Sakat Chauth 2026: माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ का पर्व मनाया जाता है मान्यता है कि सकट माता की पूजा करने से बच्चों पर आने वाले सभी संकट दूर हो जाते हैं। सकट चौथ के दिन सकट माता के साथ ही भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है। इस व्रत को महिलाएं अपने बच्चों की सुख और समृद्धि के लिए रखती हैं। आइए जानते हैं कि सकट माता कौन हैं और उनका मंदिर कहां स्थित है।
कहां है सकट माता मंदिर
कौन हैं सकट माता और कहां है इनका मंदिर?
सकट माता और कोई नहीं बल्कि चौथ माता ही हैं। चौथ माता को मां दुर्गा का ही स्वरूप माना जाता है। राजस्थान के कई जिलों में चौथ माता का मंदिर स्थापित है। सकट चौथ के दिन माता के मंदिर में लाखों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। सकट माता को बच्चों की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। इसी कारण महिलाएं माघ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को अपने बच्चों की दीर्घायु और सुख, सौभाग्य के लिए व्रत रखती हैं। इस पर्व को तिलकुटा चौथ, माघी चौथ और संकट चौथ आदि अन्य नामों से भी जाना जाता है।
माता ने की थी वृद्धा के बेटे की रक्षा
पुरानी कथाओं के अनुसार, सकट माता देवी दुर्गा का ही रूप हैं। एक कहानी में एक बूढ़ी मां सकट माता की बड़ी भक्त थी। राजा के आदेश से उसके इकलौते बेटे को भट्टी में बलि देना था। वह दिन सकट चौथ का था। मां ने सकट माता से प्रार्थना की और बेटे को सकट की सुपारी और दूब का बीड़ा दिया। माता की कृपा से एक ही रात में भट्टी पक गई और बेटा सुरक्षित बाहर आ गया। पहले बलि दिए गए सभी बच्चे भी जीवित हो गए। तब से सकट माता की पूजा संतान की रक्षा के लिए की जाती है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
