Sep 28, 2026
सिक्के को ध्यान से देखेंगे तो किनारे पर छोटी-छोटी धारियां नजर आएंगी लेकिन क्या आप जानते हैं, इन्हें बनाने की असली वजह क्या है?
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सिक्के के किनारे बनी इन धारियों को (रीडिंग या फिर मिल्ड एज) Reeding या Milled Edge कहा जाता है। इनका इतिहास काफी दिलचस्प है।
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पुराने समय में सोने और चांदी के सिक्के चलते थे। कुछ लोग सिक्के के किनारे से थोड़ा-थोड़ा कीमती धातु काट लेते थे।
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धातु काटने के बाद सिक्का देखने में लगभग वैसा ही रहता था और उसे पूरी कीमत पर चलाया जा सकता था। काटी गई सोने-चांदी की धातु अलग से बेच दी जाती थी।
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इस धोखाधड़ी को पकड़ने के लिए सिक्कों के किनारों पर खास धारियां बनाई जाने लगीं। अगर कोई किनारा काटता, तो धारियों का पैटर्न तुरंत बिगड़ जाता।
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रीडेड किनारे ने दुकानदारों और लोगों के लिए सिक्के के साथ हुई छेड़छाड़ पहचानना आसान बना दिया। यही इसका सबसे बड़ा ऐतिहासिक फायदा था।
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ब्रिटेन में 17वीं सदी से सिक्कों के किनारों पर मिल्ड पैटर्न का इस्तेमाल होने लगा था। इसका मकसद सिक्कों की कीमत और धातु को सुरक्षित रखना था।
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आज रोजमर्रा के ज्यादातर सिक्के कीमती सोने-चांदी से नहीं बनते। फिर भी कई सिक्कों पर ये धारियां परंपरा और सिक्कों को पहचानने जैसे कामों के लिए बनी हुई हैं।
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सिक्के का किनारा छूकर उसके आकार और बनावट का अंदाजा लगाया जा सकता है। कुछ देशों में अलग-अलग किनारे लोगों को अलग मूल्यवर्ग के सिक्के पहचानने में मदद करते हैं।
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