Narak Chaturdashi Abhyang Snan Muhurat Today 2026: देशभर में कल 7 नवंबर को धूमधाम से छोटी दिवाली का पर्व मनाया गया, जिसके बाद आज 8 नवंबर 2026 को दिवाली का महापर्व मनाया जा रहा है। आज पटाखे और दीपक जलाने के साथ-साथ लक्ष्मी-गणेश जी की विशेष रूप से पूजा की जाएगी। साथ ही नरक चतुर्दशी का अभ्यंग स्नान होगा। पौराणिक शास्त्रों में बताया गया है कि नरकासुर का वध करने के बाद सबसे पहले भगवान कृष्ण ने अभ्यंग स्नान किया था, जिसके बाद से यह परंपरा देशभर में प्रचलित हो गई। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अभ्यंग स्नान करने से व्यक्ति तन और मन दोनों से शुद्ध होता है। साथ ही नकारात्मक ऊर्जा, खराब सेहत, नजर दोष और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। यदि आप भी आज अभ्यंग स्नान करने वाले हैं तो यहां से उसके शुभ मुहूर्त, विधि, मंत्र और नियमों के बारे में जान सकते हैं।
अभ्यंग स्नान का समय क्या है आज (photo credit- ai gemini)
नरक चतुर्दशी 2026 की तिथि क्या है
द्रिक पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरक चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। उदया तिथि के कारण साल 2026 में आज 8 नवंबर, रविवार को नरक चतुर्दशी मनाई जा रही है। साथ ही आज खुशियों का पर्व दिवाली या दीपावली भी है। इस बार 7 नवंबर की सुबह 10 बजकर 47 मिनट पर कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का आरंभ हुआ, जो कि आज 8 नवंबर की सुबह 11 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। हालांकि, कुछ क्षेत्रीय परंपराओं में कल 7 नवंबर को छोटी दिवाली यानी काली चौदस का पर्व मनाया गया।
नरक चतुर्दशी अभ्यंग स्नान मुहूर्त
नरक चतुर्दशी के दिन प्रात: काल में सूर्योदय खत्म होने से पहले अभ्यंग स्नान किया जाता है, जिस दौरान कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि का होना जरूरी है। आज 8 नवंबर को सुबह 11 बजकर 27 मिनट तक चतुर्दशी तिथि रहेगी, जबकि सूर्योदय सुबह 06 बजकर 38 मिनट पर होगा। ऐसे में आज अभ्यंग स्नान सुबह 05 बजकर 41 मिनट से सुबह 06 बजकर 38 मिनट के बीच करना शुभ रहेगा।
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अभ्यंग स्नान की विधि
नरक चतुर्दशी के दिन प्रात: काल में शरीर की तेल और उबटन से मालिश की जाती है। मालिश के लिए तिल या सरसों के तेल का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि उबटन को घर पर बेसन, चंदन, हल्दी, मुल्तानी मिट्टी, दूध और गुलाब जल को मिलाकर बनाया जाता है। इस दिन स्नान करने से पहले पूरे शरीर पर तेल और उबटन लगाया जाता है, जिसके बाद गंगाजल वाले पानी से नहाना होता है। नहाने के बाद शुद्ध कपड़े पहनने होते हैं, जिसके पश्चात भगवान कृष्ण, भगवान विष्णु और यमराज जी की पूजा की जाती है।
अभ्यंग स्नान से जुड़े जरूरी नियम
अभ्यंग स्नान शुभ मुहूर्त में खाली पेट ही करना चाहिए, जिससे पहले केवल मल और मूत्र का त्याग किया जाता है। मालिश के पेस्ट को घर पर ही तैयार करें। इस दिन बाल और नाखून काटने से बचें। तेल को सबसे पहले सिर पर लगाएं, जिसके बाद कान, हथेलियों और अंत में पैरों के तलवों पर लगाएं। तेल के बाद इसी तरह उबटन लगाया जाता है। अभ्यंग स्नान के लिए हल्के गुनगुने पानी में गंगाजल जरूर मिलाएं। बता दें कि स्नान करते समय गंगा, यमुना और सरस्वती आदि पवित्र नदियों का स्मरण करना शुभ होता है।
