साइबर फ्रॉड के शिकार लोग कैसे पाएं अपना फंसा हुआ पैसा? कंज्यूमर कमीशन ऐसे करेगा मदद, जानें स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

Cyber Fraud Recovery: साइबर फ्रॉड में बैंक की लापरवाही होने पर पीड़ित कंज्यूमर कमीशन से मुआवजे की मांग कर सकते हैं। ठगी होने पर सबसे पहले 1930 पर कॉल करें और पुलिस में शिकायत दर्ज कराएं।

Cyber Fraud Recovery : ऑनलाइन ठगी के शिकार लोग अक्सर यह सोचते हैं कि पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने के बाद उनका पैसा अपने आप वापस आ जाएगा। हालांकि, केवल पुलिस शिकायत से अपराधी को सजा तो मिल सकती है, लेकिन वित्तीय नुकसान की भरपाई तुरंत होना आसान नहीं होता। हाल ही में नागपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (District Consumer Commission) के एक फैसले ने साइबर फ्रॉड पीड़ितों को राहत की नई उम्मीद दी है। कमीशन ने आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) को फेडेक्स पार्सल घोटाले (FedEx Parcel Scam) में 6.93 लाख रुपये गंवाने वाली एक महिला को 5.18 लाख रुपये से अधिक रिफंड करने का आदेश दिया। कोर्ट ने माना कि बैंक ने सेवा में लापरवाही और अनुचित व्यवहार किया है। अगर आपके साथ भी कोई साइबर फ्रॉड होता है और बैंक सुरक्षा में चूक करता है, तो आप कंज्यूमर कमीशन का रुख कर सकते हैं। आइए आसान शब्दों में समझें कि यह व्यवस्था कैसे काम करती है।

Cyber fraud recovery, Cyber Fraud Recovery Guide, Consumer Commission, bank negligence, deficiency in service, FedEx parcel scam

साइबर फ्रॉड के बाद सिर्फ पुलिस नहीं, बैंक से भी वसूल सकते हैं पाई-पाई! जानें कंज्यूमर कमीशन का धांसू रास्ता

क्रिमिनल केस बनाम मुआवजे का केस: दोनों में क्या अंतर है?

साइबर मामलों के जानकार के अनुसार, हर साइबर अपराध के दो पहलू होते हैं। आपराधिक पहलू (Criminal Case): इसमें पुलिस धोखाधड़ी करने वाले को पकड़ती है और अदालत उसे सजा देती है। वित्तीय नुकसान (Financial Loss): अपराधी को सजा मिलने से पीड़ित का पैसा अपने आप वापस नहीं आ जाता। आईटी एक्ट (IT Act) के तहत मुआवजे का तंत्र बहुत धीमा है, जहां मामले सालों-साल लटके रहते हैं। इसके उलट, अगर बैंक की तरफ से सुरक्षा में कोई लापरवाही हुई है, तो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act) के तहत कंज्यूमर कमीशन के पास जाकर बैंक से मुआवजा मांगा जा सकता है।

End of Feed