Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025): जितिया का पारण कितने बजे करना चाहिए? जानें मुहूर्त, राजा जीमूतवाहन की कहानी, देखें जितिया व्रत की आरती
जितिया व्रत 2025 पूजा शुभ मुहूर्त-
सायं पूजा का समय: सुबह 04:56 से 06:05 बजे
गोधूलि बेला: शाम 06:27 से 06:51 बजे तक
सायं समय: शाम 06:27 से 07:37 बजे तक
अमृत काल: रात 11:09 से 12:40 बजे तक
जितिया व्रत पूजा सामग्री लिस्ट
जितिया व्रत 2025 पूजा शुभ मुहूर्त-
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:33 से 05:19 बजे तक
- प्रातः और सायं पूजा का समय: सुबह 04:56 से 06:05 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:52 से 12:41 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 02:20 से 03:09 बजे तक
- गोधूलि बेला: शाम 06:27 से 06:51 बजे तक
- सायं समय: शाम 06:27 से 07:37 बजे तक
- अमृत काल: रात 11:09 से 12:40 बजे तक (15 सितंबर)
- निषीथ मुहूर्त: रात 11:53 से 12:40 बजे तक (15 सितंबर)
- रवि योग: सुबह 06:05 से 08:41 बजे तक
चील सियारिन की कहानी
जितिया पूजा सामग्री लिस्ट
- कुश (जीमूतवाहन की प्रतिमा बनाने के लिए)
- गाय का गोबर (चील व सियारिन बनाने के लिए)
- अक्षत यानि चावल
- पेड़ा
- दूर्वा की माला
- पान और सुपारी
- लौंग और इलायची
- श्रृंगार का सामान
- सिंदूर पुष्प
- गांठ का धागा
- धूप-दीप
- मिठाई
- फल
- फूल
- बांस के पत्ते
- सरसों का तेल
जितिया व्रत चील-सियारिन की कथा
जितिया की पौराणिक कथा के अनुसार, एक पेड़ पर चील और सियारिन रहती थीं। दोनों की आपस में खूब बनती थी। चील और सियारिन एक-दूसरे के लिए खाने का एक हिस्सा जरूर रखती थीं। एक दिन गांव की औरतें जितिया व्रत की तैयारी कर रही थीं। उन्हें देखकर चील का भी मन व्रत करने का कर गया। फिर चील ने सारा वाक्या सियारिन को जाकर सुनाया। तब दोनों ने तय किया कि वो भी जितिया का व्रत रखेंगी। लेकिन अगले दिन जब दोनों ने व्रत रखा तो सियारिन को भूख और प्यास दोनों लगने लगी। सियारिन भूख से व्याकुल इधर-उधर घूमने लगी। व्रत के दिन गांव में किसी की मृत्यु हो गई यह देखकर सियारिन के मुंह में पानी आ गया। फिर सियारिन ने अधजले शव को खाकर अपनी भूख को शांत किया। वह भूल गई उसने जितिया का व्रत रखा है। वहीं चील ने पूरी निष्ठा और मन से जितिया का व्रत और पारण किया।
चील और सियारिन ने अगले जन्म में सगी बहन बनकर एक राजा के घर में जन्म लिया। चील बड़ी बहन बनीं और सियारिन छोटी बहन। दोनों का विवाह राजा के घर में हुआ। चील ने सात बेटों को जन्म दिया, वहीं सियारिन के बच्चे जन्म लेते ही मर जाते। ऐसे में अपनी बहन को सुखी और खुश देखकर सियारिन अंदर-अंदर से जलने लगी और उसने चील के सातों बेटों का मरवा दिया। सियारिन के सातों बेटों के सिर कटवाकर उसने उन्हें चील के घर भिजवा दिया। यह सब देखकर भगवान जीऊतवाहन ने मिट्टी से सातों भाइयों के सिर बनाए और सभी के सिरों को उसके धड़ से जोड़कर उस पर अमृत छिड़कर उन्हें जीवित कर दिया। वहीं जो कटे सिर सियारिन ने भेजे थे वो सब फल में बदल गए। अपनी बहन से रोने की आवाज न सुनकर सियारिन व्याकुल हो उठीं और वहां जाकर सारा माजरा जानने पहुंच गई। सियारिन सारी बातें जब चील को बताई। कहते हैं कि तब चील ने उसे पिछले जन्म की सारी बातें बताई और ये सब सुनकर सियारिन को अपनी गलती का पश्चाताप होने लगा। इसके बाद चील सियारिन को उसी पेड़ के पास ले गई और भगवान जीऊतवाहन की कृपा से उसे सारी बातें याद आ गई। इससे सियारिन इतनी दुखी हुई कि उसकी मौत उसी पेड़ के पास हो गई। राजा को जब इस बात की जानकारी मिली तब उन्होंने सियारिन का दाह संस्कार उसी पेड़ के पास करा दिया।
जितिया व्रत कथा (जीमूतवाहन की कहानी)
पौराणिक कथा के अनुसार गंधर्व राज जीमूतवाहन बड़े ही धर्मात्मा पुरुष थे। वह युवावस्था में ही राजपाट छोड़कर वन में पिता की सेवा करने चले गए थे। एक दिन भ्रमण करते हुए उन्हें नाग माता मिली। उन्हें देखकर जीमूतवाहन ने उनके विलाप करने का कारण पूछा। नाग माता ने उन्हें बताया कि नागवंश गरुड़ से काफी परेशान है। उन्होंने बताया वह वंश की रक्षा करने के लिए गरुड़ से समझौता किया था कि वह प्रतिदिन उसे एक नाग देंगे जिसके बदले में वह हमारा सामूहिक शिकार नहीं करेगा। इसी बात को रखने के लिए नागमाता के पुत्र को गरूड़ के सामने जाना पड़ रहा है। नागमाता की बात सुनकर जीमूतवाहन ने नागमाता को वचन दिया कि वह उनके पुत्र को कुछ नहीं होने देंगे और वह उनके जीवन की रक्षा करेंगे। तभी जीमूतवाहन ने नाग माता के पुत्र की जगह कपड़े में खुद को लपेट कर गुरुड़ के सामने खुद को पेश किया। उसी जगह पर जहां गरुड़ आया करता था। कुछ ही देर में गरुड़ वहां पहुँचा और जीमूतवाहन को अपने पंजे में दबाकर पहाड़ की तरफ उड़ना शुरू कर दिया। गरुड़ को उड़ते समय कुछ अजीब सा महसूस हुआ उसने सोचा इस बार सांप की हमेशा की तरह चिल्लाने और रोने की आवाज क्यों नहीं आ रही है। यह सोचकर गरुड़ तुरंत कपड़े को हटाना शुरू किया। कपड़े हटते ही उसने वहां सांप की जगह जीमूतवाहन को पाया। तब जीमूतवाहन ने सारी कहानी गरुड़ से कह सुनाई। यह बात सुनकर गरुड़ ने जीमूतवाहन को छोड़ दिया और सांपों को ना खाने का वचन भी दे दिया। इस प्रकार नागमाता और उनका परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाई।
जितिया व्रत आरती
ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।
त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥
ओम जय कश्यप..
सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥
ओम जय कश्यप..
सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
ओम जय कश्यप..
सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥
ओम जय कश्यप..
कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥
ओम जय कश्यप..
नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
ओम जय कश्यप..
जितिया पारण टाइम 2025 (Jitiya Vrat Parana Time 2025)
वैसे तो सूर्योदय के बाद जितिया का पारण कर लिया जाता है। लेकिन, जितिया के पारण के लिए आज सुबह 6.10 से सुबह 8.32 के बीच का मुहूर्त ही शुभ मुहूर्त है। इस बीच आप पारण कर सकती हैं।Jitiya Vrat 2025 LIVE: जितिया व्रत का पारण कल कितने बजे होगा?
जितिया के पारण के लिए 15 सितंबर को सुबह 6.10 से सुबह 8.32 के बीच का मुहूर्त ही शुभ मुहूर्त है। इस बीच आप पारण कर सकती हैं।Jitiya Vrat 2025 LIVE: शिव रक्षा स्तोत्र
ॐ अस्य श्री शिवरक्षास्तोत्रमंत्रस्य याज्ञवल्क्यऋषिः,श्री सदाशिवो देवता, अनुष्टुपछन्दः श्री सदाशिवप्रीत्यर्थं शिव रक्षा स्तोत्रजपे विनियोगः।
चरितम् देवदेवस्य महादेवस्य पावनम् ।
अपारम् परमोदारम् चतुर्वर्गस्य साधनम् ।
गौरी विनायाकोपेतम् पंचवक्त्रं त्रिनेत्रकम् ।
शिवम् ध्यात्वा दशभुजम् शिवरक्षां पठेन्नरः।
गंगाधरः शिरः पातु भालमर्धेन्दु शेखरः।
नयने मदनध्वंसी कर्णौ सर्पविभूषणः ।
घ्राणं पातु पुरारातिर्मुखं पातु जगत्पतिः ।
जिह्वां वागीश्वरः पातु कन्धरां शितिकन्धरः ।
श्रीकण्ठः पातु मे कण्ठं स्कन्धौ विश्वधुरन्धरः ।
भुजौ भूभार संहर्ता करौ पातु पिनाकधृक् ।
हृदयं शङ्करः पातु जठरं गिरिजापतिः।
नाभिं मृत्युञ्जयः पातु कटी व्याघ्रजिनाम्बरः ।
सक्थिनी पातु दीनार्तशरणागत वत्सलः।
उरु महेश्वरः पातु जानुनी जगदीश्वरः ।
जङ्घे पातु जगत्कर्ता गुल्फौ पातु गणाधिपः ।
चरणौ करुणासिन्धुः सर्वाङ्गानि सदाशिवः ।
एताम् शिवबलोपेताम् रक्षां यः सुकृती पठेत्।
स भुक्त्वा सकलान् कामान् शिवसायुज्यमाप्नुयात्।
गृहभूत पिशाचाश्चाद्यास्त्रैलोक्ये विचरन्ति ये।
दूराद् आशु पलायन्ते शिवनामाभिरक्षणात्।
अभयम् कर नामेदं कवचं पार्वतीपतेः ।
भक्त्या बिभर्ति यः कण्ठे तस्य वश्यं जगत्त्रयम् ।
इमां नारायणः स्वप्ने शिवरक्षां यथाऽदिशत् ।
प्रातरुत्थाय योगीन्द्रो याज्ञवल्क्यस्तथाऽलिखत् ।
Jitiya Vrat 2025 LIVE: जीमूतवाहन चालीसा
।।दोहा।।जय जय जीमूतवाहन, जय जय जीवित्पुत्रिका।
मात-पिता की रक्षा करो, हर लो दुःख दरिद्रता।।
।।चौपाई।।
अश्विन मास कृष्ण पक्ष अष्टमी, नाम तुम्हारा जीवित्पुत्रिका।
सुख-शांति तुम दो माता, तुम बिन नहीं कोई सहारा।।
पुत्र की रक्षा करो माता, तुम तो हो जग पालनहारा।
पूत-सुपूत बनाओ माता, सुख-शांति तुम देना।।
कथा सुनी जब जीमूतवाहन की, दुख की घड़ी में तुम याद आई।
तुमने पुत्र को दिया जीवन, तुम्हारी कृपा सदा बनी रहे।।
जय जय माता तुम सबकी, हर लो हर संकट तुम हमारी।
बाल-बाल को रखो सुरक्षित, तुम्हारी महिमा सबसे न्यारी।।
जो जन चालीसा ये पढ़े, हर इच्छा उसकी पूरी हो।
मात-पिता को सुख-शांति मिले, और घर में धन-संपदा हो।।
पुत्र की रक्षा तुम ही करती, तुम तो जग की पालनहारी।
तुम्हारी दया से सब कुछ मिले, तुम सबकी हो पालनहारी।।
।।दोहा।।
जीवित्पुत्रिका माता, कृपा करो सब पर।
संतान को सुखी रखो, और दूर करो हर संकट।।
Jitiya Vrat 2025 LIVE: ये अरियार, का बरियार गीत
ये अरियार, का बरियारजा के राम जी से कहिअ
राजू के माई जिउतिया भूखल बाड़ी जितिया
हाथ जोड़ी तोहसे करीलें करजोरियां
सीता जी से कही दीह भरी के अकवरिया
अमर रखिहे बबुआ हमार, लिहे संकट से उबार
भुखल बानी हम खर जिउतिया
राम जी के तु दे दिह खबरियां
खबरियां राम जी के तु दे दिह खबरियां
ये अरियार, का बरियार
जा के राम जी से कह दिह
वैभव के माई भुखल बाड़ी जिउतिया
जितिया वैभव के माई
भुखल बाड़ी जितिया
हाथ जोड़ी तोहसे करीलें करजोरियां
सीता जी से कही दीह भरी के अकवरिया
अमर रखिहे बबुनी हमार, लिहे संकट से उबार
भुखल बानी हम खर जिउतिया
राम जी के तु दे दिह खबरियां
खबरियां राम जी के तु दे दिह खबरियां
तोहार महिमा किरन लिखि गावें
सिंया राम जी के
जय जयकारा लगावें
भुखल बाड़ी खर जितिया
रऊरा किरन बिटिया
सदा फुलाईल राखब मोर फुलवरिया
रितिक के मम्मी भुखल बाड़ी जितिया
वैभव के माई भुखल बाड़ी जिउतिया
वर्मा जी के धनिया भुखल बाड़ी जितिया
वर्मा जी के रनिया भुखल बाड़ी जितिया
Jitiya Vrat 2025 LIVE: जितिया व्रत पूजा मंत्र
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि।।
Jitiya Vrat 2025 LIVE: चील सियारिन की कथा
जितिया की पौराणिक कथा के अनुसार, एक पेड़ पर चील और सियारिन रहती थीं। दोनों की आपस में खूब बनती थी। चील और सियारिन एक-दूसरे के लिए खाने का एक हिस्सा जरूर रखती थीं। एक दिन गांव की औरतें जितिया व्रत की तैयारी कर रही थीं। उन्हें देखकर चील का भी मन व्रत करने का कर गया। फिर चील ने सारा वाक्या सियारिन को जाकर सुनाया। तब दोनों ने तय किया कि वो भी जितिया का व्रत रखेंगी। लेकिन अगले दिन जब दोनों ने व्रत रखा तो सियारिन को भूख और प्यास दोनों लगने लगी। सियारिन भूख से व्याकुल इधर-उधर घूमने लगी। व्रत के दिन गांव में किसी की मृत्यु हो गई यह देखकर सियारिन के मुंह में पानी आ गया। फिर सियारिन ने अधजले शव को खाकर अपनी भूख को शांत किया। वह भूल गई उसने जितिया का व्रत रखा है। वहीं चील ने पूरी निष्ठा और मन से जितिया का व्रत और पारण किया।चील और सियारिन ने अगले जन्म में सगी बहन बनकर एक राजा के घर में जन्म लिया। चील बड़ी बहन बनीं और सियारिन छोटी बहन। दोनों का विवाह राजा के घर में हुआ। चील ने सात बेटों को जन्म दिया, वहीं सियारिन के बच्चे जन्म लेते ही मर जाते। ऐसे में अपनी बहन को सुखी और खुश देखकर सियारिन अंदर-अंदर से जलने लगी और उसने चील के सातों बेटों का मरवा दिया। सियारिन के सातों बेटों के सिर कटवाकर उसने उन्हें चील के घर भिजवा दिया। यह सब देखकर भगवान जीऊतवाहन ने मिट्टी से सातों भाइयों के सिर बनाए और सभी के सिरों को उसके धड़ से जोड़कर उस पर अमृत छिड़कर उन्हें जीवित कर दिया। वहीं जो कटे सिर सियारिन ने भेजे थे वो सब फल में बदल गए। अपनी बहन से रोने की आवाज न सुनकर सियारिन व्याकुल हो उठीं और वहां जाकर सारा माजरा जानने पहुंच गई। सियारिन सारी बातें जब चील को बताई। कहते हैं कि तब चील ने उसे पिछले जन्म की सारी बातें बताई और ये सब सुनकर सियारिन को अपनी गलती का पश्चाताप होने लगा। इसके बाद चील सियारिन को उसी पेड़ के पास ले गई और भगवान जीऊतवाहन की कृपा से उसे सारी बातें याद आ गई। इससे सियारिन इतनी दुखी हुई कि उसकी मौत उसी पेड़ के पास हो गई। राजा को जब इस बात की जानकारी मिली तब उन्होंने सियारिन का दाह संस्कार उसी पेड़ के पास करा दिया।
Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया व्रत की आरती
ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥
ओम जय कश्यप..
सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥
ओम जय कश्यप..
सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
ओम जय कश्यप..
सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥
ओम जय कश्यप..
कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥
ओम जय कश्यप..
नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
ओम जय कश्यप..
Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया के गीत लिरिक्स
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार होतोहरा प बाबू कबहू आचना आए
अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए
तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए
तोहरो जीनगीया के दिही सवार हो
जिऊत वाहन देव अर्जी करीह स्वीकार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
हमरो दुलरवा के नजरों ने लागे
रहीह तू हरदम सबका से आगे
पढ़ लिख के बबुआ खूब नाम कमईह
कौनो परेशानी से तू कबहू ना डेरईह
जीऊत वाहन देव के बा महिमा अपार हो
एही से त निर्जल भूकल बानी त्यौहार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
हमरो उमर तोहरा के लग जाए
रोग बल्ला कोई छू नहीं पाई
पावन परब हम तोहरे ला करिले
कवनो ना गलती होखे ध्यान हम धरीले
तोहरे से रोशन बा अंगना हमार हो
कबहु भुलइह ना माई के दुलार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: माताएं जिउतिया लॉकेट क्यों पहनती हैं?
व्रत रखने वाली महिलाएं लाल और पीले रंग का पवित्र धागा पहनती हैं, जिसमें सोने या चांदी के लॉकेट या गांठें बांधी जाती हैं। इस धागे में उतने ही लॉकेट होते हैं, जितने आपके बच्चे। यह धागा और लॉकेट केवल आभूषण नहीं, बल्कि मां की ममता, आस्था और संकल्प का प्रतीक होता है। बिना इस धागे और लॉकेट के जितिया व्रत अधूरा माना जाता है।
Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार गंधर्व राज जीमूतवाहन बड़े ही धर्मात्मा पुरुष थे। वह युवावस्था में ही राजपाट छोड़कर वन में पिता की सेवा करने चले गए थे। एक दिन भ्रमण करते हुए उन्हें नाग माता मिली। उन्हें देखकर जीमूतवाहन ने उनके विलाप करने का कारण पूछा। नाग माता ने उन्हें बताया कि नागवंश गरुड़ से काफी परेशान है। उन्होंने बताया वह वंश की रक्षा करने के लिए गरुड़ से समझौता किया था कि वह प्रतिदिन उसे एक नाग देंगे जिसके बदले में वह हमारा सामूहिक शिकार नहीं करेगा। इसी बात को रखने के लिए नागमाता के पुत्र को गरूड़ के सामने जाना पड़ रहा है। नागमाता की बात सुनकर जीमूतवाहन ने नागमाता को वचन दिया कि वह उनके पुत्र को कुछ नहीं होने देंगे और वह उनके जीवन की रक्षा करेंगे। तभी जीमूतवाहन ने नाग माता के पुत्र की जगह कपड़े में खुद को लपेट कर गुरुड़ के सामने खुद को पेश किया। उसी जगह पर जहां गरुड़ आया करता था। कुछ ही देर में गरुड़ वहां पहुँचा और जीमूतवाहन को अपने पंजे में दबाकर पहाड़ की तरफ उड़ना शुरू कर दिया। गरुड़ को उड़ते समय कुछ अजीब सा महसूस हुआ उसने सोचा इस बार सांप की हमेशा की तरह चिल्लाने और रोने की आवाज क्यों नहीं आ रही है। यह सोचकर गरुड़ तुरंत कपड़े को हटाना शुरू किया। कपड़े हटते ही उसने वहां सांप की जगह जीमूतवाहन को पाया। तब जीमूतवाहन ने सारी कहानी गरुड़ से कह सुनाई। यह बात सुनकर गरुड़ ने जीमूतवाहन को छोड़ दिया और सांपों को ना खाने का वचन भी दे दिया। इस प्रकार नागमाता और उनका परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाई।Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया के दिन क्या दान करना चाहिए?
जितिया के दिन आप अन्न, फल और जल का दान कर सकते हैं। साथ ही वस्त्र का दान भी किया जा सकता है।Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया के दिन नाखून काट सकते हैं?
नहीं, जितिया व्रत के दिन नाखून नहीं काटने चाहिए। शास्त्रों और परंपरा के अनुसार, जितिया जैसे कठोर व्रत के दिन शरीर के किसी भी हिस्से को काटना (जैसे बाल, नाखून आदि) अशुद्धता और व्रत भंग का संकेत माना जाता है।Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया के दिन व्रती महिलाओं को क्या करना चाहिए
- स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें
- निर्जला व्रत रखें
- पूजा स्थान की सफाई करें
- जिउतिया माता की पूजा करें
- जितिया की कथा सुनें
- संकल्प लें
- सदाचार और संयम रखें
- रात्रि में जागरण करें
Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जीवित्पुत्रिका व्रत का महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जीवित्पुत्रिका व्रत विवाहित महिलाएं पुत्र प्राप्ति और दीर्घायु के लिए रखती हैं। इस दिन लोग 24 घंटे का उपवास रखते हैं और कुछ भी नहीं खाते-पीते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो महिलाएं यह व्रत रखती हैं उनके बच्चे जीवन में बहुत तरक्की करते हैं। इसके अलावा, वे लंबे समय तक जीवित भी रहते हैं।Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जीवित्पुत्रिका व्रत पूजा विधि
- जितिया व्रत के दिन महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर स्वच्छ हो जाएं।
- इसके बाद निर्जला व्रत का संकल्प लें।
- फिर पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें।
- इसके बाद गाय के गोबर को पूजा स्थल पर लीपें।
- फिर वहां एक छोटे से तलाब का निर्माण कर लें।
- फिर कुश से जीमूतवाहन की मूर्ति बनाएं।
- इसके बाद एक जल का पात्र लें।
- फिर जल के पात्र में कुश से बनाई गई जीमूतवाहन की मूर्ति स्थापित करें।
- प्रतिमा पर धूप, दीप, रोली, चावल, पुष्प आदि चढ़ाएं।
- इसके बाद गाय के गोबर से चील या सियारिन की प्रतिमा का निर्माण करें।
- फिर प्रतिमा की माथे पर लाल सिंदूर का टीका लगाएं।
- फिर अंत में जितिया व्रत की कथा सुनें या सुनाएं।
- जितिया व्रत की पूजा शाम के समय प्रदोष काल में की जाती है।
- जितिया व्रत का पारण अगले दिन किया जाता है।
- जितिया व्रत पारण के समय महिलाएं सूर्य को अर्घ्य देती हैं इसके बाद ही कुछ खाना खाती हैं।
- इस व्रत का पारण तीसरे दिन झोर भात, मरुआ की रोटी और नोनी का साग खाकर किया जाता है।
Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: गर्भवती महिलाएं जितिया व्रत में रखें इन बातों का ख्याल
गर्भवती महिलाएं जितिया व्रत को रखने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें कि आपकी और बच्चे की सेहत पर इसका क्या असर हो सकता है। व्रत करना है या नहीं ये इस बात पर निर्भर करता है कि प्रेग्नेंसी ज्यादा रिस्क वाली है या नार्मल है। अगर डॉक्टर और आपका परिवार व्रत करने की सलाह देते हैं, तब आप इस व्रत को कर सकती हैं।
Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया व्रत में क्या नहीं करना चाहिए?
- अनाज और नमक का सेवन नहीं करें
- जल तक ग्रहण न करें
- झूठ या कटु वचन न बोलें
- सोना नहीं चाहिए
- झगड़ा, विवाद या क्रोध से बचें
- नाखून, बाल आदि नहीं काटने चाहिए
- किसी का अपमान न करें
- अशुद्ध वस्त्र न पहनें
- बालों में तेल न लगाएं और श्रृंगार न करें
Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया के पारण में क्या-क्या खा सकते हैं?
- नोनी साग
- अरबी
- तुरई
- देसी मटर
- रागी
Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया के दिन व्रती महिलाएं बाल में कंघी कर सकती हैं या नहीं?
जितिया व्रत बहुत ही कठिन और तपस्वी व्रत होता है, जिसमें शारीरिक और मानसिक संयम महत्वपूर्ण होता है। इस दिन शरीर को साज-सज्जा (जैसे बालों में कंघी, श्रृंगार आदि) से दूर रखा जाता है, ताकि ध्यान पूरी तरह पूजा, संकल्प और संयम पर केंद्रित रहे। इसलिए जितिया व्रत (जीवित्पुत्रिका व्रत) के दिन व्रती महिलाओं को बालों में कंघी नहीं करनी चाहिए।Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया व्रत में बाल धो सकते हैं?
जितिया व्रत के दौरान बाल धोना शुभ नहीं माना जाता है, खासकर निर्जला व्रत के दिन। व्रत से पहले नहाय खाय के दिन ही स्नान करके खुद को शुद्ध करना चाहिए और उसके बाद व्रत समाप्त होने तक बालों को नहीं धोना चाहिए। यह धार्मिक मान्यता है कि इससे व्रत का उल्लंघन होता है।Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया पारण कब है?
जितिया व्रत का पारण अगले दिन 15 सितंबर, सोमवार को अष्टमी तिथि खत्म होने के साथ ही नवमी तिथि पर किया जाएगा। अष्टमी तिथि सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर खत्म होगी, इसलिए इस समय के बाद ही पारण होगा।Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया व्रत विधि
मान्यताओं के अनुसार जितिया व्रत के दिन भगवान जीमूतवाहन भगवान की पूजा की जाती है। इस दिन प्रदोष काल में पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। सुबह उठकर स्नान करने के बाद महिलाएं साफ कपड़े पहनती हैं और व्रत रखती हैं। पूजा के लिए कुशी से बनी भगवान जीमूतवाहन की मूर्ति को एक चौकी पर स्थापित किया जाता है। धूप, दीप, फल, फूल आदि। भगवान को अर्पित किये जाते हैं। इसके अलावा, सियारों और चील की मूर्ति को गाय के गोबर से लीपा जाता है और फिर मूर्ति पर लाल सिन्दूर लगाया जाता है। जितिया व्रत पूजा करने के बाद भगवान जीमूतवाहन और जितिया व्रत की कथा सुनी जाती है।Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: कितने बजे कर सकते हैं जितिया की पूजा?
- आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि का शुभारंभ: आज, रविवार, 5:04 AM पर
- आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि का समापन: कल, सोमवार, 3:06 AM पर
- जितिया सुबह पूजा मुहूर्त: 7:38 AM से दोपहर 12:16 PM तक
- जितिया संध्या पूजा मुहूर्त: 4:35 PM से 06:00 PM तक
- जितिया पारण समय: कल, सोमवार, 06:06 ए एम के बाद
Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया के उपाय
जो बच्चे बार-बार नजरदोष के कारण बीमार होते हैं उनकी सुरक्षा के लिए जितिया व्रत के दिन एक लाल कपड़े को सरसों के तेल में भिगोकर नारियल पर बांध दें। इसे जीमूतवाहन को अर्पित करें और फिर बच्चे के सिर से 7 बार वारकर इसे नदी में प्रवाहित करें। मान्यता है इससे बुरी नजर से रक्षा होती है।Jitiya Vrat 2025: जितिया व्रत गीत 2025 (Jitiya Ke Bhojpuri Geet Video 2025)
Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया के गीत लिरिक्स
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार होतोहरा प बाबू कबहू आचना आए
अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए
तोहरा प बाबू कबहू आचना आए
अचरा के फुलवा कबो ना मुरझाए
तोहरो जीनगीया के दिही सवार हो
जिऊत वाहन देव अर्जी करीह स्वीकार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
हमरो दुलरवा के नजरों ने लागे
रहीह तू हरदम सबका से आगे
पढ़ लिख के बबुआ खूब नाम कमईह
कौनो परेशानी से तू कबहू ना डेरईह
जीऊत वाहन देव के बा महिमा अपार हो
एही से त निर्जल भूकल बानी त्यौहार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
हमरो उमर तोहरा के लग जाए
रोग बल्ला कोई छू नहीं पाई
पावन परब हम तोहरे ला करिले
कवनो ना गलती होखे ध्यान हम धरीले
तोहरे से रोशन बा अंगना हमार हो
कबहु भुलइह ना माई के दुलार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
चंदा जैसन चमके ई मुखड़ा तोहार हो
जुग जुग जिय ए बबुआ हमार हो
Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया व्रत मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ग्लौं देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते, देहि में तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतःJitiya Vrat 2025 Date Time (जितिया व्रत कब है 2025 में ) LIVE: जितिया शुभ मुहूर्त 2025
वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 14 सितंबर को सुबह 05 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 15 सितंबर को देर रात 03 बजकर 06 मिनट पर होगा।Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार गंधर्व राज जीमूतवाहन बड़े ही धर्मात्मा पुरुष थे। वह युवावस्था में ही राजपाट छोड़कर वन में पिता की सेवा करने चले गए थे। एक दिन भ्रमण करते हुए उन्हें नाग माता मिली। उन्हें देखकर जीमूतवाहन ने उनके विलाप करने का कारण पूछा। नाग माता ने उन्हें बताया कि नागवंश गरुड़ से काफी परेशान है। उन्होंने बताया वह वंश की रक्षा करने के लिए गरुड़ से समझौता किया था कि वह प्रतिदिन उसे एक नाग देंगे जिसके बदले में वह हमारा सामूहिक शिकार नहीं करेगा। इसी बात को रखने के लिए नागमाता के पुत्र को गरूड़ के सामने जाना पड़ रहा है। नागमाता की बात सुनकर जीमूतवाहन ने नागमाता को वचन दिया कि वह उनके पुत्र को कुछ नहीं होने देंगे और वह उनके जीवन की रक्षा करेंगे। तभी जीमूतवाहन ने नाग माता के पुत्र की जगह कपड़े में खुद को लपेट कर गुरुड़ के सामने खुद को पेश किया। उसी जगह पर जहां गरुड़ आया करता था। कुछ ही देर में गरुड़ वहां पहुँचा और जीमूतवाहन को अपने पंजे में दबाकर पहाड़ की तरफ उड़ना शुरू कर दिया। गरुड़ को उड़ते समय कुछ अजीब सा महसूस हुआ उसने सोचा इस बार सांप की हमेशा की तरह चिल्लाने और रोने की आवाज क्यों नहीं आ रही है। यह सोचकर गरुड़ तुरंत कपड़े को हटाना शुरू किया। कपड़े हटते ही उसने वहां सांप की जगह जीमूतवाहन को पाया। तब जीमूतवाहन ने सारी कहानी गरुड़ से कह सुनाई। यह बात सुनकर गरुड़ ने जीमूतवाहन को छोड़ दिया और सांपों को ना खाने का वचन भी दे दिया। इस प्रकार नागमाता और उनका परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाई।
Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया सरगी टाइम 2025
सुबह 4:00 AM से पहले तक खा लेना शुभ रहता है, क्योंकि सूर्योदय के बाद खाना वर्जित होता है।Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया से पहले मछली क्यों खाई जाती है?
ऐसा माना जाता है कि व्रत से पहले मछली खाने से आने वाले कठिन तप के दिन के लिए शक्ति और सहनशक्ति मिलती है, साथ ही यह पीढ़ियों से चली आ रही सदियों पुरानी परंपराओं का भी सम्मान करता है। ऐसा माना जाता है कि यदि व्रत से पहले माछ-भात नहीं खाया गया, तो व्रत पूर्ण फल नहीं देता।कई समुदायों में मछली को शुभ, समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक माना गया है। यह मान्यता है कि मछली खाने से व्रत के दौरान शरीर में शक्ति बनी रहती है और व्रत सफल होता है।
Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: प्रेगनेंसी में जितिया व्रत कैसे करें?
प्रेगनेंसी में बिना पानी या बिना भोजन का उपवास मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे में गर्भवती महिलाएं फलाहार या लिक्विड डाइट जैसे दूध, नारियल पानी, फल, साबूदाना खिचड़ी, सूखा मेवा आदि लेकर व्रत कर सकती हैं।Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: गर्भवती महिलाओं को जितिया व्रत करना चाहिए कि नहीं?
गर्भवती महिलाएं जितिया व्रत को रखने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें कि आपकी और बच्चे की सेहत पर इसका क्या असर हो सकता है। व्रत करना है या नहीं ये इस बात पर निर्भर करता है कि प्रेग्नेंसी ज्यादा रिस्क वाली है या नार्मल है। अगर डॉक्टर और आपका परिवार व्रत करने की सलाह देते हैं, तब आप इस व्रत को कर सकती हैं।Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया व्रत सामग्री लिस्ट
कुश (जीमूतवाहन की प्रतिमा बनाने के लिए)गाय का गोबर (चील व सियारिन बनाने के लिए)
अक्षत यानि चावल
पेड़ा
दूर्वा की माला
पान और सुपारी
लौंग और इलायची
श्रृंगार का सामान
सिंदूर पुष्प
गांठ का धागा
धूप-दीप
मिठाई
फल
फूल
बांस के पत्ते
सरसों का तेल
Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया का पारण कब है?
जितिया व्रत का पारण अगले दिन 15 सितंबर, सोमवार को अष्टमी तिथि खत्म होने के साथ ही नवमी तिथि पर किया जाएगा। अष्टमी तिथि सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर खत्म होगी, इसलिए इस समय के बाद ही पारण होगा।Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया की चील और सियार की कहानी
पौराणिक कथा के अनुसार, एक पेड़ पर चील और सियारिन रहती थीं। दोनों की आपस में खूब बनती थी। चील और सियारिन एक-दूसरे के लिए खाने का एक हिस्सा जरूर रखती थीं। एक दिन गांव की औरतें जितिया व्रत की तैयारी कर रही थीं। उन्हें देखकर चील का भी मन व्रत करने का कर गया। फिर चील ने सारा वाक्या सियारिन को जाकर सुनाया। तब दोनों ने तय किया कि वो भी जितिया का व्रत रखेंगी। लेकिन अगले दिन जब दोनों ने व्रत रखा तो सियारिन को भूख और प्यास दोनों लगने लगी। सियारिन भूख से व्याकुल इधर-उधर घूमने लगी। व्रत के दिन गांव में किसी की मृत्यु हो गई यह देखकर सियारिन के मुंह में पानी आ गया। फिर सियारिन ने अधजले शव को खाकर अपनी भूख को शांत किया। वह भूल गई उसने जितिया का व्रत रखा है। वहीं चील ने पूरी निष्ठा और मन से जितिया का व्रत और पारण किया। चील और सियारिन ने अगले जन्म में सगी बहन बनकर एक राजा के घर में जन्म लिया। चील बड़ी बहन बनीं और सियारिन छोटी बहन। दोनों का विवाह राजा के घर में हुआ। चील ने सात बेटों को जन्म दिया, वहीं सियारिन के बच्चे जन्म लेते ही मर जाते। ऐसे में अपनी बहन को सुखी और खुश देखकर सियारिन अंदर-अंदर से जलने लगी और उसने चील के सातों बेटों का मरवा दिया। सियारिन के सातों बेटों के सिर कटवाकर उसने उन्हें चील के घर भिजवा दिया। यह सब देखकर भगवान जीऊतवाहन ने मिट्टी से सातों भाइयों के सिर बनाए और सभी के सिरों को उसके धड़ से जोड़कर उस पर अमृत छिड़कर उन्हें जीवित कर दिया। वहीं जो कटे सिर सियारिन ने भेजे थे वो सब फल में बदल गए। अपनी बहन से रोने की आवाज न सुनकर सियारिन व्याकुल हो उठीं और वहां जाकर सारा माजरा जानने पहुंच गई। सियारिन सारी बातें जब चील को बताई। कहते हैं कि तब चील ने उसे पिछले जन्म की सारी बातें बताई और ये सब सुनकर सियारिन को अपनी गलती का पश्चाताप होने लगा। इसके बाद चील सियारिन को उसी पेड़ के पास ले गई और भगवान जीऊतवाहन की कृपा से उसे सारी बातें याद आ गई। इससे सियारिन इतनी दुखी हुई कि उसकी मौत उसी पेड़ के पास हो गई। राजा को जब इस बात की जानकारी मिली तब उन्होंने सियारिन का दाह संस्कार उसी पेड़ के पास करा दिया।Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया व्रत नियम
जितिया का व्रत पूरे दिन निर्जला रहकर किया जाता है। इस व्रत को बीच में ना छोड़ें और जीमूतवाहन की पूजा करें। जितिया व्रत के दिन ब्रह्माचर्या का पालन करें। इस दिन जो महिलाएं व्रत रखती हैं वो रात्रि जागरण करें और बिस्तर पर ना सोएं।Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया पूजा मुहूर्त
वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 14 सितंबर को सुबह 05 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगी। वहीं, इस तिथि का समापन 15 सितंबर को देर रात 03 बजकर 06 मिनट पर होगा। इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी। इस प्रकार 14 सितंबर को जितिया का व्रत रखा जाएगा। वहीं, 15 सितंबर को पारण किया जाएगा।Jitiya Vrat 2025 (जितिया व्रत 2025) LIVE: जितिया व्रत की आरती (Jitiya Vrat Aarti: Om Jay Kashyap Nandan aarti in Hindi)
ओम जय कश्यप नन्दन, प्रभु जय अदिति नन्दन।त्रिभुवन तिमिर निकंदन, भक्त हृदय चन्दन॥
ओम जय कश्यप..
सप्त अश्वरथ राजित, एक चक्रधारी।
दु:खहारी, सुखकारी, मानस मलहारी॥
ओम जय कश्यप..
सुर मुनि भूसुर वन्दित, विमल विभवशाली।
अघ-दल-दलन दिवाकर, दिव्य किरण माली॥
ओम जय कश्यप..
सकल सुकर्म प्रसविता, सविता शुभकारी।
विश्व विलोचन मोचन, भव-बंधन भारी॥
ओम जय कश्यप..
कमल समूह विकासक, नाशक त्रय तापा।
सेवत सहज हरत अति, मनसिज संतापा॥
ओम जय कश्यप..
नेत्र व्याधि हर सुरवर, भू-पीड़ा हारी।
वृष्टि विमोचन संतत, परहित व्रतधारी॥
ओम जय कश्यप..
सूर्यदेव करुणाकर, अब करुणा कीजै।
हर अज्ञान मोह सब, तत्वज्ञान दीजै॥
ओम जय कश्यप…
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