दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा जानें कहां-कहां दिखाई दिया करवा चौथ का चांद
Karwa Chauth 2023 Puja Time (करवा चौथ 2023 पूजा मुहूर्त)
-करवा चौथ व्रत 1 नवंबर 2023, बुधवार को रखा जाएगा।
-करवा चौथ व्रत पूजा का मुहूर्त शाम 05:29 से 06:45 बजे तक रहेगा।
-करवा चौथ व्रत समय शाम 06:13 से 08:14 तक रहेगा।
-करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय रात 08:14 पर होगा।
-चतुर्थी तिथि का प्रारम्भ 31 अक्टूबर 2023 को रात 09:30 बजे होगा।
-चतुर्थी तिथि की समाप्ति 01 नवंबर 2023 को रात 09:19 बजे होगी।
Karwa Chauth Vrat Vidhi (करवा चौथ व्रत विधि)
-सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाएं और स्नान कर लें। इसके बाद पूजा घर की सफ़ाई करें।
-फिर सूरज निकलने से पहले ही सांस द्वारा दिया हुआ भोजन करें और भगवान की पूजा करके निर्जला व्रत का संकल्प लें।
-यह व्रत सुबह सूर्योदय से लेकर रात में चंद्रमा के दर्शन करने तक रखा जाता है।
-शाम में शुभ मुहूर्त में विधि विधान पूजा करके करवा चौथ की कथा सुनी जाती है।
-फिर रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।
-इस व्रत में पानी चांद को अर्घ्य देने के बाद ही ग्रहण किया जाता है।
Karwa Chauth Sargi (करवा चौथ सरगी)
करवा चौथ का व्रत सुबह सरगी के साथ शुरू होता है। जो महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं उनकी सास उनके लिए सरगी बनाती हैं। लेकिन जिन महिलाओं की सास साथ नहीं होती हैं वो खुद ही अपने लिए सरगी बनाती हैं। सरगी की थाल में मिठाई, मठरी, मेवे, फल, कपड़े, गहने, पूरी व सेवई होती है। सरगी में दी गई खाने वाली चीजों को ग्रहण करके ही महिला अपना व्रत शुरू करती है। फिर शाम को सभी महिलाएं श्रृंगार करके एकत्रित होती हैं और फेरी की रस्म निभाती हैं। इस रस्म में महिलाएं पूजा की थाली को एक दूसरे को देकर घुमाती हैं। इस रस्म के दौरान एक बुज़ुर्ग महिला करवा चौथ की कथा सुनाती है।
Karwa Chauth Chand Time 2023: करवा चौथ चांद समय
- पुणे में करवा चौथ का चांद रात 08:56 पर दिखाई देगा।
- सूरत (गुजरात) में करवा चौथ का चांद रात 08:54 पर दिखाई देगा।
- कानपुर में करवा चौथ का चांद रात 08:15 पर दिखाई देगा।
- नागपुर में करवा चौथ का चांद रात 08:28 पर दिखाई देगा।
- लखनऊ में करवा चौथ का चांद रात 08:05 पर दिखाई देगा।
- पटना में करवा चौथ का चांद रात 08:51 पर दिखाई देगा।
- गाजियाबाद में करवा चौथ का चांद रात 08:14 पर दिखाई देगा।
- लुधियाना में करवा चौथ का चांद रात 08:13 पर दिखाई देगा।
- वाराणसी में करवा चौथ का चांद रात 08:00 पर दिखाई देगा।
- श्रीनगर में करवा चौथ का चांद रात 08:07 पर दिखाई देगा।
- अलीगढ़ में करवा चौथ का चांद रात 08:13 पर दिखाई देगा।
- गुरुग्राम में करवा चौथ का चांद रात 08:16 पर दिखाई देगा।
- जालंधर में करवा चौथ का चांद रात 08:13 पर दिखाई देगा।
Karwa Chauth Moon Time In Patna: पटना में कब दिखेगा करवा चौथ का चांद
पटना में करवा चौथ का चांद निकल चुका है। यहां की महिलाएं अपना व्रत पारण कर सकती हैं।करवा चौथ चांद पूजा विधि ( Karwa Chauth Chand Puja Vidhi)
करवा चौथ के दिन चांद निकलने के साथ पहले उसे छलनी से देखना चाहिए। छलनी में चांद देखते समय उसमे एक दीपक जरूर रखें। करवा चौथ के दिन शाम को कथा पूजा करने के बाद चांदी के सिक्के और अक्षत, शक्कर दूध कलश में डालकर चंद्रमा को अर्घ्य दें। अर्घ्य देने के बाद ही करवा चौथ की पूजा सफल मानी जाती है।Chandra Dev Aarti (चंद्र देव की आरती)
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।
रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।
दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी ।
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि ।
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा ।
वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी ।
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी ।
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी ।
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे ।
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी ।
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें ।
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
करवा चौथ पर चांद निकलने का समय
करवा चौथ पर चांद रात साढ़े आठ बजे के बाद दिखाई देगा।करवा चौथ का चांद कितने बजे निकलेगा
जयपुर में करवा चौथ का चांद रात 08:26 पर दिखाई देगा।पुणे में करवा चौथ का चांद रात 08:56 पर दिखाई देगा।
सूरत (गुजरात) में करवा चौथ का चांद रात 08:54 पर दिखाई देगा।
कानपुर में करवा चौथ का चांद रात 08:15 पर दिखाई देगा।
नागपुर में करवा चौथ का चांद रात 08:28 पर दिखाई देगा।
Karwa Chauth 2023 Chandra Darshan Time: करवा चौथ चांद देखने का समय
नई दिल्ली में करवा चौथ का चांद रात 08:15 पर दिखाई देगा।मुंबई में करवा चौथ का चांद रात 08:59 पर दिखाई देगा।
नोएडा में करवा चौथ का चांद रात 08:14 पर दिखाई देगा।
मेरठ में करवा चौथ का चांद रात 08:12 पर दिखाई देगा।
जम्मू में करवा चौथ का चांद रात 08:12 पर दिखाई देगा।
चंडीगढ़ में करवा चौथ का चांद रात 08:10 पर दिखाई देगा।
Karwa CHauth Mantra: करवा चौथ मंत्र
श्रीगणेश का मंत्र - ॐ गणेशाय नमःशिव का मंत्र - ॐ नमः शिवायपार्वतीजी का मंत्र - ॐ शिवायै नमःस्वामी कार्तिकेय का मंत्र - ॐ षण्मुखाय नमःचंद्रमा का पूजन मंत्र - ॐ सोमाय नमः'मम सुख सौभाग्य पुत्र-पौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।''नमस्त्यै शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभा। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।'Karwa Chauth Vrat Katha In Hindi ( करवा चौथ व्रत कथा)
एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा। इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही मैं आज भोजन करूंगी।साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुख हुआ। साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं। साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग करने के कारण विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया। साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया। इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।why do we celebrate karva chauth ( करवा चौथ क्यों मनाया जाता है)
पौराणिक काल से यह मान्यता चली आ रही है कि पतिव्रता सती सावित्री के पति सत्यवान को लेने जब यमराज धरती पर आए तो सत्यवान की पत्नी ने यमराज से अपने पति के प्राण वापस मांगने की प्रार्थना की। उसने यमराज से कहा कि वह उसके सुहाग को वापस लौटा दें। मगर यमराज ने उसकी बात नहीं मानी। इस पर सावित्री अन्न जल त्यागकर अपने पति के मृत शरीर के पास बैठकर विलाप करने लगी। काफी समयि तक सावित्री के हठ को देखकर यमराज को उस पर दया आ गई। यमराज ने उससे वर मांगने को कहा। इस पर सावित्री ने कई बच्चों की मां बनने का वर मांग लिया। सावित्री पतिव्रता नारी था और अपने पति के अलावा किसी के बारे में सोच भी नहीं सकती थी तो यमराज को भी उसके आगे झुकना पड़ा और सत्यवान को जीवित कर दिया। तभी से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए महिलाएं सावित्री का अनुसरण करते हुए निर्जला व्रत करती हैं।Ganesh Ji ke Kahani ( करवा चौथ गणेश जी की कहानी)
एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा. रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा। इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही मैं आज भोजन करूंगी.साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुख हुआ। साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं। साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग करने के कारण विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया। साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया. इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उस पर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।Karwa Chauth 2023 Puja Time ( करवा चौथ पूजा टाइम)
पंचांग के अनुसार, करवा चौथ व्रत 01 नवंबर को प्रातः 06: 33 मिनट से आरंभ होकर चंद्रोदय तक रखा जाएगा। व्रत की कुल अवधि 13 घंटे 42 मिनट की है। ध्यान रहे कि करवा चौथ का व्रत चंद्रदर्शन के बाद उन्हें अर्घ्य देने के बाद ही पारण किया जाता है।करवा चौथ के दिन क्या करें What to do on Karva Chauth
करवा चौथ पर 16 श्रृंगार करें और हाथों में मेहंदी लगाएं। ऐसा माना जाता है कि जो विवाहित महिलाएं करवा चौथ पर 16 आभूषण पहनकर चौथ माता की पूजा करती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद जरूर मिलता है।करवा चौथ के दिन लाल वस्त्र अवश्य पहनें। करवा चौथ के दिन चौथ माता की पूजा, कथा, आरती, चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने के बाद अपने पति के हाथों से पानी पीकर अपना व्रत खोलें।करवा चौथ पूजा विधि ( Karva Chauth Puja Vidhi)
करवा चौथ की पूजा के लिए पूजा के स्थान पर सही दिशा देखकर करवा माता की तस्वीर दीवार पर लगा लें। फिर पूजा की थाली तैयार कर लें। पूजा के शुभ मुहूर्त में अपनी सास या फिर जेठानी या फिर किसी अन्य पूज्य महिला से करवा चौथ की व्रत कथा सुनें। कथा सुनते वक्त थाली में जल से भरा लोटा और मिट्टी के करवे में जल भरकर उसे ढक्कन सहित रख लें। इसके अलावा थाली में रोली, गेहूं, धूप, दीपक, सींक आदि सब रख लें। कथा सुनने के बाद 7 बार करवे की अदला-बदली करें। उसके बाद इस जल से भरे करवे को रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए रख लें। फिर चंद्रमा के निकलने के बाद दीपक जलाकर पूजा करें और आरती उतारे। छलनी से चंद्रमा के दर्शन करने के बाद पति का चेहरा देखकर अपना व्रत खोलें। उसके बाद घर के सभी बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर भोजन करें।Karwa Chauth 2023 Puja Vidhi For Unmarried Girl :कुंवारी लड़कियों के लिए करवा चौथ पूजा विधि
करवा चौथ की पूजा के लिए पूजा के स्थान पर सही दिशा देखकर करवा माता की तस्वीर दीवार पर लगा लें। फिर पूजा की थाली तैयार कर लें। पूजा के शुभ मुहूर्त में अपनी सास या फिर जेठानी या फिर किसी अन्य पूज्य महिला से करवा चौथ की व्रत कथा सुनें। कथा सुनते वक्त थाली में जल से भरा लोटा और मिट्टी के करवे में जल भरकर उसे ढक्कन सहित रख लें। इसके अलावा थाली में रोली, गेहूं, धूप, दीपक, सींक आदि सब रख लें। कथा सुनने के बाद 7 बार करवे की अदला-बदली करें। उसके बाद इस जल से भरे करवे को रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए रख लें। फिर चंद्रमा के निकलने के बाद दीपक जलाकर पूजा करें और आरती उतारे। छलनी से चंद्रमा के दर्शन करने के बाद पति का चेहरा देखकर अपना व्रत खोलें। उसके बाद घर के सभी बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर भोजन करें।Karwa Chauth Vrat Katha In Hindi ( करवा चौथ व्रत कथा)
एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा। इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही मैं आज भोजन करूंगी।साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुख हुआ। साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं। साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग करने के कारण विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया। साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया। इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।Karwa CHauth Mantra: करवा चौथ मंत्र
श्रीगणेश का मंत्र - ॐ गणेशाय नमःशिव का मंत्र - ॐ नमः शिवायपार्वतीजी का मंत्र - ॐ शिवायै नमःस्वामी कार्तिकेय का मंत्र - ॐ षण्मुखाय नमःचंद्रमा का पूजन मंत्र - ॐ सोमाय नमः'मम सुख सौभाग्य पुत्र-पौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।''नमस्त्यै शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभा। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे।'करवा चौथ पूजा विधि ( Karva Chauth Puja Vidhi)
करवा चौथ की पूजा के लिए पूजा के स्थान पर सही दिशा देखकर करवा माता की तस्वीर दीवार पर लगा लें। फिर पूजा की थाली तैयार कर लें। पूजा के शुभ मुहूर्त में अपनी सास या फिर जेठानी या फिर किसी अन्य पूज्य महिला से करवा चौथ की व्रत कथा सुनेंकथा सुनते वक्त थाली में जल से भरा लोटा और मिट्टी के करवे में जल भरकर उसे ढक्कन सहित रख लें। इसके अलावा थाली में रोली, गेहूं, धूप, दीपक, सींक आदि सब रख लें। कथा सुनने के बाद 7 बार करवे की अदला-बदली करें। उसके बाद इस जल से भरे करवे को रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए रख लें। फिर चंद्रमा के निकलने के बाद दीपक जलाकर पूजा करें और आरती उतारे। छलनी से चंद्रमा के दर्शन करने के बाद पति का चेहरा देखकर अपना व्रत खोलें। उसके बाद घर के सभी बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर भोजन करें।करवा चौथ पूजा विधि- Karwa Chauth 2023 Pujan Vidhi
सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें, स्नान करने के बाद मंदिर की साफ- सफाई पूजा कर व्रत का संकल्प लें। फिर शाम में सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करते हुए चंद्रमा और करवा माता की पूजा करें। करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा की पूजा की जाती है। पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ की कथा पढ़े। चंद्रमा को अर्घ्य दें छलनी से पहले चंद्रमा को देखें फिर पति को देखें और पति द्वारा पानी पी कर व्रत पूरा करें।करवा चौथ की आरती (Karva Chauth Aarti)
ॐ जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।ॐ जय करवा मैया...सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी।।ॐ जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।दीर्घायु पति होवे , दुख सारे हरती।।ॐ जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे।।ॐ जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे।।ॐ जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया।।करवा चौथ व्रत पूजा सामग्री लिस्ट- Karwa Chauth 2023 Pujan Samagri List
करवा चौथ व्रत की पूजा में कई चीजें लगती हैं, जो ज्यादातर आपकी किचन में मौजूद हैं. और जो चिकन में नहीं मौजूद उन्हें आफ मार्केट से खरीद सकते हैं. चंदन, शहद, अगरबत्ती, पुष्प, कच्चा दूध, शक्कर, शुद्ध घी, दही, मिठाई, गंगाजल, अक्षत (चावल), सिंदूर, मेहंदी, महावर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन, दीपक, रुई, कपूर, गेहूं, शक्कर का बूरा, हल्दी, जल का लोटा, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, चलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ आदि।करवा चौथ पूजा विधि- Karwa Chauth 2023 Pujan Vidhi
सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें, स्नान करने के बाद मंदिर की साफ- सफाई पूजा कर व्रत का संकल्प लें। फिर शाम में सबसे पहले भगवान गणेश का स्मरण करते हुए चंद्रमा और करवा माता की पूजा करें। करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा की पूजा की जाती है। पति की लंबी आयु के लिए करवा चौथ की कथा पढ़े। चंद्रमा को अर्घ्य दें छलनी से पहले चंद्रमा को देखें फिर पति को देखें और पति द्वारा पानी पी कर व्रत पूरा करें।16 Shringar list for Karva chauth: सोलह श्रृंगार लिस्ट
बिंदीकाजललिपिस्टिकसिंदूरगजराआलतामेहंदीलाल साड़ीमांगटीकालाल चूड़ीबिछियापायलकमरबंदमंगलसूत्रनेलपेंटकान की बालीKarva Chauth 2023 Puja Time In Ghaziabad: गाजियाबाद करवा चौथ पूजा समय
गाजियाबाद में 05:34 PM से 06:53 PM तककरवा चौथ का व्रत कैसे रखते हैं ( Karva Chauth ka Vrat Kaise Rakhte Hain)
करवा चौथ की पूजा के लिए घर के उत्तर-पूर्व दिशा के कोने को अच्छे से साफ करके, लकड़ी का पाटा बिछाकर उस पर शिवजी, मां गौरी और गणेश जी की प्रतिमा, तस्वीर या चित्र स्थापित कर दें। बाजार में करवा चौथ की पूजा के लिए कैलेंडर भी मिलते हैं, जिस पर सभी देवी-देवताओं के चित्र बने होते हैं। इस प्रकार देवी- देवताओं की स्थापना करके पाटे की उत्तर दिशा में एक जल से भरा लोटा या कलश स्थापित करें और उसमें थोड़े-से चावल डाल दें। अब उस पर रोली, चावल का टीका लगाकर लोटे पर मौली बांध दें। कुछ लोग कलश के आगे मिट्टी से बनी गौरी जी या सुपारी पर मौली लपेटकर भी रखते हैं। इस प्रकार कलश की स्थापना के बाद मां गौरी की पूजा करनी चाहिए और उन्हें सिंदूर चढ़ाना चाहिए। इस दिन चीनी से बने करवे का भी पूजा में बहुत महत्व होता है। कुछ लोग मिट्टी से बना करवा भी रख लेते हैं। साथ ही चार पूड़ी और चार लड्डू तीन अलग-अलग जगह लेकर, एक हिस्से को पानी वाले कलश के ऊपर रख दें। दूसरे हिस्से को मिट्टी या चीनी के करवे पर रखें और तीसरे हिस्से को पूजा के समय महिलाएं अपने साड़ी या चुनरी के पल्ले में बांध लें। कुछ जगहों पर पूड़ी और लड्डू के स्थान पर मीठे पुड़े भी चढ़ाए जाते हैं। आप अपनी परंपरा के अनुसार इन सब का चुनाव कर सकते हैं।अब देवी मां के सामने घी का दीपक जलाएं और उनकी कथा पढ़ें। इस प्रकार पूजा के बाद अपनी साड़ी के पल्ले में रखे प्रसाद और करवे पर रखे प्रसाद को अपने बेटे या अपने पति को खिला दें और कलश पर रखे प्रसाद को गाय को खिला दें। बाकी पानी से भरे कलश को पूजा स्थल पर ही रखा रहने दें। रात को चंद्रोदय होने पर इसी लोटे के जल से चंद्रमा को अर्घ्य दें और घर में जो कुछ भी बना हो, उसका भोग लगाएं।Karwa Chauth Vrat Katha In Hindi ( करवा चौथ व्रत कथा)
एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी। एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन कर लेने को कहा। इस पर बहन ने कहा- भाई, अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने पर उसे अर्घ्य देकर ही मैं आज भोजन करूंगी।साहूकार के बेटे अपनी बहन से बहुत प्रेम करते थे, उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेहद दुख हुआ। साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा- देखो बहन, चांद निकल आया है। अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा- देखो, चांद निकल आया है, तुम लोग भी अर्घ्य देकर भोजन कर लो। ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा- बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रूप में तुम्हें दिखा रहे हैं। साहूकार की बेटी अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग करने के कारण विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के कारण उस लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन उसकी बीमारी में लग गया। साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। उसने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की और फिर से विधि-विधान पूर्वक चतुर्थी का व्रत शुरू कर दिया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और तदुपरांत उनसे आशीर्वाद ग्रहण किया। इस प्रकार उस लड़की के श्रद्धा-भक्ति को देखकर एकदंत भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हो गए और उसके पति को जीवनदान प्रदान किया। उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन, संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।करवा चौथ तिथि और शुभ योग ( Karva Chauth Shubh Thithi)
चतुर्थी तिथि का आरंभ - 31 अक्टूबर, रात 9 बजकर 31 मिनट सेचतुर्थी तिथि का समापन - 1 नवंबर, रात 9 बजकर 20 मिनटउदया तिथि को मानते हुए चतुर्थी तिथि 1 नवंबर दिन बुधवार को है इसलिए यह व्रत 1 नवंबर को ही रखा जाएगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, शिव योग और परिघ योग जैसे महायोग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व भी बढ़ गया है।करवा चौथ का व्रत कैसे रखते हैं ( Karva Chauth ka Vrat Kaise Rakhte Hain)
करवा चौथ की पूजा के लिए घर के उत्तर-पूर्व दिशा के कोने को अच्छे से साफ करके, लकड़ी का पाटा बिछाकर उस पर शिवजी, मां गौरी और गणेश जी की प्रतिमा, तस्वीर या चित्र स्थापित कर दें। बाजार में करवा चौथ की पूजा के लिए कैलेंडर भी मिलते हैं, जिस पर सभी देवी-देवताओं के चित्र बने होते हैं। इस प्रकार देवी- देवताओं की स्थापना करके पाटे की उत्तर दिशा में एक जल से भरा लोटा या कलश स्थापित करें और उसमें थोड़े-से चावल डाल दें। अब उस पर रोली, चावल का टीका लगाकर लोटे पर मौली बांध दें। कुछ लोग कलश के आगे मिट्टी से बनी गौरी जी या सुपारी पर मौली लपेटकर भी रखते हैं। इस प्रकार कलश की स्थापना के बाद मां गौरी की पूजा करनी चाहिए और उन्हें सिंदूर चढ़ाना चाहिए। इस दिन चीनी से बने करवे का भी पूजा में बहुत महत्व होता है। कुछ लोग मिट्टी से बना करवा भी रख लेते हैं। साथ ही चार पूड़ी और चार लड्डू तीन अलग-अलग जगह लेकर, एक हिस्से को पानी वाले कलश के ऊपर रख दें। दूसरे हिस्से को मिट्टी या चीनी के करवे पर रखें और तीसरे हिस्से को पूजा के समय महिलाएं अपने साड़ी या चुनरी के पल्ले में बांध लें। कुछ जगहों पर पूड़ी और लड्डू के स्थान पर मीठे पुड़े भी चढ़ाए जाते हैं। आप अपनी परंपरा के अनुसार इन सब का चुनाव कर सकते हैं।अब देवी मां के सामने घी का दीपक जलाएं और उनकी कथा पढ़ें। इस प्रकार पूजा के बाद अपनी साड़ी के पल्ले में रखे प्रसाद और करवे पर रखे प्रसाद को अपने बेटे या अपने पति को खिला दें और कलश पर रखे प्रसाद को गाय को खिला दें। बाकी पानी से भरे कलश को पूजा स्थल पर ही रखा रहने दें। रात को चंद्रोदय होने पर इसी लोटे के जल से चंद्रमा को अर्घ्य दें और घर में जो कुछ भी बना हो, उसका भोग लगाएं।करवा चौथ पूजा विधि ( Karva Chauth Puja Vidhi)
करवा चौथ की पूजा के लिए पूजा के स्थान पर सही दिशा देखकर करवा माता की तस्वीर दीवार पर लगा लें। फिर पूजा की थाली तैयार कर लें। पूजा के शुभ मुहूर्त में अपनी सास या फिर जेठानी या फिर किसी अन्य पूज्य महिला से करवा चौथ की व्रत कथा सुनेंकथा सुनते वक्त थाली में जल से भरा लोटा और मिट्टी के करवे में जल भरकर उसे ढक्कन सहित रख लें। इसके अलावा थाली में रोली, गेहूं, धूप, दीपक, सींक आदि सब रख लें। कथा सुनने के बाद 7 बार करवे की अदला-बदली करें। उसके बाद इस जल से भरे करवे को रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए रख लें। फिर चंद्रमा के निकलने के बाद दीपक जलाकर पूजा करें और आरती उतारे। छलनी से चंद्रमा के दर्शन करने के बाद पति का चेहरा देखकर अपना व्रत खोलें। उसके बाद घर के सभी बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर भोजन करें।Karva Chauth Message In Hindi ( करवा चौथ संदेश हिंदी में)
जो मेरी हर मुस्कान की वजह है, जो मेरी सारी खुशियों की वजह है, ऐसे प्रिय पतिदेव को करवा चौथ की बहुत-बहुत शुभकामनाएं ! जो मेरी हर मुस्कान की वजह है, जो मेरी सारी खुशियों की वजह है, ऐसे प्रिय पतिदेव को करवा चौथ की बहुत-बहुत शुभकामनाएं !Karwa Chauth 2023 Puja Vidhi For Unmarried Girl :कुंवारी लड़कियों के लिए करवा चौथ पूजा विधि
करवा चौथ की पूजा के लिए पूजा के स्थान पर सही दिशा देखकर करवा माता की तस्वीर दीवार पर लगा लें। फिर पूजा की थाली तैयार कर लें। पूजा के शुभ मुहूर्त में अपनी सास या फिर जेठानी या फिर किसी अन्य पूज्य महिला से करवा चौथ की व्रत कथा सुनें। कथा सुनते वक्त थाली में जल से भरा लोटा और मिट्टी के करवे में जल भरकर उसे ढक्कन सहित रख लें। इसके अलावा थाली में रोली, गेहूं, धूप, दीपक, सींक आदि सब रख लें। कथा सुनने के बाद 7 बार करवे की अदला-बदली करें। उसके बाद इस जल से भरे करवे को रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए रख लें। फिर चंद्रमा के निकलने के बाद दीपक जलाकर पूजा करें और आरती उतारे। छलनी से चंद्रमा के दर्शन करने के बाद पति का चेहरा देखकर अपना व्रत खोलें। उसके बाद घर के सभी बुजुर्गों का आशीर्वाद लेकर भोजन करें।करवा चौथ तिथि और शुभ योग ( Karva Chauth Shubh Thithi)
चतुर्थी तिथि का आरंभ - 31 अक्टूबर, रात 9 बजकर 31 मिनट सेचतुर्थी तिथि का समापन - 1 नवंबर, रात 9 बजकर 20 मिनटउदया तिथि को मानते हुए चतुर्थी तिथि 1 नवंबर दिन बुधवार को है इसलिए यह व्रत 1 नवंबर को ही रखा जाएगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, शिव योग और परिघ योग जैसे महायोग बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व भी बढ़ गया है।Karwa Chauth Puja Time 2023 (करवा चौथ कथा पूजा समय)
करवा चौथ - 1 नवंबर 2023, बुधवारकरवा चौथ पूजा मुहूर्त - 05:28 PM से 06:45 PM
अवधि - 01 घण्टा 18 मिनट
करवा चौथ व्रत समय - 06:23 AM से 08:06 PM
अवधि - 13 घण्टे 43 मिनट
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ - 31 अक्टूबर 2023 को 09:30 PM बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त - 01 नवम्बर 2023 को 09:19 PM बजे
करवा चौथ कोट्स इन हिंदी (Karwa Chauth Quotes in Hindi)
नीले नभ पर जिस तरह बिखरती है चांदनीवैसे ही करवा चौथ का त्योहार लाए
हमारे जीवन में प्यार की रागिनी !
करवा चौथ की शुभकामनाएं डियर !
Periods Me Karwa Chauth Vrat Kaise Rakhe (करवा चौथ व्रत में पीरियड्स आ जाएं तो क्या करें)
शास्त्रों के अनुसार अगर महिलाएं पीरियड्स के दौरान करवा चौथ व्रत रखती हैं तो इसका कोई भी प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता है। दरअसल इस व्रत का एक जरूरी नियम है कि अगर ये व्रत एक बार शुरू कर दिया जाए तो इसे बीच में नहीं छोड़ना चाहिए। ऐसे में अगर किसी साल करवा चौथ व्रत के समय पीरियड्स आ जाएं तो भी ये व्रत रखना चाहिए। चाहे व्रत शुरू करने से पहले चाहे बाद में कभी भी पिरियड्स आ जाएं तो भी ये व्रत पूरी श्रद्धा से और नियमानुसार रखना चाहिए।करवा चौथ की रात में पति-पत्नी क्या करते हैं?
करवा चौथ की रात में चांद निकलने के बाद पति पत्नी छत पर या वहां जाते हैं जहां से चांद अच्छे से दिखाई दे रहा हो। फिर पत्नी चांद की पूजा करती है और उसे छलनी से देखती है। इसके बाद पत्नी अपने पति को छलनी से देखती है। फिर पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर करवा चौथ व्रत का पारण कराते हैं।Sargi Time For Karwa Chauth 2023 (करवा चौथ सरगी खाने का समय 2023)
करवा चौथ व्रत के दिन सरगी सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में यानि 4 से 5 बजे के बीच ली जाती है। ज्योतिष शास्त्र अनुसार साल 2023 में सरगी लेने का शुभ मुहूर्त सुबह 4 बजे से लेकर 5 बजकर 32 मिनट तक रहेगा।करवा चौथ की सरगी में क्या-क्या खाना चाहिए ( when to eat sargi in karva chauth)
फेनीनारियल पानी चायपनीर की सब्जी या पराठेदहीदूधताजे फलड्राई फ्रूट्सकरवा चौथ की रात को पति पत्नी क्या करते हैं 2023?
करवा चौथ दंपत्तियों के जीवन से बेहद खास पर्व है। इस पर्व में विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना से उपवास करती हैं। शाम में पूजा के बाद चांद को देखकर पति की मौजूदगी में व्रत खोलती हैं। इस मौके पर पति भी पत्नी का साथ देते हैं।Karva Chauth Sargi Time : करवा चौथ सरगी टाइम
करवा चौथ के दिन सरगी सूर्योदय से पहले ब्रह्म मुहूर्त में यानि 4 से 5 बजे के बीच ली जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार साल 2023 में सरगी लेने का शुभ मुहूर्त 4 बजे से लेकर 4 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।धनवर्षा की तैयारी कर लें ये 5 राशियां, राहु के नक्षत्र में जा रहे हैं बुध
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