Navratri Havan Vidhi (नवरात्रि पर खुद से हवन कैसे करें) Navratri Havan Mantra: चैत्र नवरात्रि पर हवन करना बहुत शुभ माना जाता है। इस दिन विधि-विधान से हवन करने पर मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर का वातावरण शुद्ध होता है। अगर आप घर पर बिना पंडित के हवन करना चाहते हैं, तो सही समय, सामग्री और मंत्रों का सही क्रम जानना जरूरी है। अगर आपके यहां सप्तमी का पूजन होता है तो आप अष्टमी के दिन और अगर अष्टमी पूजन होता है तो आप नवमी के दिन हवन कर सकते हैं। आइए जानते हैं कि नवरात्रि हवन की सही विधि क्या है।
नवरात्रि हवन के मंत्र और विधि
नवरात्रि हवन की सामग्री (Navratri Havan samagri)
हवन के लिए हवन कुंड, आम की लकड़ी या समिधा, कंडे (उपले), शुद्ध गाय का घी, जौ, तिल, नवधान्य से बनी हवन सामग्री, कपूर, गंगाजल, रोली, चावल (अक्षत), जनेऊ, नारियल (सूखा गोला), सुपारी, पान के पत्ते, लौंग, इलायची, गुड़, मिश्री, शहद, आम या पीपल के पत्ते, धूप, अगरबत्ती, फूल, माला, चंदन, कलावा (मौली), लाल कपड़ा, फल और जल से भरा कलश आदि सामग्री एकत्र करें। ये सभी चीजें हवन को पूर्ण और विधि अनुसार करने के लिए जरूरी मानी जाती हैं।
नवरात्रि हवन की पूरी विधि (Navratri Havan Ki Puri vidhi)
सबसे पहले हवन स्थान को साफ करें और गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें। हवन कुंड स्थापित करें और पास में जल से भरा कलश रखें। कुंड में लकड़ी और कंडे रखकर कपूर से अग्नि प्रज्वलित करें। अग्नि प्रज्वलित होने के बाद उसमें थोड़ा-थोड़ा घी डालें।
अगर दो लोग हवन कर रहे हों तो एक व्यक्ति मंत्र बोलते हुए हवन सामग्री डाले और दूसरा व्यक्ति हर आहुति के साथ घी अर्पित करे। इससे हवन विधि व्यवस्थित तरीके से पूरी होती है।
संकल्प मंत्र
दाएं हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर ये मंत्र पढ़ते हुए जमीन पर छोड़ें।'मम सर्वपापक्षय पूर्वक सर्वकामना सिद्ध्यर्थं, श्री दुर्गा प्रीत्यर्थं, अहं हवनं करिष्ये।'
इसके साथ अपना नाम, गोत्र और स्थान बोलें।
प्रारंभिक 5 आहुति शुद्ध घी से
सबसे पहले शुद्ध देसी घी से 5 आहुति दें।
ॐ प्रजापतये स्वाहा।
ॐ इन्द्राय स्वाहा।
ॐ अग्नये स्वाहा।
ॐ सोमाय स्वाहा।
ॐ भूः स्वाहा।
नवग्रह मंत्र से आहुति
ऊँ सूर्याय नमः स्वाहा
ऊँ चंद्रयसे स्वाहा
ऊं भौमाय नमः स्वाहा
ऊँ बुधाय नमः स्वाहा
ऊँ गुरवे नमः स्वाहा
ऊँ शुक्राय नमः स्वाहा
ऊँ शनये नमः स्वाहा
ऊँ राहवे नमः स्वाहा
ऊँ केतवे नमः स्वाहा
गायत्री मंत्र से 21 बार आहुति
ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्। स्वाहा (इदं गायत्री इदं नमः)
देवताओं के मंत्र से आहुति
ॐ गणेशाय नम: स्वाहा।
ॐ गौरियाय नम: स्वाहा।
ॐ नवग्रहाय नम: स्वाहा।
ॐ दुर्गाय नम: स्वाहा।
ॐ महाकालिकाय नम: स्वाहा।
ॐ हनुमते नम: स्वाहा।
ॐ भैरवाय नम: स्वाहा।
ॐ कुल देवताय नम: स्वाहा।
ॐ स्थान देवताय नम: स्वाहा।
ॐ ब्रह्माय नम: स्वाहा।
ॐ विष्णुवे नम: स्वाहा।
ॐ शिवाय नम: स्वाहा।
नवदुर्गा हवन मंत्र
ॐ दुर्गा देवी नमः स्वाहा
ॐ शैलपुत्री देवी नमः स्वाहा
ॐ ब्रह्मचारिणी देवी नमः स्वाहा
ॐ चंद्रघंटा देवी नमः स्वाहा
ॐ कूष्मांडा देवी नमः स्वाहा
ॐ स्कन्द देवी नमः स्वाहा
ॐ कात्यायनी देवी नमः स्वाहा
ॐ कालरात्रि देवी नमः स्वाहा
ॐ महागौरी देवी नमः स्वाहा
ॐ सिद्धिदात्री देवी नमः स्वाहा
विशेष स्तुति मंत्र
ॐ जयंती मंगलाकाली भद्रकाली कपालिनी दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा, स्वधा नमस्तुते स्वाहा।
ॐ ब्रह्मामुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि: भूमि सुतो बुधश्च: गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतो सर्वे ग्रहा शांति कर: भवंतु स्वाहा।
ॐ गुरुर्ब्रह्मा, गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवा महेश्वर: गुरु साक्षात् परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: स्वाहा।
महामृत्युंजय मंत्र से 11 आहुति
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्। स्वाहा
अंतिम प्रार्थना मंत्र
ॐ शरणागत दीनार्त परित्राण परायणे, सर्व स्यार्ति हरे देवि नारायणी नमस्तुते। स्वाहा।
बीज मंत्र से 108 आहुति
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै। स्वाहा
देवी सूक्त के मंत्र (पूर्ण रूप में आहुति सहित)
या देवी सर्वभूतेषु विष्णुमायेति शब्दिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु निद्रारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु क्षुधारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु छायारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु तृष्णारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु क्षान्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु जातिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु वृत्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु स्मृतिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
या देवी सर्वभूतेषु भ्रान्तिरूपेण संस्थिता । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
इन्द्रियाणामधिष्ठात्री भूतानां चाखिलेषु या । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
चितिरूपेण या कृत्स्नमेतद् व्याप्य स्थिता जगत् । नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ स्वाहा
स्तुता सुरैः पूर्वमभीष्टसंश्रया तथा सुरेन्द्रेण दिनेषु सेविता ।
करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः॥ स्वाहा
या साम्प्रतं चोद्धतदैत्यतापितै रस्माभिरीशा च सुरैर्नमस्यते ।
या च स्मृता तत्क्षणमेव हन्ति नः सर्वापदो भक्तिविनम्रमूर्तिभिः॥ स्वाहा
इस प्रकार से दें पूर्णाहुति
हवन के अंत में एक सूखा नारियल लें, उस पर कलावा बांधें। ऊपर का भाग काटकर उसमें घी, पान, सुपारी, लौंग, जायफल, प्रसाद और बची हुई हवन सामग्री भरें। फिर इसे हवन कुंड की अग्नि के बीच रखें।
पूर्णाहुति मंत्र
ॐ पूर्णमद: पूर्णम् इदम् पूर्णात् पूर्णादिमं उच्यते,
पूर्णस्य पूर्णमादाय पूर्णमेवावशिष्यते।।
समापन
पूर्णाहुति के बाद परिवार सहित आरती करें, माता से क्षमा याचना करें और हवन संपन्न करें।
हवन के लिए सही समय
26 मार्च 2026 को अष्टमी तिथि सुबह 11 बजकर 48 मिनट तक है, लेकिन इस समय तक अग्निवास पाताल में माना गया है, इसलिए हवन अष्टमी पर सुबह 11:48 के बाद करना उचित रहेगा। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाती है, जो 27 मार्च सुबह 10 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। इस दौरान अग्निवास पृथ्वी पर रहता है, इसलिए नवमी पर सुबह से लेकर 10:06 बजे तक हवन करना सबसे शुभ माना जा रहा है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
