आजकल स्मार्ट टीवी सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है। इसकी मदद से हम फिल्में देखते हैं, यूट्यूब चलाते हैं और इंटरनेट पर अपनी पसंद का कंटेंट सर्च करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके स्मार्ट टीवी में मौजूद कुछ फीचर्स आपकी प्राइवेसी से भी जुड़े हो सकते हैं? कई स्मार्ट टीवी में वॉयस कमांड की सुविधा होती है, जिसके लिए माइक्रोफोन का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं, टीवी पर आप क्या देखते हैं, इसकी जानकारी भी कुछ डिवाइस इकट्ठा कर सकते हैं।
अगर आप प्राइवेसी को मेंटेन रखना चाहते हैं तो आपको कुछ सेटिंग्स बदलनी पड़ सकती हैं। (फोटो क्रेडिट-iStock)
अगर इन फीचर्स की सेटिंग सही नहीं है, तो आपकी देखने की आदतों और निजी जानकारी से जुड़ा डेटा आपकी उम्मीद से ज्यादा शेयर हो सकता है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि हर स्मार्ट टीवी लगातार आपकी निजी बातें रिकॉर्ड करता रहता है। इसलिए घबराने की बजाय जरूरी है कि आप अपने टीवी की प्राइवेसी सेटिंग्स को समझें और जरूरत के हिसाब से उनमें बदलाव करें।
स्मार्ट टीवी में क्यों हो सकता है प्राइवेसी का खतरा?
स्मार्ट टीवी में मिलने वाला वॉयस असिस्टेंट आपको बोलकर चैनल बदलने, वीडियो खोजने और दूसरे काम करने की सुविधा देता है। इस फीचर के लिए टीवी या उसके रिमोट में माइक्रोफोन हो सकता है। अगर वॉयस असिस्टेंट चालू है, तो यह जानना जरूरी है कि वह कब आपकी आवाज सुनता है और आपकी वॉयस रिकॉर्डिंग से जुड़ा डेटा कैसे इस्तेमाल करता है। इसके अलावा, कुछ टीवी में ACR यानी ऑटोमैटिक कंटेंट रिकग्निशन नाम का फीचर होता है। यह तकनीक टीवी पर चलने वाले कंटेंट की पहचान करके आपकी देखने की आदतों से जुड़ी जानकारी जुटा सकती है। इस डेटा का इस्तेमाल कंटेंट के सुझाव देने और विज्ञापनों को आपकी पसंद के हिसाब से दिखाने के लिए किया जा सकता है।
टीवी की कंपनी और उसकी प्राइवेसी पॉलिसी के आधार पर डेटा इस्तेमाल करने का तरीका अलग हो सकता है। इसलिए अगर आपको लगता है कि टीवी पर आपकी पसंद से जुड़े विज्ञापन बार-बार दिख रहे हैं, तो इसकी वजह सिर्फ माइक्रोफोन नहीं, बल्कि आपकी देखने की हिस्ट्री और ऑनलाइन गतिविधियां भी हो सकती हैं।
इन सेटिंग्स में तुरंत करें बदलाव
अगर आप अपने स्मार्ट टीवी की प्राइवेसी को बेहतर बनाना चाहते हैं, तो सबसे पहले उसकी सेटिंग्स में जाकर वॉयस असिस्टेंट और वॉयस रिकग्निशन के विकल्प चेक करें। अगर आपको आवाज से टीवी चलाने की जरूरत नहीं है, तो इन फीचर्स को बंद कर दें। इसके बाद Privacy या Viewing Data जैसी सेटिंग्स में जाकर ACR और पर्सनलाइज्ड विज्ञापनों से जुड़े विकल्पों को देखें। जरूरत न होने पर इन्हें बंद किया जा सकता है।
टीवी में इंस्टॉल किए गए ऐप्स की परमिशन भी चेक करें और केवल जरूरी एक्सेस ही दें। अगर आपके टीवी में कैमरा लगा है, तो इस्तेमाल न होने पर उसे बंद रखें या उपलब्ध होने पर कैमरा कवर का इस्तेमाल करें। इसी तरह, माइक्रोफोन के लिए अलग म्यूट स्विच दिया गया है, तो उसका भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ध्यान रखें कि सिर्फ टीवी बंद करने से हर डिवाइस में माइक्रोफोन पूरी तरह बंद हो जाए, यह जरूरी नहीं है। इसलिए अपने टीवी के मॉडल के अनुसार सही सेटिंग्स की जानकारी लें।
डेटा सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये आसान तरीके
स्मार्ट टीवी को सुरक्षित रखने के लिए उसकी सेटिंग्स बदलना ही काफी नहीं है। समय-समय पर टीवी का सॉफ्टवेयर अपडेट करते रहें, ताकि सुरक्षा से जुड़ी कमियों को दूर किया जा सके। टीवी में ऐसे ऐप्स इंस्टॉल करने से बचें, जिनकी जरूरत नहीं है या जिन पर आपको भरोसा नहीं है। इसके अलावा, टीवी के अकाउंट के लिए मजबूत पासवर्ड रखें और जहां सुविधा मिले, वहां सिक्योरिटी ऑप्शन चालू करें। अगर टीवी का कोई फीचर इस्तेमाल नहीं करते हैं, तो उसकी परमिशन बंद रखना बेहतर है। सार्वजनिक जगहों पर इस्तेमाल होने वाले वाई-फाई की जगह सुरक्षित घरेलू नेटवर्क का इस्तेमाल करें। सबसे जरूरी बात यह है कि टीवी खरीदते या इस्तेमाल करते समय उसकी प्राइवेसी पॉलिसी को नजरअंदाज न करें।
