Pregnancy Me Jitiya Vrat Kaise Rakhe: हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर जितिया व्रत रखा जाता है। इसे जीवितपुत्रिका व्रत भी कहा जाता है। ये व्रत महिलाएं अपने बच्चों की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखती हैं। इस व्रत में पूरे दिन बिना खाना और पानी के निर्जला उपवास रखना होता है। इसलिए ये व्रत कठीन भी माना जाता है। अब चूंकि ये व्रत संतान के लिए है, इसलिए प्रेग्नेंट महिलाएं भी अपने कोख में पल रहे बच्चे के लिए इस व्रत को करने की इच्छा रखती हैं। वहीं, जिनके पहले से बच्चे हैं, और फिर वो दूसरी या तीसरी बार भी प्रेग्नेंट हैं तब वो जितिया का व्रत रखना चाहती हैं। लेकिन सवाल ये है कि क्या प्रेग्नेंसी में जितिया का व्रत रखना चाहिए? गर्भवती महिलाओं को जितिया करना चाहिए या नहीं और इसे करने के नियम क्या हैं, ये आप यहां से जान सकते हैं।
क्या प्रेगनेंसी में जितिया का व्रत कर सकते हैं?
गर्भवती महिलाएं जितिया व्रत को रखने से पहले अपने डॉक्टर से जरूर पूछें कि आपकी और बच्चे की सेहत पर इसका क्या असर हो सकता है। व्रत करना है या नहीं ये इस बात पर निर्भर करता है कि प्रेग्नेंसी ज्यादा रिस्क वाली है या नार्मल है। अगर डॉक्टर और आपका परिवार व्रत करने की सलाह देते हैं, तब आप इस व्रत को कर सकती हैं।
प्रेगनेंसी में जितिया व्रत कैसे करें?
प्रेगनेंसी में बिना पानी या बिना भोजन का उपवास मां और बच्चे दोनों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। ऐसे में गर्भवती महिलाएं फलाहार या लिक्विड डाइट जैसे दूध, नारियल पानी, फल, साबूदाना खिचड़ी, सूखा मेवा आदि लेकर व्रत कर सकती हैं।
अगर गर्भवती महिलाएं व्रत न कर सकें, तो क्या करें?
यदि गर्भवती महिलाएं व्रत नहीं कर पा रहीं, तो किसी और से (मां, बहन, सास) से व्रत करवाकर पुण्य फल अपने बच्चे के लिए समर्पित करवा सकती हैं। महिलाएं अपने घर में ही पूजा करवा सकती हैं और प्रसाद बांट सकती हैं।
