Maha Shivratri Story: 'केतकी' के छल को समझ गए थे भोलेनाथ, जानें क्या दिया था श्राप?

Maha Shivratri Story (केतकी के फूल भगवान शिव पर क्यों नहीं चढ़ाए जाते): धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव अपने भक्तों की भक्ति को सहर्ष स्वीकार करते हैं, लेकिन कुछ चीजें ऐसी भी हैं जो शिव पूजन में वर्जित मानी जाती हैं। उन्हीं में से एक है केतकी का फूल।

Maha Shivratri Story (केतकी के फूल भगवान शिव पर क्यों नहीं चढ़ाए जाते): पूरे देश में बुधवार को महाशिवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाएगा। यह दिन भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्तजन पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, भांग और विभिन्न प्रकार के फूल अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव अपने भक्तों की भक्ति को सहर्ष स्वीकार करते हैं, लेकिन कुछ चीजें ऐसी भी हैं जो शिव पूजन में वर्जित मानी जाती हैं। उन्हीं में से एक है केतकी का फूल, जिसे शिवलिंग पर अर्पित करना निषेध माना जाता है। इस फूल से जुड़ी एक पौराणिक कथा है, जिसमें भगवान शिव ने इस फूल को अपने पूजन में निषेध घोषित किया था।

Maha Shivratri Story In Hindi

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Maha Shivratri Story

शिव पुराण के अनुसार, एक समय भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के बीच श्रेष्ठता को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया। दोनों ही देवता स्वयं को सबसे महान साबित करने में लगे थे। इस विवाद को सुलझाने के लिए भगवान शिव एक विशाल अग्निस्तंभ के रूप में प्रकट हुए, जिसे ज्योतिर्लिंग कहा गया। यह स्तंभ इतना विशाल और दिव्य था कि इसका कोई आदि दिखाई दे रहा था और न ही कोई अंत। भगवान शिव ने ब्रह्मा और विष्णु से कहा कि जो इस ज्योतिर्लिंग का आदि या अंत खोजकर आएगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा।

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