Tripura State Electricity Corporation Limited: त्रिपुरा राज्य बिजली निगम लिमिटेड (TSECL) ने राज्य नियामक आयोग से अपने राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए बिजली शुल्क में बढ़ोतरी की मांग की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को ये जानकारी दी। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में साल 2014 से बिजली शुल्क नहीं बढ़ा है, जिससे राज्य सरकार द्वारा चलाए जाने वाला बिजली निगम भारी घाटे में है। TSECL के प्रबंध निदेशक देबाशीष सरकार ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत करते हुए कहा, “प्राकृतिक गैस की कीमतों में पिछले 1 साल में औसतन 196 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है और समान पारेषण लागत (Uniform Transmission Cost) की शुरुआत ने निगम की राजकोषीय स्थिति को प्रभावित किया है।”
पूर्वोत्तर राज्यों में, लगभग सभी पावर प्लांट नैचुरल गैस से चलते हैं
शुल्क में बदलाव नहीं हुआ तो निगम को होगा 1100.60 करोड़ रुपये का घाटा
देबाशीष सरकार ने कहा, “जहां असम जैसे बड़े राज्यों के लिए यूनिफॉर्म ट्रांसमिशन कॉस्ट बढ़िया है तो दूसरी तरफ ये मणिपुर, त्रिपुरा और मिजोरम जैसे छोटे राज्यों को नुकसान पहुंचाती है।” उन्होंने कहा कि अगर चालू वित्त वर्ष में भी बिजली के शुल्क में बदलाव नहीं हुआ तो निगम को 1100.60 करोड़ रुपये का घाटा होगा।चालू वित्त वर्ष के लिए 1968.64 करोड़ रुपये होंगे खर्च
TSECL के प्रबंध निदेशक देबाशीष सरकार ने कहा कि 2023-24 के लिए अनुमानित राजस्व 868.04 करोड़ रुपये है, जबकि टीएसईसीएल को चालू वित्त वर्ष के लिए 1968.64 करोड़ रुपये खर्च करने की जरूरत है, जिससे निगम को सीधे-सीधे 1100.60 करोड़ रुपये का नुकसान होगा।आम लोगों पर कैसे पड़ेगा असर
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक गैस की कीमत में असामान्य बढ़ोतरी के कारण रुखिया पावर जनरेशन प्लांट में उत्पादन लागत 7 रुपये प्रति यूनिट हो गई है, जो सिर्फ 2.50 प्रति यूनिट थी। बताते चलें कि देश के पूर्वोत्तर राज्यों में, लगभग सभी पावर प्लांट नैचुरल गैस से चलते हैं। अगर राज्य नियामक आयोग TSECL की बातों को मान लेता है तो त्रिपुरा में बिजली महंगी हो जाएगी, जिससे आम लोगों के बिजली का बिल ज्यादा आने लगेगा। इसका सीधा असर लोगों के बजट और बचत पर पड़ेगा।भाषा इनपुट्स के साथ
