जहां कोई नेता नहीं गया?

Trump face politics: सरकारी इमारतों पर बैनर, पासपोर्ट पर फोटो, अमेरिकी राष्ट्रपति ब्रांडिंग के एक अति-उत्साही अभियान में जुटे हुए हैं।

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ट्रंप की पर्सनल ब्रांडिंग: पासपोर्ट पर अपनी फोटो, क्यों बढ़े उस रास्ते जहां कोई नेता नहीं गया?

Donald Trump brand image: डोनाल्ड ट्रंप खुद से बहुत प्यार करते हैं। अगर आप इसका कोई सबूत ढूंढ रहे हैं, तो US स्टेट डिपार्टमेंट का हालिया कदम, जिसमें US राष्ट्रपति की तस्वीर वाले यादगार पासपोर्ट जारी किए जा रहे हैं, इसका पक्का सबूत है। जी हां, आपने बिल्कुल सही पढ़ा। US जल्द ही ऐसे पासपोर्ट जारी करना शुरू करेगा, जिनके अंदर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर छपी होगी। US स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने मंगलवार को बताया, 'चूंकि US जुलाई में अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ मना रहा है, इसलिए स्टेट डिपार्टमेंट इस ऐतिहासिक मौके की याद में खास तौर पर डिजाइन किए गए US पासपोर्ट की सीमित संख्या जारी करने की तैयारी कर रहा है।'

हालांकि, पासपोर्ट तो बस ट्रंप की उस कोशिश की सबसे नई कड़ी है जिसके तहत वे अमेरिकी संस्थानों और दस्तावेजों पर अपना चेहरा हर जगह दिखाना चाहते हैं। उन्होंने अपने नाम पर सरकारी योजनाएं भी शुरू की हैं और जल्द ही उनका नाम कई अमेरिकियों के बटुए में भी पहुंच जाएगा, क्योंकि ट्रेजरी विभाग ने घोषणा की है कि भविष्य में जारी होने वाली करेंसी पर अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर दिखाई देंगे।

ट्रंप ने US पासपोर्ट पर अपनी छाप छोड़ी

मंगलवार को US विदेश विभाग ने देश की 250वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में एक नया पासपोर्ट डिजाइन जारी किया। पासपोर्ट के मॉकअप में 'स्वतंत्रता की घोषणा' (Declaration of Independence) के टेक्स्ट के बीच में ट्रंप के चेहरे की नीले और सफेद रंग की एक तस्वीर दिखाई गई है, जिसके नीचे सुनहरे रंग में उनके हस्ताक्षर हैं। पासपोर्ट के एक अन्य पेज पर जॉन ट्रंबल की 1819 की मशहूर पेंटिंग 'स्वतंत्रता की घोषणा' की एक तस्वीर है, जिसमें देश के संस्थापक नेताओं को इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने के लिए एक साथ इकट्ठा होते हुए दिखाया गया है।

नए पासपोर्ट के आगे और पीछे के हिस्से भी अलग होंगे। अभी, इसके सामने वाले कवर पर सुनहरे अक्षरों में 'Passport' लिखा होता है, जिसके नीचे अमेरिका की मुहर के बीच में बनी बाल्ड ईगल की तस्वीर होती है और उसके नीचे छोटे अक्षरों में 'United States of America' लिखा होता है। लेकिन, नए पासपोर्ट में 'United States of America' कवर के सबसे ऊपर बड़े अक्षरों में लिखा होगा, और 'Passport' उससे नीचे लिखा होगा।

US स्टेट डिपार्टमेंट ने कहा है कि इन यादगार पासपोर्ट के लिए कोई एक्स्ट्रा फीस नहीं ली जाएगी और ये उन सभी अमेरिकी नागरिकों को मिलेंगे जो इस रोलआउट पीरियड के दौरान पासपोर्ट के लिए अप्लाई करेंगे।

उन्होंने यह तो नहीं बताया कि ऐसे कितने पासपोर्ट जारी किए जाएंगे, लेकिन उन रिपोर्टों को गलत बताया जिनमें कहा गया था कि ऐसे 2,500 पासपोर्ट बनाए जाएंगे।

हर जगह ट्रंप ही ट्रंप

पासपोर्ट पर ट्रंप की फोटो का दिखना इस बात का ताजा उदाहरण है कि कैसे US राष्ट्रपति हर जगह अपनी ब्रांड पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कई सरकारी इमारतों पर ट्रंप की तस्वीर वाले बैनर दिखाई देने लगे हैं। फरवरी में, वॉशिंगटन, DC में न्याय विभाग की इमारत पर ट्रंप का एक बैनर लगा हुआ दिखा। पिछले अगस्त में, श्रम विभाग की इमारत पर उनकी तस्वीर वाला एक और बड़ा बैनर लटकाया गया था; इसके साथ ही राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट का भी एक बैनर लगा था, जो अमेरिकी कामगारों के अधिकारों की वकालत करने के लिए जाने जाते थे। दोनों बैनरों पर लिखा था, 'अमेरिकी कामगार सबसे पहले।'

इसी तरह, पिछले जून में, कृषि विभाग (USDA) की इमारत के सामने, राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन के बैनर के साथ-साथ ट्रंप के चेहरे वाला एक बैनर भी लगाया गया था।

लेकिन, बात सिर्फ बैनरों तक ही सीमित नहीं है। ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में कुछ इमारतों के नाम भी बदल दिए हैं। इसका सबसे मशहूर उदाहरण जॉन एफ. केनेडी मेमोरियल सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स है, जिसका नाम अब बदलकर 'द ट्रंप केनेडी सेंटर' कर दिया गया है। इसके अलावा, 'यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस' भी है।

कुछ सरकारी कार्यक्रम भी ऐसे हैं, जिनका नाम उन्हीं के नाम पर रखा गया है। उदाहरण के लिए, 'ट्रंप गोल्ड कार्ड' कार्यक्रम, जिसके तहत विदेशियों को 'ग्रीन कार्ड वाले विशेषाधिकार' दिए जाते हैं।

पिछले दिसंबर में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'ट्रंप-क्लास' युद्धपोतों के निर्माण की भी घोषणा की थी। इन युद्धपोतों का निर्माण, जिनके बारे में ट्रंप ने कहा था कि वे एक 'गोल्डन फ्लीट' का हिस्सा होंगे, 2030 के दशक की शुरुआत में शुरू होने वाला है। और इस महीने की शुरुआत में, कमीशन ऑफ फाइन आर्ट्स ने एक स्मारक 24-कैरेट सोने के सिक्के के डिजाइन को मंजूरी दी। इस सिक्के पर डेस्क पर झुके हुए, गंभीर चेहरे वाले ट्रंप की छवि अंकित है।

सिर्फ इतना ही नहीं, अभी और भी बहुत कुछ आने वाला है। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के साथ-साथ ट्रंप के भी दस्तखत दिखाई देंगे। यह पहली बार होगा जब किसी मौजूदा राष्ट्रपति के दस्तखत कागजी मुद्रा पर छपेंगे। और इस पूरी तस्वीर को मुकम्मल करने के लिए 250 फुट ऊंचे सुनहरे विजय मेहराब का निर्माण भी जल्द ही शुरू होने वाला है, जिसे अंदरूनी तौर पर 'आर्क डी ट्रंप' कहा जा रहा है।

ट्रंप चाहते हैं उनका चेहरा कभी लोगों की नजरों से दूर ना हों?

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ट्रंप का ब्रांडिंग का तरीका सबसे अलग

अमेरिका पर नजर रखने वाले कई लोग और डेमोक्रेट्स यह मानते हैं कि ट्रंप का यह दिखावटी अंदाज उनकी पर्सनल ब्रांडिंग की कवायद का ही एक हिस्सा है। कई एक्सपर्ट्स का कहना है कि नाम बदलने की यह कवायद और हर मुमकिन जगह अपनी तस्वीर लगाने की कोशिश, उनके 'हीरो वाली छवि' को हमेशा कायम रखने की कोशिश से जुड़ी है।

एक एक्सपर्ट ने कहा कि वह इस सोच को हमेशा बनाए रखना चाहते हैं कि वह एक आम इंसान से कहीं ज्यादा बड़े हैं। 'द फॉर्च्यून' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की इस तरह की कोशिशें, अपनी उस महानता को साबित करने का उनका अपना तरीका है, जो इतिहास ने उन्हें अभी तक नहीं दी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति खुद को एक बेहतरीन शोमैन मानते हैं, और ऐसा करने का इससे बेहतर तरीका क्या हो सकता है कि वे इमारतों और दस्तावेजों पर अपना नाम और तस्वीरें लगवा दें?

डेमोक्रेट्स ने भी इस ताजा ब्रांडिंग कोशिश को एक 'दिखावे का प्रोजेक्ट' बताया है और विदेश मंत्री मार्को रूबियो की कड़ी आलोचना की है। हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के डेमोक्रेट्स ने X पर लिखा, 'सेक्रेटरी रूबियो को अपना ज्यादा समय अपने बॉस को यह समझाने में बिताना चाहिए कि वे ईरान में अपनी मर्जी से छेड़ी गई जंग को खत्म करें और अमेरिकी टैक्स के पैसों को ट्रंप के दिखावे पर बर्बाद करने में कम समय लगाएं।'

कई लोगों ने यह भी बताया है कि किसी भी देश के पासपोर्ट पर दुनिया के नेताओं की तस्वीरें नहीं होतीं, यहां तक कि नॉर्थ कोरिया के पासपोर्ट पर भी नहीं। असल में, इस देश में दुनिया में सबसे ज्यादा किसी नेता की पूजा की जाती है, फिर भी इसके पासपोर्ट पर नेता किम जोंग उन की तस्वीर नहीं होती, बल्कि पवित्र माउंट पैक्टू की तस्वीर होती है।

वॉशिंगटन पोस्ट के पूर्व फैक्ट-चेकर ग्लेन केसलर ने तो यह भी बताया कि न तो एडॉल्फ हिटलर और न ही जोसेफ स्टालिन ने अपने पासपोर्ट पर अपनी तस्वीरें लगाई थीं।

अमेरिका का एक सहयोगी देश, यूनाइटेड किंगडम भी अपने पासपोर्ट पर सिर्फ राजा का शाही निशान (Coat of Arms) ही लगाता है। इससे पहले, पासपोर्ट पर महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का शाही निशान होता था।

इसी तरह, ब्रुनेई देश के पासपोर्ट के पहले पन्ने के बीच में ब्रुनेई दारुस्सलाम का राष्ट्रीय शाही निशान बना होता है। ऐसे मे हमें इंतजार करके देखना होगा कि ट्रंप अब आगे किसका नाम बदलते हैं। क्या व्हाइट हाउस का नाम बदलकर 'ट्रंप हाउस' हो जाएगा?

Nitin Arora
नितिन अरोड़ाauthor

नितिन अरोड़ा टाइम्स नाउ नवभारत में न्यूज डेस्क पर सीनियर कॉपी एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। मीडिया में उनका 6 वर्षों का अनुभव है। वह राजनीति, देश–विदेश की बड़ी घटनाओं और समसामयिक मुद्दों को गहराई से समझकर उन्हें सटीक और सरल भाषा में प्रस्तुत करने में माहिर हैं। उन्होंने अपने करियर में लगातार करंट अफेयर्स, पॉलिटिकल डेवलपमेंट्स, डिप्लोमैटिक घटनाएं और डिफेंस सेक्टर से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली कॉन्टेंट तैयार किया है और अबतक 6 हजार से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं। विभिन्न टॉपिक्स पर एक्सप्लेनेर, डेटा-आधारित रिपोर्ट्स और विश्लेषणात्मक कॉपी लिखने में उनकी मजबूत पकड़ है।

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