Tulsi Mata ki Arti: कार्तिक मास हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र माना जाता है और इस दौरान तुलसी माता की पूजा का विशेष महत्व है। कार्तिक महीना हिंदू कैलेंडर का 8वां महीना होता है। तुलसी माता को भगवान विष्णु की प्रिय माना जाता है। इसके साथ ही तुलसी के पौधे में औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। तुलसी माता की पूजा से सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।
तुलसी माता की आरती (pic credit- pexels)
कार्तिक मास में तुलसी पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और भगवान विष्णु का आशीर्वाद मिलता है। इस मास में रोजाना तुलसी माता की आरती करने और उनकी पूजा करने से घर में सकारात्मकता बनी रहती है। दरअसल इसी महीने में भगवान विष्णु के स्वरूप शालिग्राम और माता तुलसी का विवाह हुआ था। इस कारण कार्तिक माह में तुलसी माता की डेली पूजा और आरती करनी चाहिए। वैसे तो तुलसी माता दो आरती प्रचलित है। आज दोनों या किसी भी एक से आरती कर सकते हैं।
तुलसी महारानी नमो-नमो आरती
तुलसी महारानी नमो-नमो,
हरि की पटरानी नमो-नमो ।
धन तुलसी पूरण तप कीनो,
शालिग्राम बनी पटरानी ।
जाके पत्र मंजरी कोमल,
श्रीपति कमल चरण लपटानी ॥
तुलसी महारानी नमो-नमो,
हरि की पटरानी नमो-नमो ।
धूप-दीप-नवैद्य आरती,
पुष्पन की वर्षा बरसानी ।
छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन,
बिन तुलसी हरि एक ना मानी ॥
तुलसी महारानी नमो-नमो,
हरि की पटरानी नमो-नमो ।
सभी सखी मैया तेरो यश गावें,
भक्तिदान दीजै महारानी ।
नमो-नमो तुलसी महारानी,
तुलसी महारानी नमो-नमो ॥
तुलसी महारानी नमो-नमो,
हरि की पटरानी नमो-नमो ।
जय-जय तुलसी माता आरती
जय जय तुलसी माता,
मैया जय तुलसी माता ।
सब जग की सुख दाता,
सबकी वर माता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
सब योगों से ऊपर,
सब रोगों से ऊपर ।
रज से रक्ष करके,
सबकी भव त्राता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
बटु पुत्री है श्यामा,
सूर बल्ली है ग्राम्या ।
विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे,
सो नर तर जाता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
हरि के शीश विराजत,
त्रिभुवन से हो वंदित ।
पतित जनों की तारिणी,
तुम हो विख्याता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
लेकर जन्म विजन में,
आई दिव्य भवन में ।
मानव लोक तुम्हीं से,
सुख-संपति पाता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
हरि को तुम अति प्यारी,
श्याम वर्ण सुकुमारी ।
प्रेम अजब है उनका,
तुमसे कैसा नाता ॥
हमारी विपद हरो तुम,
कृपा करो माता ॥
॥ जय तुलसी माता...॥
जय जय तुलसी माता,
मैया जय तुलसी माता ।
सब जग की सुख दाता,
सबकी वर माता ॥
पूजा विधि
तुलसी माता की पूजा कार्तिक मास में विशेष रूप से सायंकाल में की जाती है। सबसे पहले तुलसी के पौधे के आसपास के स्थान को स्वच्छ करें और गंगाजल छिड़कें। तुलसी के पौधे को जल से स्नान कराएं और रोली, चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद तुलसी के सामने घी का दीपक और धूप जलाएं। तुलसी को नैवेद्य के रूप में मिश्री या फल अर्पित करें। अब भक्ति भाव से आरती गाएं। आरती के बाद तुलसी माता की परिक्रमा 7 या 11 बार कर प्रणाम करें। यह पूजा रोजाना करने से तुलसी माता की कृपा प्राप्त होती है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
