पर्यावरण-अनुकूल होने संबंधी भ्रामक दावों पर लगाम के लिए जारी किये गए नए दिशानिर्देश

ग्रीनवाशिंग पर लगाम लगाने के लिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने नए दिशा-निर्देश जारी किए। इसके जरिये सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि पर्यावरण के अनुकूल होने संबंधी दावे सत्यापन योग्य साक्ष्य और स्पष्ट खुलासे द्वारा समर्थित हों।

सरकार ने कंपनियों के पर्यावरण नियंत्रण संबंधी भ्रामक दावों और ‘ग्रीनवाशिंग’ गतिविधियों के नियमन के लिए मंगलवार को व्यापक दिशानिर्देश जारी किए। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं की सुरक्षा करना और पर्यावरण अनुकूल उत्पादों के विपणन में पारदर्शिता को बढ़ावा देना है। ‘ग्रीनवाशिंग’ एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोई कंपनी अपने उत्पादों को पर्यावरण के लिहाज से सुरक्षित होने के बारे में गलत धारणा या भ्रामक जानकारी देती है। ग्रीनवाशिंग पर लगाम लगाने के लिए उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने नए दिशा-निर्देश जारी किए। इसके जरिये सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि पर्यावरण के अनुकूल होने संबंधी दावे सत्यापन योग्य साक्ष्य और स्पष्ट खुलासे द्वारा समर्थित हों।

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पर्यावरण नियंत्रण को लेकर गलत जानकारी पर लगेगी लगाम (तस्वीर-Canva)

उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने कहा कि ये दिशानिर्देश पर्यावरणीय दावों पर रोक नहीं लगाते हैं लेकिन वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि दावे ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ किए जाएं। उन्होंने मीडिया से कहा कि दावों को सत्यापन योग्य साक्ष्य और स्वतंत्र अध्ययनों द्वारा समर्थित होना चाहिए। मसलन, अब '100 प्रतिशत पर्यावरण-अनुकूल' और 'शून्य उत्सर्जन' जैसे शब्दों को सटीक और सुलभ पात्रताओं के साथ प्रमाणित किया जाना चाहिए। ये दिशानिर्देश स्पष्ट मापदंड स्थापित करने के लिए 'ग्रीनवाशिंग' और 'पर्यावरणीय दावों' की परिभाषाएं भी निर्धारित करते हैं।

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