Navratri Havan Mantra (नवरात्रि के हवन की विधि और मंत्र): नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा की आराधना का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है। खासतौर पर अष्टमी और नवमी तिथि पर हवन करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। मान्यता है कि विधि-विधान से किया गया हवन मां को प्रसन्न करता है और भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि नवरात्रि के समापन पर हवन का विशेष महत्व बताया गया है।
नवरात्रि हवन मंत्र (Photo - AI)
नवरात्रि का हवन करने के लिए सबसे पहले एक हवन कुंड होना आवश्यक है। इसके साथ हवन सामग्री (Havan Samagri) में आम की लकड़ियां, शुद्ध घी, कपूर, रोली, चावल और पूजा से जुड़ी अन्य सामग्री रखें। हवन के दौरान स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
नवरात्रि हवन के मंत्र - Navratri Havan Mantra
हवन की हवन की शुरुआत पांच प्रमुख देवताओं को समर्पित मंत्रों से की जाती है। इन मंत्रों के साथ पांच बार घी की आहुति दी जाती है।
- ॐ प्रजापतये स्वाहा
- ॐ इन्द्राय स्वाहा
- ॐ अग्नये स्वाहा
- ॐ सोमाय स्वाहा
- ॐ भूः स्वाहा
ध्यान रहे यदि 1 से अधिक लोग हवन में शामिल हैं, तो सामग्री बाकी सब चढ़ा सकते हैं, लेकिन घी की आहुति केवल एक ही व्यक्ति को देनी चाहिए।
नवरात्रि हवन के अन्य मंत्र
- ऊँ सूर्याय नमः स्वाहा
- ऊँ चंद्रयसे स्वाहा
- ऊं भौमाय नमः स्वाहा
- ऊँ बुधाय नमः स्वाहा
- ऊँ गुरवे नमः स्वाहा
- ऊँ शुक्राय नमः स्वाहा
- ऊँ शनये नमः स्वाहा
- ऊँ राहवे नमः स्वाहा
- ऊँ केतवे नमः स्वाहा
माता के बीज मंत्र से 108 बार आहुतियां दें। “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। स्वाहा” माता का बीज मंत्र इस प्रकार है।
महामृत्युंजय मंत्र से दें आहुति दें
“ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिंम् पुष्टिवर्धनम्/ उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् मृत्युन्जाय नम: स्वाहा।” मंत्र से भी नवरात्रि हवन में 11 आहुति दी जाती हैं। ये आहुतियां आपको आरोग्य का वरदान देने के साथ-साथ अकाल मृत्यु के भय से भी मुक्त करती हैं।
हवन के अंत में कौन सा मंत्र बोले
पूर्णाहुति मंत्र : ऊँ पूर्णमद: पूर्णम् इदम् पूर्णात पूर्णादिमं उच्यते, पुणस्य पूर्णम् उदच्यते। पूर्णस्य पूर्णभादाय पूर्णमेवावाशिष्यते।।
इस मंत्र के साथ आप अपने नवरात्रि हवन को पूर्ण कर सकते हैं।
