मुंबई: बीसीसीआई ने शुक्रवार रात एशियाई खेलों में भाग लेने वाली भारतीय क्रिकेट टीम का ऐलान कर दिया। नए मुख्य चयनकर्ता अजीत आगरकर की अगुआई वाली चयन समिति ने कड़े निर्णय लेते हुए युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताया और किसी भी सीनियर खिलाड़ी को टीम में शामिल नहीं किया। यह टीम से बाहर चल रहे शिखर धवन के लिए बड़ा झटका था। माना जा रहा थी उनकी कप्तानी में युवा खिलाड़ियों से सजी टीम एशियाई खेलों में शिरकत करेगी।
शिखर धवन (साभार Shikhar Dhawan Instagram)
विश्व कप की दौड़ में रहेंगे शामिल
चयनसमिति के इस निर्णय ने क्रिकेट प्रेमियों खासकर गब्बर के फैन्स को निराशा हुई है। वेस्टइंडीज दौरे के लिए शिखर को तीनों फॉर्मेट में से किसी भी टीम में शामिल नहीं किया गया था। तब बोर्ड के अधिकारी ने कहा था कि शिखर धवन को विंडीज दौरे के लिए टीम में जगह नहीं देने का मतबल यह नहीं है कि उनके लिए आगामी आईसीसी विश्व कप 2023 के लिए टीम इंडिया के दरवाजे बंद हो गए हैं। वो बैकअप ओपनर के रूप में टीम में शामिल हो सकते हैं।
टी20 में युवाओं को मिल रही है वरीयता
एशियाई खेलों में क्रिकेट टी20 फॉर्मेट में खेला जाना है। ऐसे में धवन के लिए उस टीम में जगह ऐसे भी नहीं बनती है क्योंकि विंडीज दौरे के लिए चुनी गई भारतीय टी20 टीम में रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे धाकड़ खिलाड़ियों को जगह नहीं मिली है। ऐसे में शिखर को नहीं चुना जाना इस लिहाज से गलत नहीं लगता।
2019 विश्व कप के बाद से मिले हैं कम मौके
भारतीय टीम में साल 2019 के विश्व कप के बाद से धवन को मौके कम मिले हैं। उन्होंने तब से अबतक केवल 37 वनडे मैच खेले जिसमें 41 के औसत से 1313 रन बनाए। कुछ मौकों पर युवा खिलाड़ियों वाली टीम का उन्हें कप्तान बनाया गया। लेकिन जैसे ही सीनियर खिलाड़ियों की वापसी हुई कप्तानी करने का बावजूद उन्हें सीधे टीम से बाहर कर दिया गया।
पिछले 2 साल रहे हैं उतार चढ़ाव भरे
धवन भारतीय टीम से पिछले 2 साल से लगातार अंदर बाहर होते रहे हैं। साल 2018 में इंग्लैंड दौरे पर वो आखिरी बार टेस्ट जर्सी में खेलते नजर आए थे। 2 साल से उन्हें अंतरराष्ट्रीय टी20 में मौका नहीं मिला है। वहीं पिछले 6 महीने से वो वनडे टीम से भी बाहर हैं। ऐसे में बगैर अभ्यास और मैच प्रैक्टिस के उन्हें विश्व कप में मौका मिलेगा या दिया जाएगा इसकी संभावना बेहद कम है।
युवा खिलाड़ी दे रहे हैं चुनौती
शिखर धवन को युवा सलामी बल्लेबाजों से लगातार चुनौती मिल रही है। शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल, ईशान किशन, पृथ्वी शॉ, रुतुराज गायकवाड़ का घरेलू और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में प्रदर्शन उनकी राह का रोड़ा बन रहा है। ऐसे में चयनकर्ता भविष्य की ओर देखते हुए शिखर के अनुभव को अनदेखा कर रहे हैं।
इस चाबी से खुल सकता है दरवाजा
शिखर की टीम में विश्व कप के लिए वापसी का एकमात्र हथियार उनकी आईसीसी ट्रॉफी में धमाकेदार प्रदर्शन है। धवन का बल्ला आईसीसी टूर्नामेंट्स में जमकर बोलता है। घरेलू सरजमीं पर तो उन्हें अपनी ये वाली काबीलियत दिखाने का मौका इसी वजह से मिल सकता है।
आईसीसी टूर्नामेंट में शानदार है रिकॉर्ड
साल 2013 में आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी में टीम इंडिया की खिताबी जीत में अहम भूमिका धवन की थी। उन्होंने 5 मैच में 363 रन 90.75 के औसत के साथ बनाए थे। वहीं 2015 के विश्व कप में 8 मैच में उन्होंने 51.50 के औसत से 412 रन जड़े थे। ये सिलसिला 2017 की चैंपियंस ट्ऱॉफी में भी जारी रहा। उन्होंने 5 मैच में 67.60 के औसत से 338 रन बनाए। 2019 के विश्व कप में उनका बल्ला खामोश रहा। 7 मैच में 10.57 के औसत से वो 74 रन बना सके। चार बार वो दो अंक के आंकड़े को नहीं छू सके और 30 उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर रहा। इसके बाद से उनके करियर की कहानी बदल गई और आज टीम के दरवाजे बंद होने की नौबत आ गई है।
