चेन्नई का मैदान, 30 दिसंबर 2012 का दिन, सामने पाकिस्तान। किसी भी डेब्यूटेंट गेंदबाज के पैर लड़खड़ा सकते थे, लेकिन यूपी के भुवनेश्वर कुमार ने डर को पीछे छोड़ते हुए यादगार डेब्यू किया। पाकिस्तान के मोहम्मद हफीज को अपने वनडे करियर की पहली गेंद पर क्लीन बोल्ड कर दिया। हफीज को लगा कि गेंद गिरने के बाद बाहर की तरफ जाएगी, लेकिन हुआ उलटा। गेंद पिच पर पड़ने के बाद अंदर की तरफ आई और हफीज की ऑफ स्टंप उड़ा ले गई। कमेंट्रेटरों ने इसे 'ड्रीम बॉल' घोषित कर दिया। उस दिन भारतीय क्रिकेट में 'स्विंग के किंग' का उदय हुआ।
नई गेंद हाथ में हो, पिच पर थोड़ी नमी हो और सामने दुनिया का कोई भी बड़ा बल्लेबाज खड़ा हो तो भुवनेश्वर कुमार की स्विंग उसे परेशान करने के लिए काफी थी। गेंद को दोनों तरफ घुमाने की कला, बल्लेबाज को आगे खेलने पर मजबूर करने की क्षमता और ऑफ स्टंप के आसपास लगातार गेंद डालने के हुनर ने उन्हें जल्द ही स्विंग का उस्ताद बना दिया। वह टीम के भरोसेमंद गेंदबाज बन गए। लेकिन चोट और गिरते फॉर्म की वजह से लगभग चार साल तक टीम इंडिया से बाहर हो गए। ऐसा लगा कि उनका करियर ही समाप्त हो गया, हालांकि, एक बार फिर वही पुराना भुवनेश्वर कुमार टीम इंडिया में लौट आया।
एक साथ बने दो संयोग
भुवनेश्वर को न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज के लिए भारतीय टीम में चुना गया। इससे पहले भुवनेश्वर कुमार का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ था। 22 नवंबर 2022 को न्यूजीलैंड के खिलाफ नेपियर में खेले गए टी20 मैच में वो भारतीय टीम का हिस्सा थे। अब करीब 47 महीने बाद भुवनेश्वर दोबारा मैदान में भारत की जर्सी में दिख सकते हैं।
वहीं, इससे पहले वेस्टइंडीज के खिलाफ पांचवें टी20 मैच के लिए चोटिल अर्शदीप सिंह की जगह भारतीय स्क्वाड में जोड़ा गया है। यह वापसी इसलिए भी बड़ी चर्चा का विषय है, क्योंकि भुवनेश्वर ने 25 दिसंबर 2012 को बेंगलुरु के ही मैदान पर अपना टी20I डेब्यू किया था। दिलचस्प बात ये है कि अब करीब चार साल के बाद भुवी बेंगलुरु के मैदान पर भारतीय जर्सी में एक बार फिर नजर आ सकते हैं।
ये दोनों संयोग उनके कड़ी मेहनत से बने हैं। लेकिन सवाल है, आखिर ऐसा क्या हुआ कि 36 साल के भुवनेश्वर की चर्चा फिर से भारतीय क्रिकेट में होने लगी? इसका जवाब पिछले दो आईपीएल सीजन में छिपा है।
bhuvneshwar kumar IPL. Photo- IPL
भुवनेश्वर ने पिछले दो आईपीएल सीजन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए खेले टीम के खिताबी अभियान का अहम हिस्सा रहे। 2025 में उन्होंने 17 विकेट लिए, जबकि 2026 में उनके नाम 28 विकेट रहे। यानी दो सीजन में कुल 45 विकेट। खास तौर पर 2026 का सीजन उनके लिए शानदार रहा। उन्होंने 16 मैचों में 28 विकेट लिए। उनका गेंदबाजी औसत 17.89 और इकॉनमी रेट 7.95 रहा। वह विकेट लेने के मामले में आईपीएल में दूसरे नंबर पर रहे। यही वह प्रदर्शन था, जिसके बाद क्रिकेट फैन्स के बीच यह चर्चा होने लगी कि अगर भुवनेश्वर अभी भी इतनी अच्छी गेंदबाजी कर रहे सकते हैं तो उन्हें भारत के लिए दोबारा क्यों नहीं आजमाया जा सकता?
शुरुआत में ही दिखा दिया था दम
भुवनेश्वर कुमार की कहानी उन गेंदबाजों से अलग है, जिन्होंने अपनी पहचान तेज रफ्तार से बनाई। उत्तर प्रदेश के इस गेंदबाज ने अपनी स्विंग और सटीकता से बल्लेबाजों को चौंकाया। घरेलू क्रिकेट में उनकी पहचान तब और मजबूत हुई, जब उन्होंने रणजी ट्रॉफी में सचिन तेंदुलकर को शून्य पर आउट किया। वह ऐसा करने वाले पहले गेंदबाज बने थे। साल 2012 में पाकिस्तान के खिलाफ टी20I और वनडे क्रिकेट में यादगार डेब्यू किया।
इंग्लैंड में यादगार प्रदर्शन
भुवनेश्वर की गेंदबाजी का सबसे शानदार पहलू तब सामने आया, जब 2014 में भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर गई। वहां की परिस्थितियां उनकी स्विंग के अनुकूल थीं और उन्होंने इसका पूरा फायदा उठाया। पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में उन्होंने 19 विकेट लिए। लॉर्ड्स टेस्ट में 82 रन देकर 6 विकेट उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा और भारत की ऐतिहासिक जीत में उनकी भूमिका अहम रही।
Bhuvi. Photo- BCCI
उस दौरे पर भुवनेश्वर ने यह भी दिखाया कि वह केवल शुरुआती ओवरों के गेंदबाज नहीं हैं। जरूरत पड़ने पर वह लंबे स्पेल डाल सकते हैं, दबाव झेल सकते हैं और बल्ले से भी उपयोगी योगदान दे सकते हैं। उनकी गेंदबाजी में सीम मूवमेंट और स्विंग का ऐसा मेल था, जिसने उन्हें भारतीय आक्रमण का अहम हिस्सा बना दिया।
आंकड़े बताते हैं कितने असरदार रहे भुवी
भुवनेश्वर कुमार के अंतरराष्ट्रीय आंकड़े उनकी उपयोगिता की गवाही देते हैं। उन्होंने तीनों प्रारूपों में भारत का प्रतिनिधित्व किया और टेस्ट से लेकर टी20 तक विकेट लेने की क्षमता दिखाई।
टेस्ट क्रिकेट: 21 मैच, 63 विकेट। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 6/82
वनडे क्रिकेट: 121 मैच, 141 विकेट। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 5/42
टी20 अंतरराष्ट्रीय: 87 मैच, 90 विकेट। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 5/4
ये आंकड़े बताते हैं कि भुवनेश्वर केवल नई गेंद से स्विंग कराने वाले गेंदबाज नहीं थे, बल्कि अलग-अलग प्रारूपों में विकेट निकालने की क्षमता रखते थे। फिर चोट और खराब फॉर्म के चलते उनका प्रदर्शन लगातार गिरता गया। साथ ही नए तेंज गेंदबाजों के आने से कंप्टीशन बढ़ गया। साल 2022 में भुवी की खूब आलोचना हुई। उस वक्त टी20 में भारत के लिए 17वां और 19वां हार का कारण साबित हो रहा था।
डेथ ओवर्स ने छीनी पहचान
एशिया कप 2022 में पाकिस्तान के खिलाफ 19वां ओवर भुवनेश्वर ने किया। इस ओवर में भुवी ने 19 रन खर्च कर दिए। इसके बाद उनकी गेंदबाजी की खूब आलोचना हुई। यहां तक कहा कि गया कि उनकी स्विंग का जादू कहीं खो गया है। उसी साल के टी20 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ भुवनेश्वर की गेंदबाजी पर भी सवाल उठे थे। फिर न्यूजीलैंड दौरे में भी उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और भारतीय टीम में उनकी जगह को लेकर सवाल बढ़े।
इस दौरान भारतीय क्रिकेट में तेज गेंदबाजों की नई पीढ़ी सामने आई। जसप्रीत बुमराह, अर्शदीप सिंह, मोहम्मद सिराज और अन्य युवा तेज गेंदबाजों की नई खोज ने टीम को कई विकल्प दे दिए। ऐसे में 36 साल के भुवनेश्वर के लिए वापसी आसान नहीं थी। उन्होंने अपनी पुरानी लय हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत शुरू कर दी। भुवनेश्वर के लिए ये बदलाव आसान नहीं थे, लेकिन उन्होंने क्रिकेट को प्राथमिकता देते हुए खुद पर सख्ती बरती। क्रिकेट के अलावा उनकी जिंदगी से मौज-मस्ती, पार्टियां गायब हो गईं। इस अनुशासन का असर उनकी फिटनेस पर पड़ा।
bhuvneshwar kumar. Photo- BCCI
पुरानी गेंद से दिखी स्विंग की धार
घरेलू क्रिकेट में उन्होंने फिर से वही पुरानी धारदार गेंदबाजी करनी शुरू की। फिर आईपीएल के 2025 और 2026 के सीजन में आरसीबी की खिताब जीत के हीरो रहे। जिस डेथ ओवर्स ने उनसे उनकी भारतीय जर्सी छीन ली थी,उसी डेथ ओवर्स में शानदार गेंदबाजी की। आईपीएल में डेथ ओवर्स में भुवी के नाम 164 पारियों में 101 विकेट दर्ज हैं। वह ड्वेन ब्रावो (102) के बाद आईपीएल के डेथ ओवर में दूसरे सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज हैं। भुवी ने 21.26 की औसत और 9.44 इकॉनमी रेट से गेंदबाजी की है। उन्होंने 164 पारियों में 1365 गेंद फेंकी और मात्र 82 छक्के खाए हैं।
इसके बाद पूर्व क्रिकेटरों और विशेषज्ञों में उनकी वापसी की चर्चा शुरू हो गई। रैना से लेकर अश्विन तक ने भुवी की वापसी की बात की। फिर 6 अक्टूबर, ऐतिहासिक दिन आया, जब बीसीसीआई ने न्यूजीलैंड दौरे के लिए टी20 टीम का ऐलान करते हुए भुवी को स्क्वाड में शामिल किया।
36 साल की उम्र में उनकी वापसी ना सिर्फ एक अनुभवी गेंदबाज की वापसी नहीं, बल्कि उस कला की वापसी की उम्मीद भी है, जिसमें रफ्तार से ज्यादा अहमियत गेंद पर नियंत्रण और उसकी दिशा बदलने यानी स्विंग कराने की क्षमता की है। अब भारतीय टीम को उनकी स्विंग की धार वापस मिल गई है।
