मान लीजिए कि आप अपनी कार पार्किंग में खड़ी कर किसी रेस्तरां या सिनेमा हॉल में गए हैं। जब आप बाहर आते हैं और अपनी कार की तलाश करते हैं, तो आप पाते हैं कि वह गायब है। फिर आप लोगों से पूछते हैं कि लेकिन किसी को भी आपकी कार के बारे में पता नहीं होता है। फिर आपको मालूम होता है कि आपकी कार चोरी हो गई है। पिछले साल अक्टूबर में पब्लिश एक डिजिटल बीमाकर्ता ACKO की एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में अधिक वाहन चोरी के मामले में दर्ज किए गए। इसके बाद बेंगलुरु और चेन्नई में सबसे अधिक कार चोरी के मामले दर्ज किए गए।
ट्रैकिंग उपकरण
जीपीएस लगी कारों को सिग्नल देने से रोकने के लिए चोर इलेक्ट्रॉनिक जैमर का इस्तेमाल करते हैं। कार उठाने वाले इन जैमर का बहुत अधिक उपयोग करते हैं क्योंकि आजकल अधिकांश कारों में स्थान-ट्रैकिंग उपकरण लगे होते हैं।
बीमा और लोन से जुड़े डॉक्यूमेंट्स
अगर आपकी कार चोरी हो जाए, तो बीमा और लोन से संबंधित सभी जानकारी और दस्तावेज जुटा लेने चाहिए। पुलिस और बीमाकर्ता को वाहन की तलाश शुरू करने या नुकसान की भरपाई करने के लिए कार की जानकारी की जरूरत पड़ेगी। जिस व्यक्ति की कार चोरी हो गई है उसे तुरंत पर्याप्त जानकारी के साथ पुलिस में FIR दर्ज करानी चाहिए। इसके अलावा व्यक्ति को बीमाकर्ता को तुरंत सूचित करना चाहिए कि उसकी कार चोरी हो गई है।
पॉलिसी नंबर और वाहन की डिटेल्स
कार के मालिक को पॉलिसी नंबर, वाहन की डिटेल्स, घटना की तारीख समय और विवरण जैसे महत्वपूर्ण डिटेल्स प्रदान करके क्लेम फॉर्म भरना होगा। राज्य के मोटर वाहन विभाग को कार चोरी के बारे में सूचित किया जाना चाहिए। विभाग कार मालिक का पंजीकरण रद्द कर देगा और लाइसेंस प्लेटों को चोरी के रूप में चिह्नित करेगा। इससे व्यक्ति को रजिस्टर्ड या लापता वाहन पर पिछले देय के शुल्क से बचने में मदद मिलेगी।
RTO को सूचित करें
जिस व्यक्ति का वाहन चोरी हो गया है उसे क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरण (RTO) को चोरी की सूचना देनी होगी। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि रजिस्ट्रेशन करने वाले अधिकारी वाहन की ऑनरशिप ट्रांसफर कर देते हैं। यदि कोई चोर कार का दुरुपयोग करता है, तो आरटीओ को सूचित करने से कार की ओनरशिप में किसी भी अनधिकृत परिवर्तन को रोकने सहित कई तरीकों से मदद मिल सकती है।
