स्पोर्ट्स

अभिनव बिंद्रा का बेबाक बयान, ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत है जो खुद के काम, दिए गए सुझाव, व्यवस्थाओं पर सवाल उठाएं

Abhinav Bindra Statement: भारत के शूटिंग में व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने वाले भारत के महान निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने एक बेबाक बयान दिया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि अब ऐसे एथलीटों की जरूरत है जो हर मुद्दे पर सवाल उठाने का दम रखें।

Image

अभिनव बिंद्रा (PTI)

भारत के महान निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने शुक्रवार को कहा कि देश को ऐसे एथलीटों की जरूरत है जो अपने खुद के काम, उन्हें सुझाए गए तरीकों और 'जिन व्यवस्थाओं के भीतर वे काम करते हैं', उन पर सवाल उठा सकें। खुलकर अपनी बात रखना बहुत जरूरी है, भले ही कुछ लोग इसे 'अनुशासनहीनता' मान लें।

पूर्व राइफल शूटर, जो 2008 में व्यक्तिगत ओलंपिक स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने थे, ने कहा कि उनकी सफलता के पीछे मुख्य रूप से उनकी जिज्ञासु प्रवृत्ति और सवाल पूछने की क्षमता थी। उन्होंने 'X' पर लिखा, "अपने पूरे खेल करियर के दौरान, मैंने अपने कोचों से सवाल पूछे, विचारों को चुनौती दी और हमेशा जिज्ञासु बना रहा। ऐसा इसलिए नहीं था कि मुझमें सम्मान की कमी थी, बल्कि इसलिए था क्योंकि मैं चीजों को समझना, सीखना और बेहतर बनना चाहता था।" उन्होंने यह नहीं बताया कि उन्होंने एथलीटों को यह सलाह किस संदर्भ में दी है।

उन्होंने आगे कहा, "मुझे इस बात की चिंता है कि जब एथलीटों को लगता है कि वे खुलकर अपनी बात नहीं कह सकते, तो समय के साथ कुछ और भी गंभीर समस्या पैदा हो जाती है। वे धीरे-धीरे अपने मन में भी सवाल पूछना बंद कर देते हैं। और जब ऐसा होता है, तो हम खेल में उत्कृष्टता के लिए जरूरी एक अहम चीज खो देते हैं।"

बिंद्रा ने कहा कि भारत को ऐसे एथलीटों की जरूरत है जो खुद से और अपने आसपास की व्यवस्था से सवाल पूछें। उन्होंने समझाया, "हमें ऐसे एथलीटों की जरूरत है जो अपने काम, अपने कोचों, उन्हें बताए गए तरीकों और जिन व्यवस्थाओं के तहत वे काम करते हैं, उन पर सवाल उठाएं। ऐसा विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि खुद को बेहतर बनाने की सच्ची इच्छा से किया जाना चाहिए।"

44 वर्षीय बिंद्रा ने आगे कहा, "जिसे कुछ लोग अनुशासनहीनता मान सकते हैं, वह असल में विकास के लिए बहुत जरूरी हो सकता है। जो एथलीट सीखने से इनकार करता है और जो एथलीट सवाल पूछना बंद करने से इनकार करता है - इन दोनों में फर्क होता है। खेल जगत को इतना समझदार होना चाहिए कि वह इस फर्क को पहचान सके।"

बिंद्रा को भारत के सबसे महान खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। ओलंपिक चैंपियन होने के अलावा, वह विश्व चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। सक्रिय खेल जीवन से संन्यास लेने के बाद, वह अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) के एथलीट आयोग के उपाध्यक्ष बने। उन्होंने वहां आठ साल तक काम किया, जो इस साल की शुरुआत में पूरा हुआ।

Shivam Awasthi
शिवम अवस्थीauthor

शिवम् अवस्थी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स डेस्क के इंचार्ज हैं। इनको खेल पत्रकारिता में तकरीबन 17 सालों का अनुभव है। इनको क्रिकेट, फुटबॉल और टेनिस में खास रुचि है। उन्हें खेलना भी पसंद है और वो देहरादून में फुटबॉल व क्रिकेट इंटर डिस्ट्रिक्ट चैंपियनशिप में विजेता टीम के कप्तान भी रहे। पत्रकारिता में कदम रखने के कुछ समय बाद कॉमनवेल्थ गेम्स 2010 का संपूर्ण फील्ड कवरेज किया और कई ब्रेकिंग न्यूज दी। कई चर्चित भारतीय एथलीटों के इंटरव्यू लिए हैं। 2011 वनडे क्रिकेट वर्ल्ड कप का ऑनफील्ड रहकर शहर-शहर घूमते हुए पूरा टीवी कवरेज किया। विश्व कप से पहले युवा विराट कोहली का इंटरव्यू किया। डिजिटल जैसे-जैसे आगे बढ़ा उन्हें ब्रेट ली, सुनील गावस्कर, राहुल द्रविड़, जैसे तमाम धुरंधरों के साक्षात्कार किए और 16 वर्षीय ऋषभ पंत का पहला डिजिटल इंटरव्यू किया जिसे इंग्लिश और हिंदी वेबसाइट पर काफी रीडरशिप मिली। उन्होंने स्पोर्ट्स मल्टी पॉडकास्ट भी किया। आईपीएल के 18 सीजन से ऑनफील्ड जुड़े रहे। अब तक तकरीबन 6000 से ज्यादा एक्सक्लूसिव स्टोरीज लिख चुके हैं। साल 2025 में खेल जगत के तमाम बड़े रिकॉर्ड्स व आंकड़ों को ट्रैक किया है और उन पर आर्टिकल तैयार किए हैं।

और पढ़ें
End of Article