Sep 27, 2026

पेड़ों पर बना लेते हैं अपना घर, पूरी दुनिया से अलग जिंदगी जीते हैं यहां के लोग

Pankaj Yadav

​दुनिया से अलग जिंदगी जीते हैं ये लोग​

आज दुनिया इतनी आधुनिक हो चुकी है कि लोग तकनीक के सहारे हर एक असंभव चीज को संभव बनाते जा रहे हैं। फिर भी इसी दुनिया में कुछ लोग ऐसे भी हैं जो आज भी पाषाण काल में जी रहे हैं।

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​जमीन पर नहीं, पेड़ों पर घर​

हम बात कर रहे हैं इंडोनेशिया के पापुआ के घने जंगलों में रहने वाले कोरोवाई जनजाति की। इनके कुछ परिवार जमीन के बजाय ऊंचे पेड़ों पर घर बनाते हैं।

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​20 मीटर तक ऊंचे होते हैं घर​

कोरोवाई लोगों के पेड़ों पर बने घर जमीन से करीब 15 से 20 मीटर तक ऊपर हो सकते हैं। वहां पूरा परिवार रह सकता है।

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​जंगल ही इनका घर और सहारा​

इनकी जिंदगी जंगल से गहराई से जुड़ी है। भोजन और रोजमर्रा की कई जरूरतें जंगल से मिलने वाले प्राकृतिक संसाधनों से पूरी होती हैं।

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​आज भी शिकार पर निर्भर​

कोरोवाई समुदाय के कुछ लोग आज भी शिकार करते हैं। इसके अलावा फल, कंद और जंगल में मिलने वाली दूसरी चीजें भी इनके भोजन का हिस्सा हैं।

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​पेड़ों पर घर क्यों बनाते हैं?​

पेड़ों पर घर बनाने के पीछे कई कारण बताए जाते हैं। जंगली जानवरों से बचाव के साथ-साथ इनकी पारंपरिक मान्यताएं भी इसका एक कारण मानी जाती हैं।

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​बनाने में माहिर हैं पेड़ वाले घर​

इन घरों को लकड़ी, बेंत और पत्तों जैसी प्राकृतिक चीजों से बनाया जाता है। ऊंचाई पर मजबूत घर तैयार करना इनके पारंपरिक कौशल का हिस्सा है।

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​जंगल से ही जुटाते हैं खाना​

शिकार के अलावा जंगल से फल, कंद और दूसरे खाद्य पदार्थ जुटाए जाते हैं। यानी इनकी रोजमर्रा की जिंदगी काफी हद तक जंगल पर निर्भर है।

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​परंपराएं आज भी जिंदा​

कोरोवाई समुदाय ने अपनी कई पुरानी परंपराओं को अब तक संभालकर रखा है। आधुनिक दुनिया से सीमित संपर्क ने उनकी पारंपरिक जीवनशैली को काफी हद तक बनाए रखा है।

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​नरभक्षण के दावों की भी चर्चा​

कोरोवाई समुदाय को लेकर कुछ रिपोर्टों में नरभक्षण जैसी पुरानी परंपराओं के दावे किए गए हैं। हालांकि ऐसे दावों को लेकर स्रोतों और अलग-अलग अध्ययनों में अंतर मिलता है, इसलिए इन्हें तथ्य के तौर पर सामान्यीकृत नहीं किया जाना चाहिए।

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