Holashatak Kin Rashiyo Ke Liye Shubh Nahi Rahenge: होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च तक रहेंगे। फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से पूर्णिमा तक के इन आठ दिनों को ज्योतिष शास्त्र में शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है। मान्यता है कि इस अवधि में ग्रहों की उग्रता बढ़ जाती है और विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार, निवेश या बड़े निर्णय लेने से बचना चाहिए।
होलाष्टक किनके लिए शुभ नहीं रहेगा?
इस बार होलाष्टक के दौरान ग्रहों की स्थिति और भी प्रभावशाली है। मिथुन में गुरु, सिंह में केतु, मीन में शनि और कुंभ राशि में मंगल, बुध, शुक्र, सूर्य और राहु की पंचग्रही युति बनी हुई है। साथ ही 26 फरवरी को बुध वक्री हो रहे हैं, जिससे संचार, व्यापार, दस्तावेज और निर्णय क्षमता पर भ्रम की स्थिति बन सकती है।
ऐसे में यह समय विशेष रूप से कुछ राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण रह सकता है। इन 8 दिनों में मानसिक तनाव, आर्थिक दबाव, रिश्तों में गलतफहमी, स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव और अचानक बाधाएं देखने को मिल सकती हैं। आइए विस्तार से जानते हैं किन राशियों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
कर्क राशि
कर्क राशि के लिए यह समय इसलिए चुनौतीपूर्ण है क्योंकि कुंभ में बनी पंचग्रही युति आपके अष्टम भाव को सक्रिय कर रही है, जो अचानक घटनाओं, मानसिक तनाव और गुप्त शत्रुओं से जुड़ा होता है। राहु और मंगल की संयुक्त ऊर्जा आवेग और विवाद की स्थिति पैदा कर सकती है, जबकि बुध के वक्री होने से आर्थिक मामलों में भ्रम और गलत निर्णय का खतरा रहेगा। इस दौरान अनपेक्षित खर्च, स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव और पारिवारिक चिंता बढ़ सकती है।
उपाय: प्रतिदिन शिवलिंग पर जल अर्पित करें और 'ॐ नमः शिवाय' का जप करें, इससे मानसिक स्थिरता बनी रहेगी।
सिंह राशि
सिंह राशि में पहले से केतु स्थित है, जो आत्मविश्वास और स्पष्टता को प्रभावित करता है। अब कुंभ की पंचग्रही युति आपके सप्तम भाव पर प्रभाव डाल रही है, जो दांपत्य और साझेदारी का भाव है। इस कारण रिश्तों में गलतफहमी, अहंकार टकराव और संवाद की कमी देखने को मिल सकती है। बुध वक्री होने से बातों का गलत अर्थ निकाला जा सकता है। करियर में भी साझेदारी से जुड़े निर्णय सोच-समझकर लेने होंगे।
उपाय: प्रतिदिन सूर्य को जल अर्पित करना और आदित्य मंत्र का जप करना लाभकारी रहेगा।
वृश्चिक राशि
वृश्चिक राशि वालों के लिए कुंभ की ग्रह युति चतुर्थ भाव को प्रभावित कर रही है, जो घर, माता और मानसिक शांति से जुड़ा होता है। मंगल और राहु की ऊर्जा घर में तनाव या कार्यस्थल पर अस्थिरता ला सकती है। बुध के वक्री होने से प्रॉपर्टी, वाहन या कागजी कार्यों में गलती संभव है। इस समय भावनात्मक संतुलन बनाए रखना जरूरी होगा, क्योंकि छोटी बात भी विवाद का रूप ले सकती है।
उपाय: हनुमान जी की उपासना और हनुमान चालीसा का पाठ करना राहत देगा।
मकर राशि
मकर राशि के लिए कुंभ में बना ग्रह योग आपके धन भाव को प्रभावित कर रहा है। इससे आय की तुलना में खर्च अधिक हो सकता है। राहु की उपस्थिति अचानक आर्थिक निर्णय लेने के लिए प्रेरित कर सकती है, जो आगे चलकर नुकसान दे सकते हैं। शनि का मीन में होना परिश्रम बढ़ाएगा लेकिन परिणाम धीमे मिलेंगे, जिससे निराशा हो सकती है। इस दौरान निवेश और उधार के मामलों में सावधानी रखें।
उपाय: काले तिल और सरसों का तेल दान करना तथा शनि मंत्र का जप करना शुभ रहेगा।
मीन राशि
मीन राशि में शनि की उपस्थिति पहले से जिम्मेदारियां और मानसिक दबाव बढ़ा रही है। कुंभ की पंचग्रही युति आपके द्वादश भाव को सक्रिय कर रही है, जो खर्च, विदेश और मानसिक चिंता से संबंधित होता है। बुध के वक्री होने से निर्णय लेने में असमंजस और योजनाओं में देरी हो सकती है। अनावश्यक खर्च और नींद में कमी भी महसूस हो सकती है। इस समय धैर्य और संयम अत्यंत आवश्यक है।
उपाय: प्रतिदिन पीपल के नीचे दीपक जलाकर विष्णु मंत्र का जप करना सकारात्मक प्रभाव देगा।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
