Hartalika Teej Vrat 2026 Moon Rise Time: हरतालिका तीज का व्रत आज 14 सितंबर 2026, सोमवार को रखा जा रहा है। बिहार में भी सुहागिन महिलाएं सुबह से निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर रही हैं। तीज के दिन पूजा सुबह और शाम दोनों समय पर की जाती है। सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में तीज की पूजा करना शुभ माना जाता है। प्रदोष काल में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा करनी चाहिए।
तीज पर चंद्रोदय और चंद्रास्त का समय
हरतालिका तीज पर शाम की पूजा कब करें
14 सितंबर को हरतालिका तीज की पूजा प्रदोष काल में शाम 5:43 बजे से 7:13 बजे तक करना शुभ रहेगा। इस दौरान भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन, श्रृंगार, सुहाग सामग्री अर्पण, तीज की कथा और आरती की जा सकती है। महिलाएं पूजा की तैयारी प्रदोष काल शुरू होने से पहले कर लें। शाम 5:43 बजे के बाद शिव-पार्वती की पूजा शुरू करके प्रदोष काल के भीतर मुख्य पूजन और आरती पूरी करना अच्छा रहेगा। इस दिन चंद्रास्त से पहले तक पूजा कर लेना चाहिए। आइए जानते हैं कि बिहार के विभिन्न शहरों में चंद्रोदय और चंद्रास्त का टाइम क्या है।
बिहार के प्रमुख शहरों में चंद्रोदय-चंद्रास्त का समय
बिहार के अलग-अलग शहरों में सूर्यास्त और चंद्रोदय के समय में कुछ मिनट का अंतर रहेगा। ऐसे में शाम की पूजा करने वाली महिलाओं के लिए अपने शहर का चंद्रोदय और चंद्रास्त जानना भी जरूरी है। नीचे पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, मधुबनी, गया, बेगूसराय, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, पूर्णिया और सहरसा का शहरवार समय दिया गया है।
| शहर | चंद्रोदय | चंद्रास्त |
|---|
| पटना | सुबह 8:24 बजे | शाम 7:41 बजे |
| मुजफ्फरपुर | सुबह 8:24 बजे | शाम 7:39 बजे |
| दरभंगा | सुबह 8:22 बजे | शाम 7:37 बजे |
| मधुबनी | सुबह 8:22 बजे | शाम 7:36 बजे |
| गया | सुबह 8:28 बजे | शाम 7:38 बजे |
| बेगूसराय | करीब सुबह 8:25 बजे | करीब शाम 7:36 बजे |
| समस्तीपुर | सुबह 8:26 बजे | शाम 7:34 बजे |
| सीतामढ़ी | करीब सुबह 8:25 बजे | करीब शाम 7:39 बजे |
| पूर्णिया | सुबह 8:15 बजे | शाम 7:31 बजे |
| सहरसा | सुबह 8:18 बजे | शाम 7:34 बजे |
कैसे करें हरतालिका तीज की पूजा
प्रदोष काल शुरू होने से पहले पूजा की सारी सामग्री तैयार कर लें। पूजा स्थान पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या गौरा-शंकर की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करें। सबसे पहले शिवजी को जल और गंगाजल अर्पित करें। इसके बाद बेलपत्र, फूल और धतूरा चढ़ाएं। माता पार्वती को सिंदूर, कुमकुम, चुनरी और सुहाग की सामग्री अर्पित करें। इसके बाद हरतालिका तीज की कथा पढ़ें या सुनें। शिव-पार्वती के विवाह और माता पार्वती की तपस्या का स्मरण करते हुए पूजा करें। अंत में दीपक और कपूर से आरती करें।
तीज की पूजा में इन बातों का रखें ध्यान
पूजा के दौरान माता पार्वती को सुहाग की सामग्री जरूर अर्पित करें। शिवजी को बेलपत्र और जल चढ़ाएं। पूजा पूरी होने के बाद तीज की कथा और आरती करें। व्रत रखने वाली महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें। हरतालिका तीज का यह व्रत मुख्य रूप से शिव-पार्वती की पूजा और अखंड सौभाग्य की कामना से जुड़ा है।
