अशांत मन और थका हुआ शरीर नहीं दे सकता सुकून, सद्गुरु से जानें जीवन जीने का असली मंत्र

कई बार हम अपनी सेहत और मानसिक शांति को नजरअंदाज करके लगातार काम करते रहते हैं। हम तब तक नहीं रुकते जब तक कि पूरी तरह थककर चूर न हो जाएं।

भागदौड़ भरी इस आधुनिक जिंदगी में हम सब सफलता, करियर और बाहरी जिम्मेदारियों के पीछे इतनी तेजी से भागते हैं कि खुद के लिए समय निकालना ही भूल जाते हैं। सुबह उठने से लेकर रात के बिस्तर पर जाने तक हमारा दिमाग भविष्य की चिंता या काम के तनाव में उलझा रहता है। ऐसे में मशहूर आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने जीवन के सबसे बड़े सच से पर्दा उठाया है। उनका कहना है कि जीवन में सबसे जरूरी चीज है- संतुलन। अगर यह संतुलन बिगड़ जाए, तो आपका अपना ही शरीर और मन आपके खिलाफ काम करने लगते हैं।

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अशांत मन और थका हुआ शरीर नहीं दे सकता सुकून, सद्गुरु से जानें जीवन जीने का असली मंत्र (Photo: Sadhguru/X)

क्यों जरूरी है आंतरिक संतुलन?

सद्गुरु के अनुसार, हम बाहरी परिस्थितियों या हर घटना को अपनी मर्जी से नियंत्रित नहीं कर सकते। दुनिया में चीजें अपने हिसाब से चलती रहती हैं, लेकिन हम यह सीख सकते हैं कि किसी भी परिस्थिति में रुककर, सोच-समझकर और शांत रहकर कैसे प्रतिक्रिया दी जाए। जब हमारे भीतर मानसिक और शारीरिक संतुलन नहीं होता, तो छोटी-छोटी मुश्किलें भी हमें अंदर से तोड़ देती हैं और हर तनाव हमारे मूड को कंट्रोल करने लगता है।

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