France Violence: बढ़ते जीवनयापन के खर्च और हाई स्कूल के छात्रों की मांगों के समर्थन में फ्रांस भर में शनिवार को हुए देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान जबरदस्त हिंसा भड़क उठी। राजधानी पेरिस में उग्र प्रदर्शनकारियों ने कई कारों में आग लगा दी और दुकानों में लूटपाट की, जिसके बाद पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। आंतरिक मंत्री लॉरेंट नुनेज (Laurent Nunez) के कार्यालय ने देश भर में हिंसक घटनाओं में लगातार वृद्धि की पुष्टि की है, जिसमें पुलिसकर्मियों पर हमले, लूटपाट और सार्वजनिक इमारतों को नुकसान पहुंचाया जाना शामिल है। पेरिस सहित पूरे देश में पुलिस ने कम से कम 272 लोगों को गिरफ्तार किया है।
फ्रांस में हिंसा का तांडव
फ्रांस में बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खराब स्थिति के खिलाफ शनिवार को हुए प्रदर्शनों में हिंसक झड़पें, आगजनी और लूटपाट हुई।
गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के मुताबिक, देशभर में 110 मार्च में करीब 5.5 लाख लोग शामिल हुए। आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों की संख्या करीब 8 लाख बताई।
- नुनेज ने देशभर में करीब 400 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी दी। उन्होंने पुलिस से भिड़ने और सरकारी इमारतों को निशाना बनाने के लिए कथित कट्टर वामपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया। उनके मुताबिक, कुछ उपद्रवियों ने दुकानों में लूटपाट भी की।
- शनिवार शाम मध्य पेरिस में भी कुछ जगहों पर हिंसा जारी रही।
- पेरिस के प्लास द ला रिपब्लिक इलाके में नकाबपोश प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिस पर पटाखे, पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंके जाने के बाद पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
- राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि तोड़फोड़, सरकारी कार्यालयों और कारोबारों पर हमले तथा लूटपाट करने वालों पर मुकदमा चलाया जाएगा।
'येलो वेस्ट' आंदोलन की वापसी
फ्रांस के अलग-अलग हिस्सों से प्रदर्शनकारियों ने सोशल मीडिया पर किए गए आह्वान के बाद 2018 में शुरू हुए 'येलो वेस्ट' आंदोलन को एक बार फिर से जीवित करने की कोशिश की। पिछले कुछ महीनों में पेट्रोल, ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल आने के कारण लोगों में सरकार के प्रति गहरा गुस्सा और निराशा देखी जा रही है।
पेरिस के उत्तर-पूर्व में स्थित 'प्लास दे ला रिपब्लिक' (Place de la Republique) में हुडी और मास्क पहने कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर आतिशबाजी, पक्के पत्थर और अन्य चीजें फेंकी। जवाब में पुलिस ने उन्हें खदेड़ने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का प्रयोग किया। एसोसिएटेड प्रेस के संवाददाताओं ने बताया कि कारों, साइकिलों और अन्य वाहनों के साथ-साथ कचरे के डिब्बों से काला धुआं उठता देखा गया। एक न्यूज़ कियोस्क भी जल गया और कई दुकानों में लूटपाट की गई। इस झड़प में कई लोग घायल भी हुए हैं।
नुनेज के कार्यालय ने बताया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के छोटे समूहों को सरकारी इमारतों की तरफ बढ़ने से रोकने की कोशिश की। सुरक्षा कारणों से पुलिस के अनुरोध पर चैंप्स-एलिसी (Champs-Elysees), राष्ट्रपति भवन, संसद और सरकारी कार्यालयों के आसपास के कई मेट्रो स्टेशन शनिवार को बंद रहे।
शांतिपूर्ण मार्च और छात्रों का समर्थन
इस बीच, बड़ी संख्या में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों ने उत्तर-पश्चिम पेरिस की ओर बढ़ने वाले मार्च में हिस्सा लिया। भीड़ ने फ्रांस का राष्ट्रीय गान गाया, झंडे लहराए और कुछ लोगों ने ट्रंपेट तथा वायलिन भी बजाए। सितंबर के मध्य से स्कूल की तालाबंदी के जरिए विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्र समूहों ने भी अपने समर्थकों से इन प्रदर्शनों में शामिल होने की अपील की थी। फ्रांस के प्रमुख मजदूर संघों में से एक 'सीजीटी' (CGT) ने भी इन प्रदर्शनों का समर्थन किया और "बेहतर वेतन-पेंशन, कम कीमतें और लोगों की जरूरतों को पूरा करने वाली सार्वजनिक सेवाओं की सुरक्षा" की मांग की। संघ के अनुसार, शनिवार को इन रैलियों में 5 लाख से अधिक प्रदर्शनकारियों ने हिस्सा लिया।
