Uttarakhand Tourist Places (उत्तराखंड में टूरिस्ट के लिए घूमने की जगहें): अप्रैल (April) के महीने के साथ ही उत्तर भारत में गर्मी का दौर शुरू हो जाता है। गर्मी से बचने के लिए लोग मई (May) और जून (June) के महीने में हिल स्टेशन (Hill Station) घूमने के लिए जाते हैं। उत्तराखंड (Uttarakhand) में कई सारे ऐसे हिल स्टेशन हैं, जहां टूरिस्ट (Tourist) हर साल बढ़ते जा रहे हैं। हालांकि बाहर से आने वाले टूरिस्टों की पहली पसंद नैनीताल (Nainital) या मसूरी (Mussoorie) है। लेकिन आपको बता दें कि नैनीताल और मसूरी के अलावा भी कई सारे सुंदर और बढ़िया जगहें हैं, जहां आप मई-जून के महीने में आसानी से जा सकते हैं।
उत्तराखंड में टूरिस्ट के लिए घूमने की जगहें।
साथ ही इन जगहों पर आप अपनी वाइफ और बच्चों के साथ, गर्लफ्रेंड, फैमिली और दोस्तों के साथ जा सकते हैं। मई और जून का महीना जहां मैदानी इलाकों में गर्म रहता है, वहीं उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम ठंडा रहता है। सिर्फ दिल्ली और उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के बाकी राज्यों से भी लाखों की संख्या में टूरिस्ट मई-जून के महीने में उत्तराखंड घूमने के लिए आते हैं।
मई-जून में घूमने की सबसे बड़ी वजह गर्मी और बच्चों के स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां हैं। मई-जून के महीने के महीने में सबसे ज्यादा मजे बच्चे ही करते हैं। अगर आप भी मई-जून के महीने में कहीं घूमने का प्लान कर रहे हैं, तो आज हम आपको उत्तराखंड की कई सुंदर और बढ़िया जगहों के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां आप आसानी से अगले महीने घूमने के लिए आ सकते हैं।
जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क (Jim Corbett National Park)
मई-जून के महीने में घूमने के लिए आप जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क आ सकते हैं। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क उत्तराखंड के नैनीताल जिले में रामनगर में हिमालय की तलहटी के बीच स्थित सबसे पुराना नेशनल पार्क है। वाल्ड लाइफ सफारी के लिए फेमस जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में नदी के किनारे कई रिसॉर्ट हैं। यहां आने पर आपको टाइगर देखने को मिल सकता है। साथ ही दुर्लभ और प्रवासी पक्षियों की 650 से अधिक प्रजातियों का घर पक्षी देखने वालों के लिए स्वर्ग है। कॉर्बेट नेशनल पार्क में सबसे लोकप्रिय आकर्षण ढिकाला है। बच्चों के लिए ये जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है। दिल्ली से जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क की दूरी 290 किलोमीटर है और आप यहां अपनी कार, टैक्सी, सरकारी या प्राइवेट बस और ट्रेन के माध्यम से यहां पहुंच सकते हैं।
मुक्तेश्वर (Mukteshwar)
मुक्तेश्वर उत्तराखंड में नैनीताल से लगभग 50 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटा सा हिल स्टेशन है। मुक्तेश्वर का नाम यहां स्थित 350 साल पुराने शिव मंदिर के नाम पर रखा गया है, जिसे मुक्तेश्वर धाम कहा जाता है। मुक्तेश्वर रॉक क्लाइम्बिंग और रैपलिंग के अलावा ट्रेकिंग के लिए एक फेमस डेस्टिनेशन है। पिछले कुछ सालों से मुक्तेश्वर में टूरिस्टों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अगर आप मुक्तेश्वर घूमने के लिए आते हैं तो आप इसके आसपास कई सारी जगहों को आसानी से घूम सकते हैं। मुक्तेश्वर घूमने का बढ़िया समय अक्टूबर से जून महीने के बीच है। दिल्ली से मुक्तेश्वर की दूरी 360 किलोमीटर है और आप यहां अपनी कार, टैक्सी, सरकारी या प्राइवेट बस के माध्यम से यहां पहुंच सकते हैं। हालांकि आप ट्रेन से काठगोदाम तक आ सकते हैं और फिर आपको आगे सड़क के रास्ते आना होगा।
लैंसडाउन (Lansdowne)
लैंसडाउन उत्तराखंड के पौड़ी जिले में दिल्ली से 258 किलोमीटर की दूरी पर स्थित एक छोटा स्टेशन है। ओक और देवदार के जंगल से भरा ये हिल स्टेशन पक्षी देखने वालों, कैजुअल हाइकर्स और यहां घूमने आने वालों के लिए एक स्वर्ग है। इस शहर की खोज अंग्रेजों ने की थी और इसका नाम भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड लैंसडाउन से मिला था। लैंसडाउन के आसपास घूमने की सारी सुंदर और बढ़िया जगहें हैं। खासकर बच्चों को लैंसडाउन काफी ज्यादा पसंद आता है। आप यहां अपनी कार, टैक्सी, सरकारी या प्राइवेट बस के माध्यम से यहां पहुंच सकते हैं। हालांकि आप ट्रेन से कोटद्वार तक आ सकते हैं और फिर आपको आगे सड़क के रास्ते आना होगा।
चकराता (Chakrata)
चकराता उत्तराखंड में देहरादून के पास एक छोटा सा हिल स्टेशन है, जो समुद्र तल से 6948 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। चकराता में पर्वतारोहण लोकप्रिय गतिविधियों में से एक है। चकराता उन लोगों के लिए एक आदर्श स्थान है जो शांत स्थलों की तलाश कर रहे हैं। चकराता की सबसे ऊंची चोटी खरंबा चोटी है, जो 10,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है और ये घने जंगलों और प्रकृति की गोद से घिरी हुई है। मई-जून के महीने में आप यहां भी घूमने के लिए आ सकते हैं। दिल्ली से चकराता की दूरी 295 किलोमीटर है और आप यहां अपनी कार, टैक्सी, सरकारी या प्राइवेट बस के माध्यम से यहां पहुंच सकते हैं। हालांकि आप ट्रेन से देहरादून तक आ सकते हैं और फिर आपको आगे सड़क के रास्ते आना होगा।
