रणजी ट्रॉफी में चिन्मय सुतार ने नागालैंड के खिलाफ नाबाद 400 रन बनाकर इतिहास रच दिया। वह फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 400 रन बनाने वाले दूसरे भारतीय बल्लेबाज बने। उनसे पहले बीबी निंबालकर ने नाबाद 443 रन बनाए थे। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद उन्होंने सबसे पहले अपने पिता राजेश सुतार को फोन किया और यह खुशखबरी सुनाई। चिन्मय ने पीटीआई से बात करते हुए कहा '400 रन बनाना खास है और यह मेरे लिए किसी सपने के पूरा होने जैसा है। दिन का खेल खत्म होने के बाद यह खुशखबरी हमने सबसे पहले अपने पिता को दी जो मेरे हीरो रहे हैं। उन्होंने मेरा होसला तब बढ़ाया जब मैं बड़े मौकों से चूका और अब जब इतना बड़ा पल मेरी जिंदगी में आया तो मैं उनसे बात करना चाहता था।
चिन्मय ने इस पारी का श्रेय लालरेमपूइया छकछुआक को भी दिया जिन्होंने 10वें विकेट के लिए उनके साथ 189 रन की साझेदारी की, जिसकी बदौलत चिन्मय यह ऐतिहासिक पारी खेल पाए। छकछुआक ने 76 गेंद में 14 रन की पारी खेली।
उनकी तारीफ करते हुए चिन्मय ने कहा 'उन्होंने शानदार बल्लेबाजी की। मेरा ध्यान ज्यादा से ज्यादा रन बनाने पर था ना कि 300 या और कुछ। हम एक समय में 20-20 रन बनाने पर फोकस कर रहे थे। मिजोरम ने अपनी पारी 9 विकेट के नुकसान पर 581 रन बनाकर घोषित कर दी। चिन्मय ने हाल ही में मिजोरम के लिए रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया। वह विजय हजारे ट्रॉफी में मुंबई के लिए ही खेले थे।
उन्होंने कहा मुंबई से ज्यादा मौके नहीं मिले, यही कारण है कि मुझे मिजोरम से जुड़ना पड़ा। चिन्मय ने कहा 'मैं हमेशा से रेड बॉल क्रिकेट का फैन रहा हूं। लेकिन जब मुझे होम टीम मुंबई में ज्यादा खेलने का मौका नहीं मिला तो हमने मिजोरम की तरफ रुख किया। वहां के खिलाड़ियों के साथ मुझे घुलने-मिलने में ज्यादा मुश्किल नहीं हुई।
